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जानिए सैनिक से कैसे राजनीति के ''कैप्टन'' बने ''अभिमन्यु''

* राजनीति के सफर में वह पिछले 20 सालों से हैं। कैप्टन अभिमन्यु ने अपने कठिन परिश्रम और अंतिम छोर तक संपर्क कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों से जुड़ाव किया।
* सन् 1997 में वे वरिष्ठ भाजपा नेता श्री लाल कृष्ण आडवाणी की स्वर्ण जयंती रथ यात्रा में विशाल जनसमूह के साथ शामिल हुए।
* सन् 1998 में वह रोहतक से भाजपा उम्मीदवार स्वामी इन्द्रवेश के चुनाव एजेंट और समन्वयक बने।
* सन् 1999 में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. साहिब सिंह वर्मा के चुनाव एजेंट और समन्वयक बने और भारत की सबसे बड़े लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र- बाहरी दिल्ली (35,00,000 मतदाता) से सम्पूर्ण चुनाव प्रचार अभियान का को पूरा करवाया।
* सन् 2003 में छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों के समय वह भाजपा चुनाव प्रबंधन टीम के सदस्य के रूप में अपनी सेवा दी।
* सन् 2004-2005 के बीच एक वर्ष की अवधि के भीतर झज्जर और रोहतक में भारत के सबसे सम्मानीय प्रधानमंत्रियों में से एक श्री अटल बिहारी वाजपेयी की दो रैलियों को आयोजित करवाया।
* सन् 2004 में उन्होंने हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा के विरूद्ध रोहतक लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ा। इस चुनाव में कैप्टन अभिमन्यु ने 1,73,800 मतों के साथ द्वितीय स्थान प्राप्त करते हुए एक मुख्य राजनैतिक उमंग पैदा कर दी और इंडियन नेशनल लोकदल के उम्मीदवार की जमानत जब्त हो गई।
* हरियाणा में लोगों के बीच उनकी लोकप्रियता को देखते हुए, भाजपा ने उन्हें 2005 में हरियाणा का महासचिव बनाया और 2010 में तत्कालीन पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने उनके राष्ट्रीय मुद्दों पर ज्ञान को तवज्जो देते हुए राष्ट्रीय सचिव के पद पर पदोन्नत किया गया।
* सन् 2008 में उन्होंने राजस्थान और दिल्ली विधानसभा चुनावों में व्यापक रूप से प्रचार किया।
* सन् 2014 में इन्होने नारनौंद (हिसार) से विधानसभा का चुनाव लड़ा और विधायक बने साथ ही भाजपा की पहली सरकार में मंत्री भी बने।
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