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कैबिनेट: किराए की कोख का कारोबार होगा बैन

बिल के तहत विदेशियों को नहीं दी जाएगी सेरोगेसी सुविधा

कैबिनेट: किराए की कोख का कारोबार होगा बैन
नई दिल्ली. आखिरकार केंद्र सरकार ने एक ऐसे कानूनी विधेयक को मंजूरी दी है जिसमें किराए की कोख का व्यापार पर अंकुश लगेगा। मसलन अविवाहित युगल, एकल माता-पिता, लिव इन पार्टनर या समलैंगिक किराए की कोख के जरिए बच्चे हासिल नहीं कर सकेंगे। सरकार इस विधेयक को संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में पेश करेगी।
केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को सरोगेसी यानि किराए की कोख के कारोबार पर शिकंजा कसने वाले एक कानूनी प्रावधान वाले सरोगेसी (नियमन) विधेयक-2016 को मंजूरी दी है। इसमें किराए की कोख वाली मां के अधिकारों की रक्षा के साथ ही ऐसे बच्चों के अभिभावकों को कानूनी मान्यता देने का प्रावधान किया गया है। स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रस्ताव के अनुसार किराए की कोख मसौदा विधेयक-2016 का लक्ष्य देश में किराए की कोख संबंधी प्रक्रिया के नियमन को समुचित ढंग से अंजाम देना है। कैबिनेट ने इस विधेयक को संसद में पेश करने को अनुमति दे दी। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा सरोगेसी मामले पर कानून को सख्त करने की दिशा में एक मंत्रियों का समूह गठित किया गया था, जिसमें स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा के अलावा वाणिज्य मंत्री निर्मला सीतारमण एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री हरसिमरत कौर भी शामिल थीं। मंत्रियों के एक समूह ने हाल में इस विधेयक को अंतिम रूप दिया था, जिस पर केंद्रीय कैबिनेट ने मुहर लगा दी है। ऐसे विधेयक लाने के लिए केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा भी दाखिल किया था। संसद के दोनों सदनों द्वारा विधेयक को मंजूरी दिये जाने के 10 महीने बाद कानून को अधिसूचित किया जाएगा।
विदेशी नहीं ले सकेंगे किराए की कोख
केंद्र सरकार द्वारा मंजूर किये गये इस विधेयक का उद्देश्य बताते हुए केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने बताया कि देश में अनैतिक तौर-तरीकों पर रोक लगाना इसलिए जरूरी है, क्योंकि भारत व्यावसायिक सरोगेसी के लिहाज से हब बनकर उभर रहा है। इस विधेयक में खासकर कानूनी रूप से विवाहित भारतीय दंपतियों को ही किराए की कोख के जरिए बच्चे हासिल करने की अनुमति होगी और किसी भी रूप में विदेशी और ओसीआई कार्ड धारक किराए की कोख के जरिए बच्चे हासिल नहीं कर सकते। गौरतलब है कि विदेशी भारत में महिलाओं विशेषकर ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों की महिलाओं के शोषण को बढ़ावा दे रहे थे और देश में किराए की कोख का कारोबार चल रहा था। इसके अलावा इस विधेयक में किये गये प्रावधानों के मुताबिक अविवाहित युगल, एकल माता-पिता, लिव इन पार्टनर और समलैंगिक किराए की कोख के जरिए बच्चे हासिल नहीं कर सकेंगे। विधेयक में बच्चे को छोड़ने और व्यावसायिक सरोगेसी के तरीके से बच्चे को जन्म दिलाने जैसे उल्लंघन के मामलों में 10 साल तक की कैद और 10 लाख रुपये के जुमार्ने का प्रावधान रखा गया है। ऐसे बच्चों को गोद लेने वालों को 25 साल तक रिकार्ड रखना होगा।

एक बार ही होगा इस्तेमाल
इस सेरोगेसी विधेयक के तहत व्यावसायिक सेरोगेसी नहीं की जा सकती सिर्फ जरूरतमंद बांझ दंपतियों के लिए नैतिक सेरोगेट मां की अनुमति दी गई है। प्रावधान के अनुसार केवल कानूनी रूप से विवाहित भारतीय दंपतियों को बच्चों को अपनाने के लिए इस तरीके का इस्तेमाल करने की अनुमति देने का प्रस्ताव है जो कम से कम पांच साल से शादीशुदा हों। यही नहीं एक महिला एक ही बार ऐसे बच्चें को हासिल कर सकेगी। इस प्रस्तावित कानून के अनुसार इस तरीके से बच्चे को चाहने वाली महिला बच्चे की मां होगी। विधेयक के अनुसार सरोगेसी के माध्यम से बच्चा चाहने वाली महिला की उम्र 23 से 50 साल के बीच होनी चाहिए और उसके पति की आयु 26 से 55 साल के बीच होनी चाहिए। दूसरी महिला के कोख से जन्मे बच्चें को अभिभावक उसी तरह के अधिकार देंगे जैसे बायोलॉजिकल बच्चे के होते हैं। किराए की कोख के लिए विधेयक में यह भी प्रावधान किये गये हैं कि किराए की कोख का इस्तेमाल किसी नजदीकी सगे संबन्धी के साथ ही किया जा सकता है। वहीं किराए की कोख की प्रक्रिया के लिए पंजीकृत सरोगेट क्लीनिकों को ही अनुमति दी जाएगी।
निगरानी तंत्र बनेंगे
केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज ने बताया कि सरोगेसी व्यवस्था पर निगरानी के लिए केंद्र और राज्यों में ऐसे बोर्ड और प्राधिकरण बनाये जाएंगे, जिसमें केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री व स्वास्थ्य सचिव के अलावा तीन महिला सांसद शामिल रहेंगी। जबकि प्राधिकरण में विधि मंत्रालय और विशेषज्ञ शामिल रहेंगे। गौरतलब है कि सरकार ने हाल में संसद में कहा था कि मसौदा विधेयक के प्रावधानों को इस तरह बनाया जा रहा है कि किराये की कोख से उत्पन्न होने वाले बच्चों के अभिभावकों को कानूनी दर्जा और इसे पारदर्शी स्वरूप देने का प्रावधान होगा।
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