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एड्स पीड़ितों के साथ भेदभाव करने पर मिलेगी ये सजा

कैबिनेट ने 2014 एचआईवी/एड्स (रोग और बचाव) बिल के बदलावों को मंजूरी दे दी है।

एड्स पीड़ितों के साथ भेदभाव करने पर मिलेगी ये सजा
नई दिल्ली. एचआईवी या एड्स पीड़ितों के साथ भेदभाव करना और उन्हें बुनियादी अधिकारों से वंचित करना अब महंगा पड़ सकता है। वहीँ जो लोग उन्हें परेशान करते हैं या उनके साथ दुर्व्यवहार करते हैं उनके लिए भी सरकार ने कानून बना दिया है। 2014 में एचआईवी और एड्स पीड़ितों के लिए बनाए गए बिल के बदलावों को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। जिसके अनुसार अब HIV या AIDS संक्रमितों के साथ भेदभाव करने पर 3 महीने से लेकर 2 साल तक की सजा का प्रावधान किया गया है।
देश में करीब 21 लाख एचआईवी और एड्स रोगी होने का अनुमान है, जिनमें से करीब 10 लाख अपना उपचार करा रहे हैं। एचआईवी संक्रमण का पता लगने पर इन लोगों के साथ जगह-जगह समाज, कार्यस्थल और रोजगार में भेदभाव होता है। इसे दूरे करने के लिए ही यह विधेयक के शक्ल में कानून बनाया गया है। काफी समय से यह विधेयक तैयार किया जा रहा था। अब संसदीय समिति की सिफारिशों को शामिल करते हुए इसे कैबिनेट ने मंजूरी दी है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि विधेयक के प्रावधानों के अनुसार किसी मरीज को एचआईवी या एड्स होने पर किसी भी अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकेगा। चाहे वह रोजगार हो, बीमा हो या अस्पताल में इलाज। मरीजों को इलाज भी उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी होगी। साथ ही भेदभाव करने वालों के खिलाफ शिकायतों की जांच के लिए हर राज्य में लोकपाल नियुक्त किया जाएगा। शिकायतों के निपटारे के लिए समय सीमा तय की जाएगी। इस कानून में एड्स और एचआईवी पीड़ितों के साथ भेदभाव करने पर 3 महीने से लेकर 2 साल तक की सजा और करीब एक लाख तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
विधेयक में उन बातों को सूचीबद्ध किया गया है जिनके आधार पर एचआईवी संक्रमित लोगों और उनके साथ रह रहे लोगों के साथ भेदभाव करने पर प्रतिबंध लगाया गया है। इनमें रोजगारों, शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश, स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं, निवास के लिए या किराए पर दी गई संपत्तियों, सार्वजनिक या निजी कार्यालयों में रोजगार और शिकायत तंत्र बनाने, स्वास्थ्य बीमा में भेदभाव दूर करने आदि मुद्दे शामिल हैं।
यह नाबालिगों के लिए भी संरक्षण प्रदान करता है। भारत में करीब 21 लाख व्‍यक्ति एच आई वी संक्रमित है। हालांकि पिछले एक दशक में एच आई वी का संक्रमण कम हुआ है। यह विधेयक राष्‍ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के त‍हत नए संक्रमण को काबू करने में आवश्‍यक सहायता प्रदान करेगा।
संशोधन में क्या है
संशोधन को आज मंजूरी देने के बाद अब इस बिल में एड्स पीड़ितों निम्नलिखित अधिकार मिलेंगे
1-एड्स पीड़ितों के साथ भेदभाव करने वालों के खिलाफ शिकायतों की जांच के लिए एक औपचारिक तंत्र स्थापित किया जा सकेगा और कानूनी जवाबदेही सुनिश्चित की जा सकेगी।
2-किसी भी व्यक्ति को एचआईवी संबंधी उसकी स्थिति के बारे में खुलासा करने के लिए तब तक बाध्य नहीं किया जा सकता जब तक कि उसकी सूचित सहमति न हो और अदालत के आदेश के तहत ऐसा करना अनिवार्य नहीं हो।
3- एचआईवी से संक्रमित लोगों और उनके साथ रह रहे लोगों के खिलाफ नफरत फैलाने की वकालत करने या उनसे संबंधित सूचना प्रकाशित करने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है
4- प्रस्ताव के अनुसार 18 वर्ष से कम आयु के एचआईवी से संक्रमित या पीड़ित हर व्यक्ति को साझे घर में रहने और घर की सुविधाओं का आनंद लेने का अधिकार है।
5- हर राज्य सरकार एक लोकपाल को नियुक्त करे ताकि वह एचआईवी पीड़ितों की शिकायतों को दूर करे और भेदभाव करने वाले लोगों पर कार्रवाई की जा सके।
मेडिकल पार्क के लिए भी मिली मंजूरी
एक अन्‍य निर्णय में मंत्रिमंडल ने स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय के अंतर्गत सार्वजनिक निजी भागीदारी की मणिरत्‍न कम्‍पनी एचएलएल लाइफ केयर लिमिटेड को तमिलनाडु के कांचीपुरम जिले के चेंगलपट्टू में 330 एकड़ से अधिक की सरकारी भूमि को पट्टे पर देने की अनुमति प्रदान की। इस भूमि पर मेडिकल पार्क बनाया जायेगा। इसमें चिकित्‍सा उपकरणों का निर्माण किया जायेगा।
इस मेडिकल पार्क में स्पेशल परपज व्हीकल और एचएलएल की बराबर की हिस्सेदारी होगी। यह देश का पहला चिकित्सा तकनीकी केन्द्र होगा जिसका उद्देश्य उच्च टैक्नोलॉजी वाले उपकरणों का देश में कम दाम में निर्माण करना है। इससे बड़ी संख्‍या में लोगों को किफायती दर पर स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाएं मिल सकेंगी।
भारत और यूरोपीय संघ के बीच जल सहयोग संबंधी समझौता ज्ञापन को भी मंजूरी दी गई। इसका उद्देश्‍य भारत में जल प्रबंधन के क्षेत्र में तकनीकी, वैज्ञानिक और प्रबंधन क्षमताओं का विस्‍तार करना है। अफ्रीकी एशियाई ग्रामीण विकास संगठन के साथ समझौता ज्ञापन को भी अनुमति दी गई। इससे ग्रामीण विकास के क्षेत्र में क्षमता निर्माण को बढ़ावा दिया जा सकेगा।
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