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अब अरुणाचल से ऑपरेट कर सकेगा C-17 ग्लोबमास्टर विमान

सी-17 ग्लोबमास्टर की लैंडिंग से दुरस्थ इलाकों में लोगों और सामानों को जल्द पहुंचाने में मदद मिलेगी।

अब अरुणाचल से ऑपरेट कर सकेगा C-17 ग्लोबमास्टर विमान
ईटानगर. अरुणाचल प्रदेश के मेचुका में भारत ने सी 17 ग्‍लोबलमास्‍टर विमान को उतारकर साफ कर दिया है कि वह किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है।
भारत ने अपने सुदूर पूूर्वी राज्य अरुणाचल प्रदेश में चीन की सीमा से महज 29 किमी दूर स्थित मेचुका में वायु सेना के C-17 ग्लोबमास्टर को उतारकर बड़ी सफलता हासिल की हैै। इसके साथ ही भारत नेे अपनी मंशा भी साफ कर दी है। यहां पर ग्लोबलमास्टर को उतारने के पीछे भारत का मकसद किसी भी आपात स्थिति में सेना और सैन्य सामग्री को तय समय में पहुंचाने का है। इस इलाके से रेल और रोड संपर्क काफी दूर है और किसी भी आपात स्थिति में विमान सेवा के जरिए पहुंचने और सामरिक तैयारियों के लिहाज से ये क्षेत्र काफी अहम है।
मेचुका के इस इलाके से ट्रेन या हवाई यात्रा के लिए पहले सड़क से डिब्रूगढ़ तक का 500 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। इससे पूर्व लेह में भी भारतीय वायुसेना के इस विमान को उतारकर भारत ने अपनी तैयारियों का जायजा लिया था। गौरतलब है कि कल ही लेह के डेमचुक इलाके में चीनी सेना के भारतीय सीमा में घुसआने और उन्हें सीमा से बाहर खदेड़े जाने की भी खबर आई थी। हालांकि सेना ने किसी तरह की घुसपैठ से बाद में इंकार कर दिया था।
ग्लोबमास्टर की ये लैंडिंग ऊंचे इलाकों में एयरफोर्स की सामरिक ताकत के परीक्षण की दिशा में काफी बड़ा कदम है। अभी तक वायुसेना के पास एएन-32 और सी-130 जे जैसे विमानों की लैंडिंग की क्षमता है। सी-17 ग्लोबमास्टर की लैंडिंग से दुरस्थ इलाकों में लोगों और सामानों को जल्द पहुंचाने में मदद मिलेगी। किसी आपदा की स्थिति में राहत को जल्द और ज्यादा मात्रा में पहुंचाया जा सकेगा।
अरुणाचल प्रदेश में पश्चिम सियांग जिले के मेचुका स्थित एडवांस लैंडिंग ग्राउंड समुद्रतल से 6200 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। वहां सिर्फ 4200 फीट का लैंडिंग एरिया है, फिर भी C-17 ग्लोबमास्टर विमान की ट्रायल लैंडिंग में सफलता मिली।
ग्लोबमास्टर विमान को 2013 में वायुसेना में शामिल किया गया था। सीमा पर सैनिकों और टैंकों एवं उपकरणों को जल्द से जल्द पहुंचाने की भारतीय वायुसेना की क्षमता को मजबूती देने के मकसद से सबसे बड़े 70 टन के सी-17 परिवहन विमान 'ग्लोबमास्टर' को वायुसेना के बेड़े में शामिल किया गया था। अमेरिकी सी-17 में करीब 80 टन की क्षमता और 150 सुसज्जित सैनिकों को ढोने की क्षमता है। इस विमान ने एयरफोर्स के बेड़े में रूस के आईएल-76 की जगह ली थी. आईएल-76 की क्षमता करीब 40 टन वजन ढोने की है।
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