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बजट 2018: अल्पसंख्यक और दलित को लेकर विपक्ष ने मोदी सरकार पर साधा निशाना

विपक्षी दलों ने वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा आज संसद में पेश आम बजट की आलोचना करते हुए इसे अर्थव्यवस्था की बर्बादी का रोडमैप बताया है।

बजट 2018: अल्पसंख्यक और दलित को लेकर विपक्ष ने मोदी सरकार पर साधा निशाना

विपक्षी दलों ने वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा आज संसद में पेश आम बजट की आलोचना करते हुए इसे अर्थव्यवस्था की बर्बादी का रोडमैप बताया है। कांग्रेस नेता वीरप्पा मोइली और शशि थरूर ने बजट को वास्तविकता से परे करार दिया और दावा किया कि मोदी सरकार ने मध्य वर्ग तथा रोजगार की ओर कोई ध्यान नहीं दिया।

मोइली ने संसद भवन परिसर में संवाददाताओं से कहा, "यह बजट वास्तविकता से परे है। यह सरकार हमेशा चुनावों को ध्यान में रखकर बातें करती है और यहां भी वही किया गया है। देश के लोगों को इस बजट से निराशा हाथ लगी है।"

उन्होंने कहा कि नौकरियां खत्म हो रहीं हैं, फैक्ट्रियां बंद हो रही हैं। लोगों को रोजगार चाहिए, लेकिन सरकार ने इस बारे में कोई बात नहीं की।"

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कांग्रेस के लोकसभा सदस्य थरूर ने कहा, "हमें इंतजार था कि सरकार कुछ बड़ी घोषणाएं करेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इस बजट में मध्य वर्ग की उपेक्षा की गई है। रोजगार को लेकर कोई बात नहीं हुई है। यह बहुत निराशाजनक बजट है।"

माकपा नेता मोहम्मद सलीम ने कहा, 'यह एक जुमला बजट है। इसमें किसानों, मजदूरों और नौजवानों के लिए कुछ नहीं है। सरकार स्थायी नहीं, ठेके वाली नौकरियों की बात कर रही है।"

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी एल पुनिया ने इसे पूरी तरह से निराशावादी बजट बताते हुए कहा कि किसानों को स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के आधार पर कृषि उपज लागत की डेढ़ गुना कीमत दिलाने का बजट में प्रावधान किया है जबकि साल 2015 में मोदी सरकार ने उच्चतम न्यायालय में हलफनामा देकर कहा था कि सरकार आयोग की इस सिफारिश में विश्वास नहीं करती।

पुनिया ने कहा कि ऐसे में सरकार की इन बातों पर विश्वास करना मुश्किल है। किसानों के गुस्से को देखते हुये सरकार ने यह घोषणा की है। पुनिया ने कहा कि बजट में स्वास्थ्य बीमा योजना शुरू करने की घोषणा की गयी है लेकिन यह योजना भी बीमा कंपनियों के माध्यम से शुरू की है, इससे बीमा कंपनियों का ही लाभ होगा।

बजट में लोकलुभावन घोषणाओं के सवाल पर पुनिया ने कहा कि सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ समाज के सभी वर्गों में उभर रहे गुस्से और उपचुनावों में भाजपा की हार के दबाव में इसमें कुछ लोकलुभावन घोषणाएं की गयी हैं, लेकिन यह समय ही बताएगा कि ये घोषणाएं किस हद तक परवान चढ़ती हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने बजट पर कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की। पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी ने बजट को निराशाजनक बताते हुए कहा कि किसानों के लिए कर्ज माफी की घोषणा की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ और ना ही रोजगार सृजन की दिशा में कोई सार्थक पहल की गयी। उन्होंने कहा कि महंगायी कम करने के लिए बजट में कोई उपाय नहीं किए गए, ऐसे में यह बजट गरीबों के साथ छल है।

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सपा नेता किरणमय नंदा ने इसे ‘बोगस बजट' बताते हुये कहा कि इसमें समाज के सिर्फ धनाढ्य वर्ग के लोगों का खास ख्याल रखा गया है। इसमें गरीब, किसान, नौजवान, दलित, पिछड़े, शोषित एवं छोटे कारोबारियों के उत्थान का कोई प्रावधान नहीं किया गया है।

'आप' ने जेटली के बजट को ‘पकौड़ा बजट' करार दिया। आप के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने कहा कि बजट में किसान की कर्जमाफी का कोई रास्ता निकालने की तात्कालिक जरूरत को पूरा नहीं किया गया। उन्होंने कहा ‘‘यह आम आदमी को निराश करने वाला बजट है यह बजट सरकार की दृष्टि और सोच के मुताबिक ‘पकौड़ा बजट' साबित होगा।'

राकांपा नेता प्रफुल्ल पटेल ने बजट को हर साल की तरह पेश होने वाला रिवायती बजट करार दिया। पटेल ने कहा कि बजट में ऐसा कुछ भी नया नहीं है जिसके आधार पर यह कहा जाये कि यह अन्य साल से अलग है।

बसपा के राज्यसभा सदस्य वीर सिंह ने कहा कि दलित और अल्पसंख्यकों के कल्याण के सरकार के दावों की हकीकत बजट से उजागर हो गयी। उन्होंने कहा कि बजट में सरकार द्वारा अल्पसंख्यक और दलित वर्ग के समुदायों के विकास के लिये कोई प्रावधान नहीं किया गया है। इस बजट से अमीर और गरीब की खाई में इजाफा तय है।

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