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बजट 2018: नौकरी पेशा लोगों को मिली मामूली राहत, टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं

वित्त मंत्री अरूण जेटली ने 2018-19 के बजट में व्यक्तिगत आय कर की दरों और स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया।

बजट 2018: नौकरी पेशा लोगों को मिली मामूली राहत, टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं

वित्त मंत्री अरूण जेटली ने 2018-19 के बजट में व्यक्तिगत आय कर की दरों और स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया। हालांकि उन्होंने नौकरी पेशा और पेंशनभोगियों को 40,000 रुपये की मानक कटौती देने की जरूर घोषणा की है।

विशेषज्ञों के मुताबिक इससे आम नौकरी पेशा लोगों को मामूली राहत ही मिलेगी। यह मानक कटौती नौकरी पेशा लोगों के कर छूट प्राप्त परिवहन भत्ते और सामान्य चिकित्सा व्यय के एवज में दी गई है।

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मानक कटौती की व्यवस्था निर्धारण वर्ष 2006-07 से बंद कर दी गई थी। विशेषज्ञों की मानें तो इस छूट से वास्तव में नौकरी पेशा लोगों की करयोग्य आय में 5,800 रुपये का ही लाभ मिलने का अनुमान है। क्योंकि उन्हें 19,200 रुपये सालाना का कर मुक्त परिवहन भत्ता और 15 हजार रुपये का सामान्य चिकित्सा भत्ता दिया जाता है।

यह राशि 34,200 रुपये बैठती है, इसके स्थान पर अब उन्हें 40,000 रुपये की मानक कटौती उपलब्ध होगी। जेटली ने बजट में कहा, ‘‘वेतनभोगी करदाताओं को राहत प्रदान करने के लिये मैं परिवहन भत्ता के संबंध में मौजूदा छूट तथा विविध चिकित्सीय व्यय की प्रतिपूर्ति के बदले 40,000 करोड़ रुपये तक की मानक कटौती देने का प्रस्ताव करता हूं।'

जेटली ने कहा, ‘‘मानक कटौती का लाभ पेंशनभोगियों को भी मिलेगा जिन्हें परिवहन तथा चिकित्सा व्यय के मद में कोई छूट प्राप्त नहीं होती। तथापि दिब्यांग व्यक्तियों को वर्धित दर पर परिवहन भत्ता देना जारी रखा जायेगा। इसके अतिरिक्त सभी कर्मचारियों के संबंध में अस्पताल में भर्ती होने के दौरान कराये गये उपचार आदि पर अन्य चिकित्सा प्रतिपूर्ति लाभ भी जारी रहेंगे।'

मानक कटौती लागू होने से सरकार के राजस्व पर 8,000 करोड़ रुपए का असर पड़ेगा। इस निर्णय से लाभान्वित होने वाले वेतनभोगी कर्मचारियों तथा पेंशनभोगियों की कुल संख्या लगभग 2.5 करोड़ है।

हालांकि वित्त मंत्री ने इसके साथ ही तीन प्रतिशत शिक्षा उपकर के स्थान पर चार प्रतिशत स्वास्थ्य एवं शिक्षा उपकर भी लगा दिया। इसका मतलब है कि आयकर दाताओं पर कर बोझ 1 प्रतिशत बढ़ जायेगा।

वित्त मंत्री ने कर स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया है। 2.5 लाख रुपये तक की आय को कर मुक्त रखा गया है। इससे ऊपर पांच लाख रुपये तक की आय पर पांच प्रतिशत, पांच से 10 लाख रुपये की सालाना आय पर 20 प्रतिशत तथा 10 लाख रुपये से अधिक की सालाना आय पर 30 प्रतिशत की दर से पूर्ववत कर लगेगा।

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वरिष्ठ नागरिकों के लिये तीन लाख रुपये और 80 साल से अधिक आयु के बुजुर्गेा के मामले में पांच लाख रुपये तक की आय कर मुक्त है। इसके अलावा पिछले साल के बजट में लगाये गये 50 लाख रुपये से एक लाख करोड़ रुपये की आय पर 10 प्रतिशत तथा एक करोड़ रुपये से अधिक की आय पर 15 प्रतिशत का अधिभार भी ज्यों-का-त्यों रखा गया है।

वित्त मंत्री के अनुसार निर्धारण वर्ष 2016-17 के दौरान 1.89 करोड़ वेतनभोगी व्यक्तियों ने अपनी कर विवरणी जमा कराई और कुल मिलाकर 1.44 लाख करोड़ रुपये का कर भुगतान किया। इस लिहाज से प्रत्येक नौकरीपेशा व्यक्ति ने इस दौरान 76,306 रुपये का आयकर सरकारी खजाने में दिया।

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