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पी चिदंबरम का दावा, कहा- ये बजट एनडीए सरकार का आखिरी बजट होगा

पूर्व वित्तमंत्री ने कहा कि जब बजट की परत-दर-परत उधड़ेगी तब आमजन, गरीब, किसान, युवा, बुजुर्ग सब फिर ठगा महसूस करेंगे।

पी चिदंबरम का दावा, कहा- ये बजट एनडीए सरकार का आखिरी बजट होगा

आज पेश किए गए बजट पर पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि वर्ष 2018 का केंद्रीय बजट भाजपानीत राजग सरकार का आखिरी बजट होगा। आमचुनाव के कुछ महीने शेष बचे हैं। तब तक पेश किए गए बजट की परत-दर-परत उधड़ेगी और आमजन, गरीब, किसान, युवा, बुजुर्ग सब फिर ठगा महसूस करेंगे।

एकबार फिर घोषणाओं का अंबार लगा दिया गया। घोषणाओं को अमलीजामा कैसे पहनाएंगे उसका कोई प्रावधान बजटीय प्रावधानों में नहीं दिखता। जोरशोर से घोषणा किया गया कि देश के पांच लाख परिवारों को स्वास्थ्य बीमा केंद्र सरकार के खर्च से दिया जाएगा। मगर, सरकार खर्चेगी कहां से? किस मद से कौन सा फंड इस योजना के लिए रखा गया? समूचे बजट पेपर्स में कहीं कोई उल्लेख नहीं।

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कहा गया कि पांच लाख परिवार यानि कुल दस करोड़ लोगों तक इसका फायदा पहुंचेगा। अगर मोटे अनुमान के तौर पर प्रत्येक परिवार अगर पांच लाख का दस फीसदी यानि 50 हजार रुपए का स्वास्थ्य बीमा लाभ साल में एकबार लेता है तो केंद्र सरकार को 5 लाख करोड़ रुपए खर्चने होंगे।

अगर केंद्र सरकार इंश्योरेंस कंपनी की सहायत से ये योजना जमीन पर उतारती है और उनका प्रीमियम लगभग डेढ़ लाख करोड़ रुपए होगा। वित्तमंत्री अगर घोषणा पर अमल करने को इच्छुक हैं तो इन खर्चों का हिसाब-किताब तो बजट में होना चाहिए था! ऐसा कहीं नहीं है। इसी आधार मैं कह रहा हूं कि केंद्रीय बजट की सबसे बड़ी घोषणा जुमला साबित होगी।

सबसे बड़ी चिंता युवाओं के बीच है नौकरियों का अभाव। इसको कैसे दूर करेंगे? तो बजट में कहा गया कि मुद्रा योजना से रोजगार पैदा हो रहे हैं। मुद्रा योजना में एवरेज 43 हजार रुपए बैंक लोन आवंटित हुआ।

अब मुझे समझ नहीं आता कि इतने कम रकम की कोई क्या खुद रोजगार करेगा और क्या दूसरे व्यक्ति को रोजगार देगा ? किसानों के फसल की एमएसपी डेढ़ गुना बढ़ाए जाने का वायदा किया गया, लेकिन विस्तार से जानकारी नहीं दी गई।

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फिसीकल-डेफिसिट यानि वित्तीय घाटा लगातार बढ़ रहा है। उसे पाटने की व्यवस्था दिखाई नहीं देती। निर्यात को बढ़ावा देने के लिए दावोस में प्रधानमंत्री ने बड़े वादे किए थे लगता है उसे बजट बनाते वक्त भुला दिया गया।

निर्यात बढ़ाने के क्या उपाय किए जाएंगे, बजट में ऐसा कोई उल्लेख नहीं! निजी निवेश को बढ़ावा देने की किसी योजना कोई जिक्र नहीं किया गया। देश के मध्यम वर्गीय लोगों को उम्मीद फिर टूटी। आयकर की सीमा नहीं बढ़ाई गई।

आमलोगों से 31 हजार करोड़ रुपए की आयकर वसूली हो रही है बदले में बतौर स्टैंडर्ड डिडक्शन उन्हें महज 8 हजार करोड़ रुपए लौटाया जा रहा है। हां, 250 करोड़ के आमदनी वाले कॉरपोरेट हाउस, बड़े उद्योगपतियों को जरूर 5 फीसदी तक आयकर में छूट दी गई। सबसे महत्वपूर्ण आमजनों से जुड़ी हुई योजनाओं के बजट में भारी कटौती की गई।

चाहे वो मनरेगा हो फिर प्रधानमंत्री आवास योजना, राष्ट्रीय पेयजल मिशन, स्वच्छ भारत मिशन, नेशनल हेल्थ मिशन, मिड-डे मील योजना, शॉर्ट-टर्म किसानों के लोन हों, नॉर्थ-ईस्ट इन्वेस्टमेंट प्रमोशन, प्राइस स्टेबलाइजेशन फंड और ग्राम ज्योति योजना हो – इन योजनाओं के बजट में क्यों कम किए गए केंद्रीय वित्तमंत्री को संसद में जवाब देना होगा।

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