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बजट 2018: ‘एंटी ह्युमन ट्रैफिकिंग बिल’ पर लगेगी मुहर, CBI जैसी संस्थान करेगी ये बड़ा काम

मानव तस्करी के खिलाफ लाया जा रहा देश का पहला ‘एंटी ह्युमन ट्रैफिकिंग बिल’ बजट सत्र में कानून की शक्ल अख्तियार कर लेगा।

बजट 2018: ‘एंटी ह्युमन ट्रैफिकिंग बिल’ पर लगेगी मुहर, CBI जैसी संस्थान करेगी ये बड़ा काम

मानव तस्करी के खिलाफ लाया जा रहा देश का पहला ‘एंटी ह्युमन ट्रैफिकिंग बिल’ बजट सत्र में कानून की शक्ल अख्तियार कर लेगा। अगले सप्ताह इस संबंध में केंद्र की ओर से गठित किए गए मंत्रियों के समूह (जीओएम) की अंतिम महत्वपूर्ण बैठक होगी। इसके बाद इसे जनवरी के अंत में शुरू होने वाले बजट सत्र में संसद की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सूत्रों ने हरिभूमि को बताया कि बिल का प्रारूप पूरी तरह से तैयार है। अब जीओएम की बैठक में इसे मंजूरी मिलने का इंतजार है, जिसकी अध्यक्षता विदेश मंत्री सुषमा स्वराज कर रही है। इसके अलावा इसमें केंद्रीय शहरी आवास मंत्री हरदीप पुरी भी शामिल हैं। बिल का प्रारूप तैयार करने के लिए मंत्रालय को करीब दो वर्ष का लंबा समय लगा। इसमें सभी पक्षों से कई दौर की बातचीत हुई है।

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बनेगी सीबीआई जैसी नोडल एजेंसी

बिल के प्रारूप को लेकर मंत्रालय के साथ हुई विभिन्न दौर की चर्चा में शामिल रहे एक एनजीओ से जुड़े सूत्र ने कहा कि इसकी सबसे खास बात यह है कि इसमें तस्करी के मामलों की पड़ताल के लिए सरकार ने सीबीआई की तर्ज पर एक राष्ट्रीय नोडल एजेंसी के गठन का निर्णय लिया है।

यह सभी जगहों पर (देश-विदेश) पर बेरोकटोक व निष्पक्षता से जांच करेगी और इसके सामने अधिकार क्षेत्र जैसा कोई विषय कभी आड़े नहीं आएगा। अभी तस्करी कर विदेश भेजी जाने वाली लड़कियों, महिलाओं के प्रकरणों में तमाम राज्यों की जांच एजेंसियां न तो गंभीरता से काम करती हैं और न ही रूचि लेती हैं। मामला देश की सीमाओं से बाहर जाते ही इनके सामने अधिकार क्षेत्र का संकट भी खड़ा हो जाता है।

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प्रारूप के अहम बिंदु

देह व्यापार के लिए तस्करी का शिकार हुई महिलाओं को बचाने के बाद संबंधित राज्य सरकारों को अनिवार्य रूप से उनके पुर्नवास की व्यवस्था करनी होगी। बिल के प्रारूप में इसे पीड़ित महिला के अधिकार के रूप में इंगित किया गया है, जिसके बाद कोई भी प्रदेश इसकी अनुपालना में आनाकानी नहीं कर सकेगा।

इसके अलावा नाबालिग लड़कियों की देह व्यापार के लिए की जाने वाली तस्करी के मामलों में देखे जाने वाले एक बेहद प्रचलित ट्रेंड में दोषी को (लड़कियों के शरीर को अप्राकृतिक ढंग से विकसित करने के लिए दी जाने वाली दवाओं और हॉर्मोन इंजेक्शन दिए जाने का चलन) दस साल की सजा और एक लाख रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

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अधिकारियों का होगा प्रशिक्षण

देह व्यापार में शामिल शख्स को पीड़ित माना जाएगा न की दोषी। कानून अनुपालना में लगे हुए अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। जिससे वह समाज में इसका सख्ती से पालन कराएंगे। पीड़ितों के लिए आश्रय स्थलों का निर्माण किया जाएगा, उनकी देखभाल पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

प्लेसमेंट एजेंसियों पर केंद्र-राज्य स्तर पर खास निगरानी रखी जाएगी। प्रारूप की एक अन्य खास बात यह है कि इसमें सरोगेसी, एडॉप्शन, चाइल्ड लेबर, बैगिंग, मैरिज को अलग से परिभाषित किया गया है।

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