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बोफोर्स मामले में अटॉर्नी जनरल ने सीबीआई के लिए सरकार को दी ये सलाह

अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने बोफोर्स मामले में सरकार को सलाह देते हुए कहा है कि सीबीआई को बोफोर्स मामले में लीव पिटीशन दायर नहीं करनी चाहिए।

बोफोर्स मामले में अटॉर्नी जनरल ने सीबीआई के लिए सरकार को दी ये सलाह

अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने बोफोर्स मामले में सरकार को सलाह दी है। उन्होंने कहा कि सीबीआई को बोफोर्स मामले में लीव पिटीशन दायर नहीं करनी चाहिए। ऐसे मामले को सुप्रीम कोर्ट में नकारा जा सकता है।

डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एण्ड ट्रेनिंग को लिखे पत्र में वेणुगोपाल ने कहा कि सीबीआई को कोर्ट में लंबित ऐसे ही एक मामले में अपना मत साफ करना चाहिए। सीबीआई ने कहा था कि वह एक लीव पिटीशन फाइल करना चाहती है। जिसमें दिल्ली हाईकोर्ट के 31 मई 2005 के फैसले को चुनौती देने की बात कही गयी थी।
जो हाईकोर्ट की ओर से फैसला सुनाया गया था उसमें यूरोप आधारित हिंदुजा ब्रदर्स के खिलाफ बोफोर्स मामले में सभी आरोपों को बेबुनियाद कहे गए थे।
आपको बता दें कि सीबीआई इस मामले को लेकर 22 जनवरी 1990 को एक एफआईआर भी दर्ज की थी। जिसमें स्वीडिश आर्म्स मैन्यूफैक्चर्स बोफोर्स के प्रेसीडेंट मार्टिन अर्डबो और मध्यस्थ बिन चढ्ढा और हिंदुजा पर आपराधिक साजिश रचने के साथ ही धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला दर्ज करवाया गया था।
सूत्रों की माने तो डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एण्ड ट्रेनिंग DoPT ने सीबीआई की मांग पर अटॉर्नी जनरल से कानूनी राय मांगी थी। जिसमें उन्होंने डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एण्ड ट्रेनिंग के सचिव को लिखे पत्र में वेणुगोपाल ने कहा कि अब इस मामले में 12 साल गुजर चुके हैं।
अगर इस मामले में पिटीशन फाइल दाखिल की जाती है, तो सुप्रीम कोर्ट इसे खारिज कर देगा। क्योंकि इस मामले में पहले ही काफी देरी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि रिकॉर्डस में ऐसी कोई वजह नहीं है जिसमें सुप्रीम कोर्ट को यह बताया जा सके कि मामले को उसके समक्ष लाने में इतनी देरी क्यों हुई।
इस मामले पर याचिकाकर्ता और सुप्रीम कोर्ट के वकील अजय अग्रवाल ने केके वेणुगोपाल को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि वह सीबीआई से कहें कि बोफोर्स मामले में उत्तर सहित शपथपत्र पेश करें और जो भी जरूरी कागजात हों, उन्हें भी जमा करे।
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