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सिंधु समझौता: खून और पानी साथ-साथ नहीं बह सकते- मोदी

संधि के तहत सिंधु व उसकी पांच सहायक नदियों के पानी का बंटवारा किया गया है।

सिंधु समझौता: खून और पानी साथ-साथ नहीं बह सकते- मोदी
नई दिल्‍ली. उरी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच चल रही राजनैतिक और कार्यवाही के बीच अब सिंधु समझौत एक बार फिर विवादों में है। पाकिस्तान के साथ सिंधु जल समझौते को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अधिकारियों के साथ सोमवार को बैठक की। एनबीटी के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने बैठक में कहा कि एक समय में खून और पानी दोनों ही साथ-साथ नहीं बह सकते हैं।
बता दें कि इस बैठक में पीएम मोदी के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, विदेश सचिव ए जयशंकर, दो प्रिंसिपल सेक्रेटरी, जल संसाधन सचिव भी मौजूद थे। तो वही सूत्रों के मुताबिक भारत ने सिंधु समझौते को रद्द करने की अटकलों को तो शांत कर दिया है लेकिन आक्रामक रुख अपनाते हुए पाकिस्तान तक पानी की आपूर्ति करने वाली छह में से तीन नदियों के ज्यादा बड़े इस्तेमाल की योजना बनाई है।
यह समीक्षा बैठक 18 भारतीय सैनिकों की जान लेने वाले उरी आतंकी हमले का पाकिस्तान को मुनासिब जवाब देने के विकल्पों पर विचार के सिलसिले में बुलाई गई। सिंधु संधि के तहत सिंधु और उसकी पांच सहायक नदियों के पानी का बंटवारा किया गया है। इनमें से झेलम, चिनाब और राबी नदियों का 80 फ़ीसदी पानी पाकिस्तान को मिलता है और इसी से वहां के एक बड़े इलाके में पानी की ज़रूरत पूरी की जाती है।
भारत में यह मांग लगातार बढ़ रही है कि आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान पर दबाव बनाने के लिए भारत सिंधु नदी के पानी के बंटवारे से जुड़े इस समझौते को तोड़ दे। इस समझौते के तहत छह नदियों, व्यास, रावी, सतलज, सिंधु, चिनाब और झेलम के पानी को दोनों देशों के बीच बांटा गया था। जम्मू कश्मीर के डिप्टी सीएम निर्मल सिंह ने कहा था कि सिंधु जल समझौते के कारण जम्मू और कश्मीर का काफी नुकसान हुआ है। समझौते के कारण राज्य की जनता सिंधु नदीं के पूरे पानी का इस्तेमाल नहीं कर सकती है।
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