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ईश निंदा कानून की वजह से पाकिस्तान में होता है अल्पसंख्यकों का जबरन धर्म परिवर्तन

गैर मुस्लिमों के साथ अत्याचार का आलम यह है कि पाकिस्तान की सरकार ने सख्त ईश निंदा कानून बना रखा है। इस कानून का सबसे अधिक दुरुपयोग हिंदुओं व ईसाइयों के खिलाफ होता है। चर्च और शिया मुसलमानों के मस्जिद पर हमले होते रहे हैं। विगत में अनेक मंदिर पाक में ध्वस्त किए गए।

ईश निंदा कानून की वजह से पाकिस्तान में होता है अल्पसंख्यकों का जबरन धर्म परिवर्तन

पाकिस्तान अल्पसंख्यकों के लिए कभी भी सुरक्षित देश नहीं रहा है। हिंदू, सिख, ईसाई समुदाय के अल्पसंख्यकों पर दशकों से अत्याचार होते रहे हैं। यहां तक कि गैर-सुन्नी मुसलमान भी पाक में बहुसंख्यकों द्वारा प्रताड़ित होते रहे हैं। बहुसंख्यक सुन्नी मुसलमान को छोड़ कर दूसरे सभी समुदाय के लोग घृणा, उत्पीड़न, जबरन धर्मांतरण जैसे जुल्म के शिकार होते रहे हैं। ऐसे मामलों पर पाकिस्तान की सरकार बुत बनी रहती है।

गैर मुस्लिमों के साथ अत्याचार का आलम यह है कि पाकिस्तान की सरकार ने सख्त ईश निंदा कानून बना रखा है। इस कानून का सबसे अधिक दुरुपयोग हिंदुओं व ईसाइयों के खिलाफ होता है। चर्च और शिया मुसलमानों के मस्जिद पर हमले होते रहे हैं। विगत में अनेक मंदिर पाक में ध्वस्त किए गए। भारत विरोध में पाक इस कदर अंधा हो चुका है कि वह अपने देश के हिंदू नागरिकों की हिफाजत पर भी ध्यान नहीं दे रहा है।

पाक के सिंध प्रांत में दो नाबालिग बहनों का पहले अपहरण होना, फिर जबरन उनका धर्म परिवर्तन करा कर मुस्लिम से बगैर इच्छा के शादी करवाना सरासर अपराध है। यह मानवता के लिहाज से भी, इस्लाम के हिसाब से भी और कानूनन भी अपराध है। नाबालिगों की शादी पाक के कानूनों का सीधा उल्लंघन है।

पाकिस्तान भारत से मजहब के नाम पर अलग हुआ था और जिन्ना ने मुसलमानों को बेहतर इंसान मानते हुए पाक को एक बेहतर राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया था। पाक के निर्माता मोहम्मद अली जिन्ना ने कहा था कि वह ऐसा पाकिस्तान बनाएंगे जहां शांति होगी और सभी धर्म के लोग आराम से रहेंगे।

लेकिन अलग पाक बनने के साथ ही सत्ताधारी मुसलमानों ने अन्य मजहब के लोगों पर जुल्म ढाना शुरू किया था। पाक के सैनिकों के जुल्मों का सबसे अधिक शिकार बंगाली मुसलमान हुए थे। नतीजा बांग्लादेश अलग राष्ट्र बना। पश्तूनों-बलूचों और कबीलाइयों के साथ भी पाक सैनिकों ने दशकों तक बर्बर सलूक किया है।

हिंदुओं के साथ तो पाक में उसके गठन के समय से ही अत्याचार होता आया है। 1947-48 में पाक में हिंदुओं की आबादी 13 फीसदी के करीब थी, पर आज वहां 1.85 फीसदी से भी कम है। वहां या तो हिंदुओं का जबरन धर्मपरिवर्तन करा दिया गया या उन्हें मार दिया गया या कुछ लोग जुल्म से तंग आकर पाक से पलायन कर गए।

पाक से हजारों हिंदू पलायन कर भारत आ चुके हैं। आज पाकिस्तान सरकार बेशक दो हिंदू नाबालिगों के अपहरण, जबरन धर्मातंरण व विवाह को पाक का आतंरिक मामला बताए, लेकिन पाक सरकार का ट्रैक रिकार्ड ऐसा रहा है कि जिसमें हिंदुओं के साथ न्याय की उम्मीद कम रहती है। भारत ने पाक स्थित भारतीय उच्चायोग से रिपोर्ट मांगी तो इमरान सरकार हरकत में आई है और जांच के आदेश दिए है।

पाक पीएम इमरान खान को ईमानदारी दिखानी चाहिए और दोनों नाबालिग बहनों को इंसाफ सुनिश्चित करना चाहिए। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के संज्ञान लेने पर पाक सरकार को शब्दों की लफ्फाजी करने के बजाय जिन्होंने हिंदू नागालिकों के साथ जुल्म किया है, उसे दंडित करना चाहिए। पाकिस्तान को जब तक सभी मजहबों के लिए पुरसुकून राष्ट्र नहीं बनाया जाएगा,

तब तक वह विश्व में एक मुकम्मल देश की छवि नहीं बना सकेगा। आतंकवाद को पालने के चलते पाक की छवि दुनिया में पहले से ही खराब है। अब हिंदू अल्पसंख्यकों के साथ अन्याय पाक की छवि को और कलंकित करेगा। जो सरकार नागरिकों की हिफाजत नहीं कर सकती, उसे सत्ता में रहने का भी हक नहीं है। पाक अल्पसंख्यकों की रक्षा करे।

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