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पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों पर मोदी सरकार की बेबसी के ये हैं 5 अहम कारण

अंतरराष्ट्रीय बाजार में जहां कच्चे तेल के दामों में कमी आ रही हैं, बावजूद इसके देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छू रही हैं।

पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों पर मोदी सरकार की बेबसी के ये हैं 5 अहम कारण
अंतरराष्ट्रीय बाजार में जहां कच्चे तेल के दामों में कमी आ रही हैं, बावजूद इसके देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छू रही हैं। देश में पेट्रोल के दाम जहां 80 रुपये के करीब आ गए हैं, वहीं डीजल 60 रुपये में मिल रहा है। इससे महंगाई तो बढ़ ही रही, जनता का जीना भी दूभर हो गया है।
खास बात यह है कि केंद्र की भाजपा सरकार ने भी इस मामले में अपने हाथ खड़े कर लिए है। पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने साफ कह दिया है कि सरकार पेट्रोल और डीजल के दाम की दैनिक समीक्षा रोकने में कोई हस्तक्षेप नहीं करेगी। ऐसे में सवाल उठते हैं कि आखिर सरकार की इस बेबसी की क्या वजह है। यहां हम पेश कर रहे हैं पांच बड़े कारण:-

1 - बाजार के हवाले कीमतें

मोदी सरकार की बेबसी का पहला कारण है कि पेट्रोल और डीजल के दाम अब बाजार के हवाले कर दिए गए हैं। खास बात यह है कि अब पेट्रोलियम कंपनियां ही दैनिक समीक्षा करके पेट्रोलियम पदार्थों के दाम निर्धारित कर रही हैं। ऐसे में वो चाह कर भी हस्तक्षेप नहीं कर सकती है।

2 - जीएसटी से पेट्रोल-डीजल बाहर

दूसरी वजह है कि पूरे देश में एक जुलाई 2017 से लागू हुई नई टैक्स व्यवस्था यानि जीएसटी से पेट्रोल और डीजल को बाहर रखा गया है। पेट्रोल और डीजल पर केंद्र और राज्यों के अलग-अलग एक्साइस और वैट कर लग रहे हैं। केंद्र और राज्य कोई भी टैक्स कम करने को तैयार नहीं है।

3 - केंद्र को हो रही है मोटी कमाई

तीसरी वजह यह है कि केद्र की भाजपा सरकार को पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली कर व्यवस्था से मोटी कमाई हो रही है। पिछले तीन सालों में सरकार को इससे तीन गुना से ज्यादा की कमाई हुई है। ऐसे में मोदी सरकार पेट्रोल और डीजल जैसी दूधारू गाय से कोई छेड़छाड़ बिल्कुल नहीं करना चाहेगी।

4 - करों में बेहतहशा बढ़ोतरी

पेट्रोल और डीजल के दाम इसलिए भी कम नहीं हो रहे है, क्योंकि सेस समेत तमाम करों में बेहतहशा बढ़ोतरी हुई है। सरकारी आंकड़ों की मानें तो केंद्र में मोदी सरकार के आने के बाद पेट्रोल की एक्साइज ड्यूटी पर 120 फीसद और डीजल पर 380 फीसद की बढ़ोतरी हो चुकी है। इस दौरान राज्य सरकारों ने भी सेल्स टैक्स और वैट इजाफा किया है।

5 - जनहितकारी परियोजनाएं

आर्थिक मामलों के जानकारों की मानें तो पेट्रोल और डीजल पर केंद्र की मोदी सरकार इसलिए भी बेबस है कि उसे अपनी कई महत्वाकांक्षी जनहितकारी परियोजनाओं को अमलीजामा पहनाना है। इसके लिए बड़ी रकम जरूरत होगी और यह राशि इसी के जरिए बनाई जा रही है। 2019 में लोकसभा चुनाव को देखते हुए भी इस परियोजनाओं को मूर्त रूप देना भी जरूरी है।

विश्व बाजार में आधे हैं कच्चे तेल के दाम

बता दें कि भाजपा ने 26 मई 2014 को केंद्र में जब सरकार बनाई थी तो उस समय कच्चे तेल के दाम 6330.65 रुपये प्रति बैरल थे। लेकिन, 14 सितंबर 2017 को इसके दाम करीब आधे 3368.39 रुपये प्रति बैरल पर हैं। इस तरह पेट्रोल और डीजल के दाम काफी कम हो जाने चाहिए थे। लेकिन इस दौरान करों के बेतहशा इजाफे से केंद्र और राज्यों ने अपनी ही झोली भरी है।
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