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लाभ के लिए दंगे करवा सकती है भाजपा: मायावती

माय ने यह भी कहा कि भाजपा अपनी कमियों से ध्यान हटाने के लिए कश्मीर के मुद्दे पर युद्ध में जा सकती है।

लाभ के लिए दंगे करवा सकती है भाजपा: मायावती
आजमगढ़. यूपी में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी बसपा मुखिया मायावती ने आशंका जताई है कि भाजपा और केन्द्र सरकार अपनी नाकामियों से ध्यान हटाने के लिए कश्मीर एवं आतंकवाद के मुद्दे पर युद्ध में जा सकती है।
सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के संसदीय क्षेत्र आजमगढ़ में पार्टी की ओर से आयोजित सर्वजन हिताय रैली को संबोधित करते हुए मायावती ने सपा-भाजपा पर एक साथ निशाना साधा और दोनों में साठगांठ का आरोप लगाते हुए कहा कि चुनावी लाभ के लिए वे प्रदेश में दंगे भी करवा सकते हैं।
केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा नीत राजग सरकार को पूंजीपति परस्त और गरीब एवं दलित विरोधी करार देते हुए बसपा मुखिया ने कहा, भाजपा और केंद्र सरकार अपनी कमियों से ध्यान हटाने के लिए कश्मीर और आतंकवाद के मुद्दे पर युद्ध (पाकिस्तान के साथ) में जा सकती है।
चार बार प्रदेश की मुख्यमंत्री रह चुकी मायावती ने कहा, दोनों (केंद्र और प्रदेश) सरकारों ने लोगों को धोखा दिया हैं। दोनों दल आपस में मिले हुए हैं और विधानसभा चुनाव से पहले हिन्दू मुस्लिम दंगे करवा सकते हैं। लेकिन अब लोगों को यह बात समझ में आने लगी है। उन्होंने भाजपा को दलित विरोधी बताया और सपा पर गुण्डों माफिया को बढ़ावा देने का आरोप लगाया और कहा कि बसपा सत्ता में वापस आने के बाद पुन: काननू का राज कायम करेगी। आपराधिक तत्वों के खिलाफ सख्त कार्यवाही होगी और सरकारी जमीनों से अवैध कब्जे हटवाये जाएंगे।
मोदी के अच्छे दिन बुरे दिन में बदले
मायावती ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी के अच्छे दिन के वादे दो साल में बुरे दिन में बदल गये हैं। केंद्र सरकार अमीरों के पक्ष में काम कर रही है और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ तथा इससे जुड़े सांप्रदायिक संगठनों को मजबूत कर रही है। उन्होंने ललितगेट काण्ड, विजय माल्या प्रकरण और मध्य प्रदेश के व्यापमं घोटाले का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा में भ्रष्टाचार की जड़ें कांग्रेस से गहरी हैं।
मोदी सरकार पर दलितों और पिछड़े वर्गों को मिलने वाला आरक्षण खत्म करने का षड्यंत्र रचने का आरोप लगाते हुए मायावती ने कहा कि बार-बार आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा की बात इसी मकसद से उठायी जाती है और सरकारी विभागों का काम निजी संस्थाओं से कराया जाता है, जिनमें आरक्षण की व्यवस्था नहीं है।
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