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HBD मनमोहन सिंहः कभी केरोसिन लैंप की रोशनी में करते थे पढ़ाई

मनमोहन सिंह भारत के पहले सिख प्रधानमंत्री थे

HBD मनमोहन सिंहः कभी केरोसिन लैंप की रोशनी में करते थे पढ़ाई
नई दिल्ली. आज मनमोहन सिंह का जन्मदिन है और भारत की अर्थनीति में उनकी भूमिका अहम है। मीडिया, राजनीति हर कहीं उन्हें विवादों का सामना करना पड़ा, लेकिन अगर हम उनकी विशेषज्ञताओं को याद करें तो इतिहास उन्हें भूल नहीं सकता है।
भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह का 84 साल पहले 26 सितंबर 1932 में जन्म हुआ था। सिंह एक अर्थशास्त्री और कांग्रेस के नेता रहे हैं। वह भारत के पहले सिख प्रधानमंत्री थे। सिंह ने भारत के विकास में एक प्रमुख भूमिका निभाई है। वह कार्यालय में आयोजित योजना आयोग में कई पदों, इंडिया (आरबीआइ) रिज़र्व बैंक, आर्थिक सलाहकार आदि रह चुके हैं। पूर्व प्रधानमंत्री और अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह को देश एक अर्थशास्त्री के रूप में ही ज्यादा याद करता है। उन्होंने पीएम के कार्यकाल के दौरान सबसे बड़ी सफलता परमाणु समझौते के दौरान हासिल की।
सरकार ने हाल ही में मनमोहन सिंह के द्वारा पुछे गए प्रश्न जिसमें उन्होंने पूछा कि पंजाब विश्वविद्यालय में शिक्षक की नौकरी लेने के रूप में कानून के तहत एक सांसद के रूप में अयोग्य ठहराए जाने को आमंत्रित करेंगे जो कि मौद्रिक लाभ के साथ पदों से सांसदों पर प्रतिबंध लगाता है। पूर्व प्रधानमंत्री ने 1954 में पंजाब विश्वविद्यालय से परास्नातक की डिग्री हासिल कर लिया था और 1957 में एक वरिष्ठ व्याख्याता के रूप में संस्था में शामिल हो गए और 1963 में एक प्रोफेसर बन गए था।
सिंह को 1991 में आर्थिक सुधार के लिए जाना जाता है और भारत के बाद leberalisation के लिए श्रेय दिया जाता है। #HappyBdayDrManmohanSingh सोमवार को माइक्रो ब्लॉगिंग साइट पर ट्रेंडिंग था। सिंह और उनकी पत्नी गुरशरण कौर की तीन बेटियां हैं। हमे कई बात भारत के पूर्व प्रधानमंत्री के बारे में पता नहीं हैं।
मनमोहन सिंह की कुछ खास बातें:
हमेशा राजनीति के सभी मुद्दों पर चुप रहने वाले सिंह एक प्रोफेसर भी रह चुके हैं। अर्थशास्त्र में विशेषज्ञता हासिल करने के बाद उन्होंने कई सारी किताबें भी लिखीं। साल 1969 में वे भारत लौटे, इससे पहले वे यूएन में ट्रेड एंड डेपलेपमेंट के लिए काम कर रहे थे। यहां आने के बाद उन्होंने तीन साल तक दिल्ली स्कूल ऑफ इकॉनोमिक्स में प्रोफेसर के तौर पर अपना ज्ञान बांटा।

हारना नहीं सीखा कभी, गरीबी को हराया
जो सफल होते हैं, वे लोग कड़ी मेहनत करते हैं। उन्हें अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए कई सारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। मनमोहन सिंह ने भी ऐसे ही कई सारी परेशानियां देखी हैं। ऐसे ही वे इतने सफल नहीं बने हैं। 12 साल तक एक गांव में रहने के बाद उन्होंने शहर की ओर रुख किया। बच्चों के लिए स्कूल जाना और शिक्षा लेना कितना जरूरी है, लेकिन सिंह ने स्कूल से शिक्षा की शुरुआत नहीं की और अगर स्कूल जाते भी थे तो उन्हें मिलों पैदल चलना होता था।
सफल परमाणु समझौता
18 जुलाई 2006 में भारत और अमेरिका के बीच परमाणु समझौता हुआ। भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और अमेरिका के राष्ट्रपति जार्ज बुश ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। ये मनमोहन सिंह की बड़ी सफलता मानी जाती है।
केरोसिन लैंप में की पढ़ाई
क्या आप सोच सकते हैं कि देश का प्रधानमंत्री कभी डिम लाइट में बगैर बिजली के भी पढ़ सकता है। जी हां, केरोसिन लैंप की रोशनी में मनमोहन सिंह ने अपनी पढ़ाई की। वे ऐसे परिवार से थे, जहां शिक्षा बहुत महंगी थी।
विदेश गए पढ़ने
केंब्रीज विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र की डिग्री हासिल करने के बाद उन्हें स्कॉलरशिप भी मिली थी। वे अपने शिक्षकों के प्रिय थे और छात्रों में लोकप्रिय। उन्हें वहां कई सारे सम्मान मिले और साल 1955-1957 के बीच उन्हें स्कॉलरशिप दी गई। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से पीएचडी की पढ़ाई पूरी करने वाले मनमोहन सिंह ने अर्थशास्त्र में थिसिस जमा की।
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गर्वनर बनें
पीएम बनने के बाद भी वे अर्थशास्त्री के रूप में ही जाने जाते थे। जब आरबीआइ ने रुपयों के लिए मॉनिटरी पॉलिसी बनाई थी, मनमोहन सिंह उस टीम का हिस्सा थे। वे साल 1976-1980 तक आरबीआई के डायरेक्टर रहे और बाद में गर्वनर भी बनें।
कभी लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा
सिंह ने लोकसभा चुनाव में कभी जीत नहीं हासिल की। साल 2004 तक एक परंपरा थी कि प्रधानमंत्री जनता का प्रतिनिधि होता है इसलिए उसे लोकसभा से सदन में आना चाहिए। लेकिन दो बार के कार्यकाल में मनमोहन सिंह कभी लोकसभा चुनाव लड़े ही नहीं। एक बार लड़े तो दिल्ली से हार गए। इसके बावजूद उन्होंने देश का नेतृत्व किया।
‘मौन’मोहन का खिताब मिला
मनमोहन सिंह को मौन प्रधानमंत्री के नाम से बुलाया जाता था। जब पीएम बनकर उन्होंने पत्रकारों से बातचीत की, या कभी भी मीडिया को संबोधित किया तो वे बहुत ही कम बोले। अपने दस साल के कार्यकाल में उन्होंने बहुत कम बातों का जवाब दिया। इसलिए विपक्षी उन्हें मौन मनमोहन कहकर पुकारने लगे। कई बड़े विवाद और कांग्रेस के घोटालों पर भी वे चुप थे।
महंगाई के आगे हार गए
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ इतिहास के पन्नों पर एक और छवि जुड़ी रहेगी। जब मनमोहन पीएम थे उस वक्त महंगाई का सबसे बुरा दौर था। उनके सामने कई चुनौतियां थीं, लेकिन वक्त के आगे वे हार गए और देश की अर्थव्यवस्था बिल्कुल डूब गई।
अर्थशास्त्री के रहते डूबी अर्थव्यवस्था
मनमोहन सिंह इतिहास के पन्नों पर इसलिए भी दर्ज रहेंगे क्योंकि वे अर्थशास्त्री थे और उनके रहते अर्थव्यवस्था डूबती गई। उन्होंने अमेरिका को आर्थिक मंदी से निकलने के लिए कई रास्ते बताएं, लेकिन अपने देश को नहीं बचा पाए। एक वक्त था जब भारत मुश्किल में फंसे अमेरिका की मदद कर रहा था उस वक्त पूरे देश का सीना चौड़ा हो गया था लेकिन जब भारत की ऐसी हालत हुई जिसके बारे में क्या कहें। लेकिन आज भी देश की जनता इसलिए उन्हें याद करती है क्योंकि उन्होंने गरीबी की गरीबी दूर की।
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