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अरबों में है हवाला का कारोबार, इनकम टैक्स की बचत, खर्च एक लाख पर 500 कमीशन

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Feb 24 2019 12:31AM IST
अरबों में है हवाला का कारोबार, इनकम टैक्स की बचत, खर्च एक लाख पर 500 कमीशन

राजधानी में हवाला कारोबार का नेटवर्क बड़े पैमाने पर फैला है। सराफा और स्टील कारोबार में हवाला के जरिए ना सिर्फ करोड़, बल्कि अरबों रुपए की हेराफेरी की जाती है। नोट के सीरियल नंबर के आधार पर यह पूरा खेल होता है। इसमें सिर्फ इंकम टैक्स ही नहीं, बल्कि जेवरात और स्टील की खरीदी करने पर कारोबारी का 3 फीसदी जीएसटी भी बचता है और कच्चे में जेवरात व स्टील खरीदी का भुगतान करने में प्रति लाख पर आधा फीसदी यानी 500 रुपए ही कमीशन देना पड़ता है।

कम लागत में ज्यादा मुनाफा के चक्कर में कारोबारी हवाला कारोबार से जुड़ते हैं। दरअसल, सदरबाजार में हवाला का एक करोड़ 71 लाख रुपए पकड़े जाने के बाद सराफा और स्टील कारोबार में रोज करोड़ों रुपए की हेराफेरी करने की चर्चा तेज हो गई है। शहर में पुरानीबस्ती, सदरबाजार समेत कई इलाकों में हवाला के एजेंट सक्रिय हैं, जो सैलेरी पर डिलीवरी ब्वॉय रखकर पैसे की हेराफेरी करते हैं। अब इंकम टैक्स डिपार्टमेंट ने हवाला कारोबार पर नजर गड़ा दी है।

ऐसे चलता है नेटवर्क

हवाला एजेंटों का देशभर में नेटवर्क है। जैसे अगर किसी कारोबारी को मुंबई में पैसे का भुगतान करना है और दूसरे कारोबारी को मुंबई से रायपुर के लिए सामान लाना है, तो एजेंट उन दोनों से संपर्क कर 10 या 20 रुपए के एक नोट का सीरियल नंबर कारोबारियों और डिलीवरी ब्वॉय को देता है। मुंबई से भुगतान लेकर तत्काल डिलीवरी दे देगा और रायपुर वाला एजेंट उस कारोबारी से संपर्क कर पैसे उठा लेगा। यानी इस पूरे खेल में पैसा एक शहर और उसके आसपास घूमता रहता है।

यह है हवाला कारोबार

जानकारी के मुताबिक लेन-देन का भुगतान करने पैसों को अवैध तरीके से एक जगह से दूसरी जगह तक पहुंचाया जाता है। यह पूरा सिस्टम दो कारोबारी और एजेंट के बीच होता है। यानी पैसे को एजेंटों के माध्यम से ट्रांसफर किया जाता है। पैसे के लेन देन का एक गैरकानूनी तरीके को हुंडी भी कहा जाता है। इसमें भुगतान लेने वाला, भुगतान देने वाला और भुगतान के लेन-देन के बीच का माध्यम एजेंट अहम कड़ी हैं। तीनों मिलकर इस अवैध कारोबार का खेल करते हैं।

एजेंट को मिलता है इतना मुनाफा

जानकारी के मुताबिक हवाला कारोबार खासकर मुंबई, राजकोट, कोलकाता, चेन्नई, शीलम, रायपुर, दिल्ली और आगरा समेत देशभर के 50 बड़े शहरों में फैला है। यहां हवाला के माध्यम से सामान की कीमत का भुगतान किया जाता है। इसके लिए प्रति एक लाख रुपए पहुंचाने के लिए एजेंट को 500 से 800 रुपए मिलता है।

इनमें रायपुर से मुंबई के लिए 500 रुपए, रायपुर से कोलकाता 600 रुपए, राजकोट का 700 रुपए और चेन्नई का 800 रुपए प्रति लाख की दर से एजेंट को कमीशन मिलता है। यह राशि पैसे के साथ ही डिलीवरी ब्वॉय को कारोबारी द्वारा मुहैया कराई जाती है। ऐसे में अगर एक करोड़ रुपए की हेराफेरी की जाए, तो लाखों रुपए सिर्फ कमीशन मिलता है।

इसलिए करते हैं कच्चे में खरीदारी

जानकारी के मुताबिक रायपुर में खासकर ज्वेलरी और स्टील कारोबार में हवाला के जरिए भुगतान का नेटवर्क संचालित है। कारोबारी मुंबई, कोलकाता और राजकोट से अधिकतर ज्वेलरी की खरीदारी करता है, क्योंकि यहां गहनों की डिजाइनिंग की क्वाॅलिटी अच्छी होती है। वहीं कोलकाता में अन्य शहरों की तुलना में सोना सस्ता मिलता है। कारोबारी कुछ पक्के तो कुछ कच्चे में जेवरात खरीदता है।

कच्चा यानी बगैर रसीद जेवरात की खरीदी होती है। इससे कारोबारी को जेवरात में 3 फीसदी जीएसटी का भुगतान नहीं करना पड़ता। साथ ही, इससे कमाए गए मुनाफे का रिकॉर्ड की आमदनी में शो नहीं होता, जिससे कारोबारी काे इंकम टैक्स भी नहीं देना होता। यानी एक लाख रुपए का कच्चे में जेवरात खरीदने पर करीब 6 हजार रुपए टैक्स की बचत होती है। उसे बेचने पर अतिरिक्त टैक्स भी नहीं देना होता। यही वजह है, कारोबारी कच्चे में खरीदे गए जेवरात का भुगतान हवाला के माध्यम से करते हैं।

गुजरात भेजी डिटेल

सदरबाजार के सागर देसाई और मुकेश कुमार रावल ने इंकम टैक्स के अफसरों काे अहमदाबाद के चेतन भाई की डिटेल बता दी है। इसके आधार पर इंकम टैक्स ने गुजरात के आईटी डिपार्टमेंट को डिटेल भेज दी है। अब वहां की टीम पूछताछ करेगी और वहां से इनपुट के आधार पर यहां की कार्रवाई की जाएगी।


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