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बिहार: छात्राओं ने शौचालय बनवाने के लिए उतारे गहने

छात्राएं अपने घर में शौचालय बनवाने के लिए इस तरह का आंदोलन कर रही हैं।

बिहार: छात्राओं ने शौचालय बनवाने के लिए उतारे गहने
पटना. बिहार में एक सरकारी महिला उच्च विद्यालय की एक ही कक्षा की 10 के छात्राओं ने अपने सोने के आभूषण इसलिए उतार दिए ताकि उनके माता-पिता अपने घरों में शौचालयों का निर्माण करवाएं और उन्हें खुले में शौच करने के लिए बाहर जाने की शर्मिंदगी से छुटकारा मिले। छात्राओं ने आंदोलन करने का यह नया तरीका चुना है।
इन छात्राओं ने अपने माता-पिता पर दबाव डालने के लिए अपने सोने के गहने न पहनने की कसम खाई है। छात्राओं का कहना है कि जब वह गरीब भी नहीं है और उनके पास इतना धन है तो क्यों वह खुले में शौच के लिए मजबूर हो? ऋचा, ज्योति, रंजू रबिना, खुशबू और पूजा कुमारी नाम की ये छात्राएं अपने परिवार को घर में शौचालय बनवाने के लिए इस तरह का एक आंदोलन कर रही हैं। छत्राओं ने अपने गहने त्याग कर कहा है वह इन्हें तभी पहनेंगी जब उन्हें खुले में शौच कारने की शर्मिंदगी से छुटकारा मिलेगा।
एक जिला अधिकारी ने बताया कि पटना से लगभग 125 किमी दूर बिहार के बक्सर जिले में लोग अभी भी खुले में शौच करने को मजबूर हैं। यहां उनके घरों में शौचालय की कमी है। वहीं एक सरकारी महिला उच्च विद्यालय में कक्षा 10 की 18 में से 6 छात्राओं ने अपने गहने त्याग दिए हैं। जिला प्रशासन के एक अधिकारी अनुपम सिंह ने स्कूल के निरीक्षण के दौरान जानकारी जुताई कि यदि इन छात्राओं की मांगे पूरी नहीं की गई तो क्लास की 18 और कतारें भी इसमें अपने हाथ खड़े कर लेंगी।
लड़कियों ने कहा है कि, 'वह बाहर शौच के लिए नहीं है जाना चाहती हैं उनके घरों में शौचालय का निर्माण किया जाना चाहिए। लड़कियों ने इस बात को शर्म और पीड़ा की बात बताया। जब अधिकारी स्कूल का निरीक्षण करने पहुंचे तो लड़कियों ने अपने सोने के गहने उतार कर उन्हें दे दिए और शपथ ली कि वह उन्हें तब तक नहीं पहनेंगी जब तक उनके लिए शौचालय नहीं बनवाए जाते।
अनुपम सिंह ने कहा कि, उन्हें यह देखकर बड़ी ख़ुशी हुई कि छात्राओं की जीवन की बुनियादी सुविधाओं को लेकर इतनी सजगता और जानकारी है। इसके साथ ही लड़कियों ने यह भी बताया कि वह किसी भी तरह से न गरीब है और न ही उनके परिवार तंगहाली में हैं। बस शौचालय का निर्माण उनकी समझ से बाहर की बात है।
छात्राओं का कहना है कि उन्हें खुले में शौच के लिए जाने में शर्म आती है इसलिए वह सभी इस शर्मिंदगी से छुटकारा पाना चाहती है।
गौरतलब है कि बिहार में लाखों लोग अभी भी खुले में शौच करने को मजबूर हैं। बहुत से घरों में लोग आज भी शौचालय के बिना रह रहे हैं। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हाल ही में पानी साथ योजनाओं में 'शौचालय निर्माण' 'घर का सम्मान' योजना शुरू की है। जिससे कस्बों और राज्य के गांवों में सरकार द्वारा हर एक के लिए 2019 के अंत तक शौचालय का निर्माण करावा दिया जाएगा।
राज्य सरकार ने शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालयों के निर्माण के लिए 12,000 रुपये प्रति परिवार प्रदान करने का प्रावधान किया है। जबकि जिन लोगों के लिए शौचालय बनवाने की जगह नही है उनके लिए एक समुदाय शौचालय बनाया जा जाएगा। विकास आयुक्त शिशिर सिन्हा के मुताबिक, राज्य में करीब 1.60 करोड़ परिवारों में उनके घरों में शौचालय नहीं है।
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