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मानसून की मार से छा सकता है अंधेरा, एनटीपीसी के पास सिर्फ सात दिन के कोयले का स्टॉक

ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल ने लोकसभा में यह जानकारी देते हुए बताया कि सरकार कोयले की कमी नहीं होने देने के उपाय कर रही है।

मानसून की मार से छा सकता है अंधेरा, एनटीपीसी के पास सिर्फ सात दिन के कोयले का स्टॉक
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नई दिल्‍ली. इस साल मानसून कमजोर रहने के कारण देश के कई हिस्सों में अंधेरा गहरा सकता है। देश के करीब 50 फीसदी थर्मल पावर स्टेशनों के पास सात दिन (15 जुलाई के आंकड़ों के मुताबिक) से भी कम का कोयला बचा है। इनमें एनटीपीसी के बिजलीघर भी शामिल हैं। एनटीपीसी देश में सबसे ज्‍यादा (20,000 मेगावाट से भी अधिक) बिजली का उत्‍पादन करता है और कोयले की सर्वाधिक खपत भी यहीं है। एनटीपीसी की हालत सबसे ज्‍यादा खराब है, क्‍योंकि इसके 23 में से आठ बिजलीघरों के पास केवल दो दिन का कोयला है।
केंद्रीय बिजली प्राधिकरण (CEA) के 15 जुलाई तक के आंकड़ों के हिसाब से देश में कोयला से बिजली पैदा पैदा करने वाले कुल सौ पावर स्टेशनों में से 46 के पास सात दिन से कम का कोयला भंडार है। ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को लोकसभा में यह जानकारी देते हुए बताया कि सरकार कोयले की कमी नहीं होने देने के उपाय कर रही है। एनटीपीसी ने चेताया है कि यदि जल्दी ही स्थिति को न संभाला गया तो उत्तर और मध्य भारत में बिजली संकट गहरा सकता है।
बिजली संकट
इन दिनों वैसे भी बिजली संकट जारी है। 15 जून से 15 जुलाई के बीच देश में 1,42,647 मेगावाट बिजली की मांग थी, लेकिन आपूर्ति 1,37,352 मेगावाट ही रही। यानी 5,295 मेगावाट बिजली की कमी पहले से है।
इन संयंत्रों पर बड़ा संकट
जिन बिजली संयंत्रों के पास केवल दो दिन का ही कोयला शेष है उनमें झज्जर (1,500 मेगावाट उत्पादन), रिहंद (3,000 मेगावाट), सिंगरौली (2,000 मेगावाट), कोरबा (2,600 मेगावाट), सिपत (2,980 मेगावाट), विंध्याचल (4,260 मेगावाट), सिम्हाद्रि (2,000 मेगावाट), रामागुंडम (2,600 मेगावाट) शामिल हैं।
नीचे की स्लाइड्स में पढ़िए, क्यों है कोयले का संकट-
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