Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

पंजाब में बिजली घोटाले से राजस्व को करोड़ों का नुकसान: कैप्टन अमरेंद्र

कैप्टन अमरेन्द्र सिंह ने ऐलान किया कि सरकार बनने पर कांग्रेस घाटों को पूरा करने के लिए इन प्रोजेक्ट्स की जांच करेगी।

पंजाब में बिजली घोटाले से राजस्व को करोड़ों का नुकसान: कैप्टन अमरेंद्र
X
जालंधर. पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष कै. अमरेन्द्र सिंह ने कहा कि पंजाब में देश का सबसे बड़ा बिजली घोटाला सामने आ रहा है, जहां उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल ने प्लेट में परोस कर बिजली प्रोजैक्टों को निजी कम्पनियों के हवाले कर दिया, जिससे राज्य के राजस्व को हजारों करोड़ों रुपए का नुक्सान हो रहा है, जो पावर कार्पोरेशन द्वारा ग्राहकों पर डाला जा रहा है।
कै. अमरेन्द्र सिंह ने ऐलान किया कि सरकार बनने पर कांग्रेस घाटों को पूरा करने के लिए इन प्रोजैक्टों को रिव्यू करेगी ताकि राज्य के हितों की रक्षा यकीनी बनाई जा सके। अकाली-भाजपा सरकार ने इन प्रोजैक्टों को निजी कम्पनियों के सामने सरैंडर कर दिया है।
उन्होंने सवाल किया कि निजी कम्पनियों के साथ बिजली खरीदने संबंधी वचनबद्धता प्रकट करने का कारण क्या था, जिस कारण पहले से ही वित्तीय घाटे का सामना कर रहे राज्य को कम्पनियों की बिजली खर्च किए बिना उन्हें अदायगी करनी पड़ रही है, लेकिन इसका बोझ लोगों पर डाला जा रहा है।
उन्होंने खुलासा किया कि सुखबीर ने सैंट्रल इलैक्ट्रीसिटी रैगुलेटरी कमिशन की सिफारिशों के विपरीत जाकर यह प्रोजैक्ट एम.ओ.यू. के जरिए अलाट कर दिए जोकि प्राइवेट कम्पनियों के हित में है। सैंट्रल इलैक्ट्रीसिटी रैगुलेटरी कमिशन ने प्रावधान किया था कि प्राइवेट कम्पनियों को बिजली प्रोजैक्ट बोली के मुकाबले दिए जाएंगे।
पूर्व मुख्यमंत्री ने प्राइवेट बिजली कम्पयिनों द्वारा पैदा की जा रही बिजली के खरीदार ढूंढने में पंजाब पावर कार्पोरेशन की नाकाबिलियत का जिक्र करते हुए कहा कि प्राइवेट बिजली कम्पनियों द्वारा थोपे नियमों व शर्तों के अनुसार पावर कार्पोरेशन को बिजली के उत्पादन की लागत 3.60 प्रति यूनिट पड़ती है, जबकि नैशनल ग्रिड में बिजली सिर्फ 3 रुपए प्रति यूनिट में मिल जाती है।
उन्होंने कहा कि सुखबीर द्वारा स्वीकार्य गलत नियमों व शर्तों के कारण इतने बुरे हालात बन चुके हैं कि पंजाब में उद्योगों को बिजली 5.51 रुपए व 6.22 रुपए प्रति यूनिट की दर से दी जा रही है जबकि पावर कार्पोरेशन 3.60 रुपए प्रति यूनिट के हिसाब से बाहरी खरीदारों को बिजली बेचने की कोशिश कर रहा है, लेकिन उसे कोई खरीदार नहीं मिल रहा। पावर कार्पोरेशन उद्योगों को सस्ती बिजली देने के लिए तैयार नहीं परन्तु बाहरी खरीदारों को आधे रेट पर बेचने के लिए तैयार है। इसी कारण उद्योगों को अन्य राज्यों की तरफ पलायन करना पड़ रहा है।
खबरों की अपडेट पाने के लिए लाइक करें हमारे इस फेसबुक पेज को फेसबुक हरिभूमि
, हमें फॉलो करें ट्विटर और पिंटरेस्‍ट पर-

और पढ़े: Haryana News | Chhattisgarh News | MP News | Aaj Ka Rashifal | Jokes | Haryana Video News | Haryana News App

Next Story