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आतंकवाद को शह देना पाक को पड़ा भारी, ग्रे सूची में शामिल

पाकिस्तान के खिलाफ भारत को एक और कुटनीतिक जीत हासिल हुई है। आतंकवाद को शह देना पड़ोसी देश पाकिस्तान को बहुत भारी पड़ गया है।

आतंकवाद को शह देना पाक को पड़ा भारी, ग्रे सूची में शामिल
पाकिस्तान के खिलाफ भारत को एक और कुटनीतिक जीत हासिल हुई है। आतंकवाद को शह देना पड़ोसी देश पाकिस्तान को बहुत भारी पड़ गया है। सूत्रों के अनुसार, पैरिस में फाइनैंशल ऐक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की मीटिंग में पाकिस्तान को 'ग्रे लिस्ट' में शामिल करने का फैसला हुआ है।
ग्रे लिस्ट में शामिल देशों पर टेरर फंडिग के लिए कड़ी निगरानी रखी जाती है। सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान के खिलाफ अमेरिका द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव का भारत, ब्रिटेन और फ्रांस जैसे देशों ने समर्थन किया।
खास बात यह है कि पाकिस्तान के सदाबहार दोस्त चीन ने भी ऐन वक्त पर उसका साथ छोड़ते हुए प्रस्ताव पर अपनी आपत्तियां वापस ले लीं। फैसले की आधिकारिक घोषणा होना अभी बाकी है।
एफएटीएफ ने पाकिस्तान को अपना दाग धोने के लिए तीन महीने का समय दिया था। इसके बावजूद वह अपना करतूत जारी रखा और आतंकियों को फंडिंग करता रहा। आतंकियों के खिलाफ पाकिस्तान ने निर्णायक कार्रवाई नहीं की।

अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा असर

एफएटीएफ का यह कदम पाकिस्तान के लिए बहुत बड़ा झटका है, क्योंकि इसका सीधा असर उसकी अर्थव्यवस्था पर होगा जिसकी हालत पहले से काफी खस्ता है। पाकिस्तान के साथ व्यापार करने की इच्छुक अंतरराष्ट्रीय कंपनिया, बैंक और ऋण देने वाली अन्य संस्थाएं वहां निवेश करने से पहले कई बार सोचेंगी।
पाकिस्तान के लिए भी विदेश निवेश लाना काफी मुश्किल हो जाएगा।

तीन महीने के लिए डाला गया ग्रेट लिस्ट में

बता दें कि पाकिस्तान ने मंगलवार को दावा किया था कि एफएटीएफ की मीटिंग में उसे तीन महीनों की मोहलत दिए जाने का फैसला हुआ है, लेकिन गुरुवार को पाकिस्तान के इस दावे पर उस वक्त सवाल खड़े हो गए थे जब अमेरिकी मीडिया के हवाले से यह खबर सामने आई कि आखिरी फैसला होना अभी बाकी है।
सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका के दवाब में इस प्रस्ताव पर फिर से वोटिंग कराई गई जिसमें ज्यादातर देशों ने पक्ष में वोट डाला। पाकिस्तान को फिलहाल तीन महीने के लिए 'ग्रे लिस्ट' डाला गया है। जून में एक बार फिर इसकी समीक्षा की जाएगी।

पाक ने नहीं उठाया उचित कदम

अमेरिका का साफ कहना है कि पाकिस्तान ने आतंकवाद को फंडिंग रोकने और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों को लागू करने के लिए उचित कदम नहीं उठाया है।
पिछले महीने ही अमेरिका ने पाकिस्तान को मिलने वाली करोड़ों डॉलर की सैन्य सहायता रोक दी थी। भारत भी सभी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान को आतंकवाद के मुद्दे पर बेनकाब करता रहा है। हालांकि पाकिस्तान इन आरोपों से इनकार करता है।

क्या है एफएटीएफ

एफएटीएफ एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है जो विभिन्न देशों के बीच मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग जैसे मामलों को देखता है। पाकिस्तान को इसके पहले साल 2012 से 2015 तक इस लिस्ट में डाला गया था।
पाकिस्तान को अहसास था कि इस बार भी उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो सकती है, इसलिए उसने पिछले दिनों जमात उद दावा के चीफ हाफिज सईद के खिलाफ कार्रवाई का नाटक किया था।

ट्रंप के बयान के कुछ समय बाद आया यह फैसला

पाकिस्तान पर यह फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के ठीक बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि वह पाकिस्तान द्वारा आतंकियों पर लगाम कसने के लिए उठाए जा रहे कदमों से संतुष्ट नहीं है।
व्हाइट हाउस का यह भी कहना है कि पहली बार अमेरिका पाकिस्तान को उसके कामों के लिए जवाबदेह बना रहा है।

ट्रंप ने 1625 करोड़ की रोकी थी सैन्य सहायता

गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इस साल के शुरू में पाकिस्तान को दी जाने वाली 1625 करोड़ रुपये की सैन्य सहायता पर रोक लगाने की घोषणा की थी। अमेरिका लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक आतंकी सरगना हाफिज सईद पर पाकिस्तान के कार्रवाई नहीं करने से खफा है।
भारत और अमेरिका सईद को मुंबई हमले का मास्टरमाइंड मानते हैं। लिहाजा सईद को वैश्विक आतंकी घोषित किया गया है और उस पर एक करोड़ रुपये का इनाम भी रखा गया है।
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