Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

भूटान चुनाव 2018: डीपीटी को बढ़त, नेपाल के बाद अब भारत की भूटान से भी बढ़ सकती है दूरियां

नेपाल की चीन से गहरी होती दोस्ती के बाद अब भूटान से कुछ नए संकेत मिल रहे है। भूटान चुनाव में पीपल्स डेमोक्रैटिक पार्टी का पिछड़ना भारत के लिए नई परेशानियां पैदा कर सकता है।

भूटान चुनाव 2018: डीपीटी को बढ़त, नेपाल के बाद अब भारत की भूटान से भी बढ़ सकती है दूरियां

चीन के बढ़ते प्रभाव की वजह से भारत के कई पडोसी देशों का रुख चीन की तरफ होता जा रहा है। इस कड़ी में सबसे पहला नाम नेपाल का है। लेकिन अब कुछ और नाम भी जुड़ सकते है।

लेकिन नेपाल की चीन से गहरी होती दोस्ती के बाद अब भूटान से कुछ नए संकेत मिल रहे है। भूटान चुनाव में पीपल्स डेमोक्रैटिक पार्टी का पिछड़ना भारत के लिए नई परेशानियां पैदा कर सकता है।

इसे भी पढ़ें-नेतन्याहू ने रॉन मल्का को मनोनीत किया भारत में इस्राइल का अगला राजदूत

भूटान के मौजूदा प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे का रुख भारत के प्रति बेहद उदार और सहयोगी रहा था। अब तक भूटान की विदेश नीति भी भारत के इर्द-गिर्द ही सिमटी हुई थी।

भूटान चुनाव में पीएम शेरिंग तोबगे की पार्टी के पिछड़ने से अब भारतीय उपमहाद्वीप में नए राजनीतिक समीकरण बनेंगे। यहां अब मुख्य विपक्षी दल फेंसुम शोगपा की डीपीटी निर्णायक भूमिका निभा सकती है। हालांकि अंतिम नतीजे 18 अक्टूबर तक आएंगे।

इसे भी पढ़ें- चीन: ईसाई समुदाय के पास नहीं है प्रार्थना करने की जगह, सरकार ने जारी किया ऐसा फरमान

जानकारो का मानना है कि भूटान में अगर डीपीटी सत्ता काबिज होती है तो भारत और भूटान के राजनीतक समीकरण बदल सकते है। डीपीटी ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में कहा है कि देश का 80% से अधिक उत्पाद भारत में निर्यात करने के कारण देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान हो रहा है।

भूटान में डीपीटी 2008 से 2013 तक सत्ता में रही थी। उस वक्त भारत और भूटान के रिश्तें उदासीन थे। डीपीटी को चीन के प्रति झुकाव रखने वाली पार्टी माना जाता है।

और पढ़े: Haryana News | Chhattisgarh News | MP News | Aaj Ka Rashifal | Jokes | Haryana Video News | Haryana News App

Next Story
Top