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भीमा-कोरेगांव मामला: कोर्ट का आदेश- पांचों आरोपी 5 सितंबर तक घर में नजरबंद, 6 को होगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने भीमा-कोरेगांव मामले में गिरफ्तार सभी पांच आरोपियों को 5 सितंबर तक घर में नजरबंद रखने का आदेश दिया है।

भीमा-कोरेगांव मामला: कोर्ट का आदेश- पांचों आरोपी 5 सितंबर तक घर में नजरबंद, 6 को होगी सुनवाई
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सुप्रीम कोर्ट ने भीमा-कोरेगांव मामले में गिरफ्तार सभी पांच आरोपियों को 5 सितंबर तक घर में नजरबंद रखने का आदेश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 6 सितम्बर 2018 को होगी। बता दें कि भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में जांच के मद्देनजर मंगलवार को पुणे पुलिस ने देशभर में कथित नक्सल समर्थकों के घरों व कार्यालयों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की।

छापे के बाद हैदराबाद में वामपंथी कार्यकर्ता और कवि वरवर राव, मुंबई में कार्यकर्ता वेरनोन गोन्जाल्विस और अरूण फरेरा, छत्तीसगढ़ में ट्रेड यूनियन कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज और दिल्ली में रहने वाले सिविल लिबर्टीज के कार्यकर्ता गौतम नवलखा को गिरफ्तार कर लिया गया। गौरतलब है कि पिछले साल पुणे में एक कार्यक्रम के बाद महाराष्ट्र के कोरेगांव भीमा गांव में हुई हिंसा की जांच के तहत छापे मारे गए हैं।

वर्ष 1818 में हुई कोरेगांव भीमा लड़ाई के 200 साल होने पर पिछले साल 31 दिसंबर को एल्गार परिषद घटनाक्रम के सिलसिले में जून में गिरफ्तार पांच लोगों में से एक के घर पर पुलिस की तलाशी के दौरान जब्त पत्र में वामपंथी कार्यकर्ता और कवि वरवर राव का नाम आया था। घटना के बाद विश्रामबाग थाने में दर्ज प्राथमिकी के मुताबिक, कार्यक्रम में कथित तौर पर ‘भड़काऊ' टिप्पणी करने के बाद जिले के कोरेगांव भीमा गांव में हिंसा हुई थी।

इसके बाद माओवादियों से जुड़ाव के आरोप में जून में पांच लोगों की गिरफ्तारी हुई थी। जून में एक साथ छापे के बाद दलित कार्यकर्ता सुधीर धावले को मुंबई में उनके घर से गिरफ्तार किया गया जबकि वकील सुरेंद्र गाडलिंग, कार्यकर्ता महेश राऊत और शोमा सेन को नागपुर से और रोना विल्सन को दिल्ली में मुनीरका में उनके फ्लैट से गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार किए गए पांचों लोगों और उनके साथ प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े लोगों के घरों पर छानबीन की गई।

पांच महीने बाद कार्रवाई

करीब पांच महीने बाद पुणे पुलिस की टीमों ने करीब आधा दर्जन राज्यों में कई लोगों के घरों और कार्यालयों पर छापेमारी की। इन लोगों पर यलगार परिषद के साथ संबंध रखने और नक्सल समर्थक होने का संदेह है।

इनकी गिरफ्तारी

पुणे पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा समाजिक और मानवाधिकार कार्यकर्ता गौतम नवलखा, वरवरा राव, सुधा भारद्वाज, अरुण फरेरिया और वरनोन गोंजालवेस की गिरफ्तारी की गई है। सभी आरोपियों को सेक्शंस 153ए, 505(1) बी,117, 120 बी,13,16,18,20,38,39,40 और यूएपीए (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम ऐक्ट) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

ये सामान जब्त

पुलिस ने छापे के दौरान कंप्यूटर, लैपटॉप, सीडी, दस्तावेज और किताबें जब्त की हैं। पुलिस का दावा किया है कि यह सभी नक्सलियों के लिए शहरी थिंक टैंक के रूप में कार्य कर रहे थे। इनमें से कुछ मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं।

सीपीएम-कांग्रेस ने निंदा की

सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि वे इन गिरफ्तारियों की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार उन दलित कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है, जिन्होंने मौजूदा सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया था। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री जयपाल रेड्डी ने भी मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी की कड़े शब्दों में भर्त्सना की है।

पुनिया बोले, परेशान किया जा रहा

कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य पीएल पुनिया ने कहा है कि अर्बन नक्सल बताकर लोगों को परेशान किया जा रहा है। ये दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है। उन्होंने कहा कि सनातन संस्था के सदस्य दाभोलकर की हत्या में शामिल हैं और कबूल कर चुके हैं, जिस पर पुलिस कुछ खास नहीं कर रही है। पुनिया ने सवाल खड़ा किया कि भीमा कोरेगांव में पीएम की हत्या की साजिश वाला मामला भी टांय-टांय फिस्स हो गया, उस मामले क्या हुआ?

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