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पाकिस्तान से था भगत सिंह का खास नाता, जानिए इसके पीछे का पूरा सच

शहीद भगत सिंह का नाम देश के महान शहीदों में सबसे प्रमुख में लिया जाता है। उनका जन्म 27 सितंबर, 1907 लायलपुर के बंगा में हुआ था। अब यह जगह पाकिस्तान में है।

पाकिस्तान से था भगत सिंह का खास नाता, जानिए इसके पीछे का पूरा सच
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शहीद भगत सिंह का नाम देश के महान शहीदों में सबसे प्रमुख में लिया जाता है। उनका जन्म 27 सितंबर, 1907 लायलपुर के बंगा में हुआ था। अब यह जगह पाकिस्तान में है। उनके पिता का नाम किशन सिंह और माता का नाम विद्यावती था।

भगत सिंह के पूरे परिवार के खून में देशभक्ति दौड़ती थी और इसी वजह से उनके अंदर भी देशभक्ति का जनून सवार था।

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भगत सिंह का पाकिस्तान से काफा गहरा नाता है। भगत सिंह जिस गांव में जन्में थे वो आज पाकिस्तान के फैसलाबाद में है। भगत सिंह ने जो पुलिस चौकी में धमाका किया था, उसके बाद उन्हें लाहौर की जेल में सजा काटने के लिए रखा गया था।

आखिर में उन्हें 23 मार्च 1931 को लाहौर की जेल में फांसी पर लटका दिया गया था। पाकिस्तान चाहा कर भी इन चीजों को नाकार नहीं सकता है। यह बड़ी हैरान करने वाली बात है कि पूरे पाकिस्तान में भगत सिंह काफी मशहूर है और हर 23 मार्च को बड़े जोश के साथ वहां याद किया जाता है।

इसके पिछे एक यह भी कारण हो सकता है कि भगत सिंह आजादी पाने से पहले ही शहीद हो गए थे और उस समय पाकिस्तान बनाने का प्रस्ताव भी नहीं आया था।

बाद में 1961 में लाहौर जल को तोड़ा दिया गया और उसकी जगह एक रिहायशी कॉलोनी बनाई गई। जिस जगह पर भगत सिंह को फांसी दी गई थी उस जगह एक चौराहा बना दिया गया था। जिसका नाम शादमान चौक रखा गया।

पाकिस्तान के कई समाजिक संगठन ने मांग उठाई थी कि शादमान चौक का नाम बदलकर भगत सिंह चौराहा किया जाए। इस दिन दोनों ही देशों के समाजिक कार्यकर्ता इस जगह जमा होकर शहीदों की याद में कार्यक्रम आयोजित करते है।

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बता दें कि भगत सिंह मेमोरियल फांउडेशन ने पाकिस्तान के पंजाब की सरकार में याचिका दायर करते हुए कहा है कि शादमान चौक का नाम भगत सिंह चौक किए जाना चाहिए। याचिका में आगे कहा गया था कि पंजाब सरकार को इसमें और देर नहीं करनी चाहिए।

इसने कहा, ‘जो देश अपने नायकों को भुल जाते हैं, वे धरती की सतह से गलत शब्दों की तरह मिट जाते हैं।’ हाफिज सईद का संगठन जमात उद दावा शादमान चौक का नाम बदलने के प्रस्ताव का विरोध कर रहा है और उसने इस मुद्दे पर सिविल सोसाइटी के लोगों को धमकी भी दी है।

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फाउंडेशन के अध्यक्ष इम्तियाज रशीद कुरैशी ने कहा है कि वह इस मामले को लगातार उठाते रहेंगे और अपनी मांग पूरी कराने के लिए सरकार पर दबाव बनाते रहेंगे।

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