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गत्ते के डिब्बों में नवजात बच्चों की तस्करी, 11 गिरफ्तार

अस्पताल उन अकेली महिलाओं को निशाना बनाता था जो गर्भपात करवाने आती थीं।

गत्ते के डिब्बों में नवजात बच्चों की तस्करी, 11 गिरफ्तार
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कोलकाता. पश्चिम बंगाल में नवजात बच्चों की तस्करी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। इसमें एक प्राइवेट नर्सिंग होम के आठ लोगों का नाम आया है जो यह काम किया करते थे। कोलकाता से 80 किलोमीटर की दूरी पर बदुरिया के एक नर्सिंग होम अविवाहित महिलाओं को बरगलाकर उनके नवजात शिशुओं को बेचने और बिस्कुट के कंटेनरों में बंद कर शिशुओं की तस्करी की जाती थी। बच्‍चे गोद लेने के एक केंद्र पर ले जाने के संदेह में 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। गिरोह के लोग 24 घंटे पहले जन्मे बच्चे को भी बेच देते थे।
अविवाहित लड़की इनका शिकार
प्राइवेट हॉस्पिटल चलाने वाला यह गिरोह ऐसी अविवाहित लड़की को अपना शिकार बनाते थे जो शादी से पहले प्रेग्नेंट हो जाती थी और गर्भपात करवाने के लिए उनके पास आती थी। स्टाफ और डॉक्टर द्वारा उसे गर्भपात ना करवाने के लिए मनाया जाता था और बच्चे के बदले उसे पैसे देने का वादा किया जाता था।
बच्चा खरीदने की पेशकश
वरिष्ठ पुलिस अधिकारी बीएल मीना ने बताया, 'ये अस्पताल उन अकेली महिलाओं को निशाना बनाता था जो गर्भपात करवाने आती थीं, उनके सामने जन्म के बाद उनका बच्चा खरीदने की पेशकश रखी जाती थी."
पुलिस के मुताबिक अस्पताल लड़के के लिए तीन लाख रुपए और लड़की के लिए एक लाख रुपए लेता था। जिन बच्चों का रंग गोरा होता था उनकी कीमत बढ़ा दी जाती थी।'
लड़के की कीमत 3 लाख और लड़की की 1 लाख
गिरोह के लोग लड़के के बदले तीन लाख रुपए और लड़की के लिए एक लाख रुपए देते थे। इसके बाद ये लोग नर्सिंग होम से बच्चों को बिस्कुट के कार्टून में छिपाकर वहां के सरकारी हॉस्पिटल में उन लोगों को बेच आते थे जिनके बच्चे किसी वजह से जन्म लेते ही मर जाते थे। इस गिरोह में कुल आठ लोगों के शामिल होने की बात कही जा रही है।
गोदाम में गत्ते के बक्से में दो शिशु
पूर्वी राज्य-पश्चिम बंगाल में अपराध जांच विभाग (सीआइडी) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सोमवार को एक निजी नर्सिंग होम में छापे मारी के दौरान बंद पड़े दवाई के एक गोदाम में गत्ते के बक्से में छिपाए हुए दो शिशु मिलने के बाद से पुलिस ने इस अपराध में शामिल लोगों को गिरफ्तार करना शुरू कर दिया है।
तीन साल से चल रहा गिरोह
पुलिस ने बताया कि सरकारी हॉस्पिटल के अलावा ये लोग बाहर भी बच्चों को बेचते थे। गिरोह तीन साल से चल रहा था। खबर के मुताबिक, पुलिस को लगता है कि 25 बच्चों को अबतक बेचा जा चुका है। हालांकि, अभी आकंड़े पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है। इसकी जांच चल रही है। पुलिस को इस मामले में एक एनजीओ पर भी शक है। पुलिस को कुछ भुक्तभोगी लोग भी मिले हैं। गिरफ़्तार किए गए लोगों में अस्पताल के मालिक और कर्मचारी शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि आने वाले दिनों में कुछ और गिरफ़्तारियां संभव हैं।
भारत में मानव तस्करी 25 प्रतिशत अधिक
सरकार के अपराध संबंधित आंकड़ों के अनुसार 2014 की तुलना में 2015 में भारत में मानव तस्करी की शिकायतें 25 प्रतिशत अधिक दर्ज की गई हैं। इनमें से 40 प्रतिशत से अधिक मामले बच्चों की खरीद फरोख्‍त और आधुनिक समय के गुलाम के रूप में उनके शोषण की हैं।
मानव तस्‍करी में असम और पश्चिम बंगाल आगे
राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) ने कहा है कि पिछले साल मानव तस्करी के 6,877 मामले सामने आए, जबकि 2014 में यह संख्‍या 5,466 थी। मानव तस्‍करी के सबसे अधिक मामले पूर्वोत्‍तर राज्‍य- असम और उसके बाद पश्चिम बंगाल में दर्ज किए गए हैं। विश्‍व में दक्षिण एशिया में सबसे तेजी से मानव तस्करी के मामले बढ़ रहे हैं और भारत इसका केंद्र है।
महिलाओं और लड़कियों को वेश्यालयों में बेचा जाता
गिरोह हर साल हजारों पीड़ितों को बंधुआ मजदूरी के लिए बेचते हैं या उन्‍हें शोषण करने वाले मालिकों के पास काम पर रख देते हैं। कई महिलाओं और लड़कियों को वेश्यालयों में बेचा जाता है। ऑस्ट्रेलिया की वॉक फ्री फाउंडेशन के 2016 के वैश्विक गुलामी सूचकांक के अनुसार विश्‍व के लगभग चार करोड़ 58 लाख गुलामों में से 40 प्रतिशत अकेले भारत में है।
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