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Basant Panchmi 2019: बसंत पंचमी पर इससे बेहतर निबंध आपको कहीं नहीं मिलेगा

वसंत उमंग है, उल्लास है, आनंद की आस है| ऐसी ऋतु है, जब मानो पूरे परिवेश में ही विशिष्ट भाव व्याप्त हो जाता है| तितलियों और भंवरों का आनंद में डूब जाना वसंत है| आम्र-मंजरी का बौराना वसंत है| अपनों के मन का खिल जाना वसंत है| प्रकृति की गोद में फूलों का खिलखिलाना वसंत है| धरा का श्रंगारित हो मुस्कुराना वसंत है| कोयल की कूक और कलियों का खिलना वसंत है| यानी सब कुछ उमंग और उत्साह से भरा| मनमोहक और मानवीय भावों से सजा| पर हमारे मन का मौसम अब एक सा ही रहता है| यांत्रिक जीवन जीते-जीते मानो हम भाव-शून्य होते जा रहे हैं| संवेदनाएं छीज रही हैं| ऐसे में कौन नहीं चाहेगा कि प्रेमपगे अहसासों वाली यह ऋतु, मन का भी मौसम बदले|

Basant Panchmi 2019: बसंत पंचमी पर इससे बेहतर निबंध आपको कहीं नहीं मिलेगा

वसंत उमंग है, उल्लास है, आनंद की आस है| ऐसी ऋतु है, जब मानो पूरे परिवेश में ही विशिष्ट भाव व्याप्त हो जाता है| तितलियों और भंवरों का आनंद में डूब जाना वसंत है| आम्र-मंजरी का बौराना वसंत है| अपनों के मन का खिल जाना वसंत है| प्रकृति की गोद में फूलों का खिलखिलाना वसंत है| धरा का श्रंगारित हो मुस्कुराना वसंत है| कोयल की कूक और कलियों का खिलना वसंत है| यानी सब कुछ उमंग और उत्साह से भरा| मनमोहक और मानवीय भावों से सजा| पर हमारे मन का मौसम अब एक सा ही रहता है| यांत्रिक जीवन जीते-जीते मानो हम भाव-शून्य होते जा रहे हैं| संवेदनाएं छीज रही हैं| ऐसे में कौन नहीं चाहेगा कि प्रेमपगे अहसासों वाली यह ऋतु, मन का भी मौसम बदले|

सीखें जीवन का संदेश

मन के हर अहसास को खुलकर जीने का संदेश लिए है आता है वसंत| खासकर प्रेम को महसूसने, जीने और उसे विस्तार देने का संदेसा अपने साथ लाती है यह ऋतु| यूं भी वसंत तो पर्याय ही है प्रेम और प्रकृति के उल्लास का| जिसमें प्रकृति का कण-कण खिल उठता है| इसीलिए वसंत, कितना अच्छा हो अगर मेरा मन भी तुझसा हो जाए!

खिला-खिला और उमंगों से भरा| जैसे प्रकृति हर्षाते हुए सब कुछ स्वीकार करती है| जैसे तुम्हारा आगमन प्रकृति को वासंती रंग से सराबोर कर देता है, ऐसे ही ऊर्जामयी वासंती भावों से मेरा मन भी लबरेज रहे| मन का ऐसा सुहावना मौसम जीवन की यात्रा को आसान और आनंदमय कर देता है|

ऊर्जा और उल्लास के साथ जीना सिखाता है| आज के उलझनों, भागम-भाग और तनाव भरे समय और छीजती रही ऊर्जा के दौर में मेरे मन को यह यह पाठ पढ़ाओ, हमें अपनी तरह खिल-खिलकर जीना सिखाओ वसंत!

वर्तमान का लें आनंद

वसंत, तुम्हारे आने से हर ओर उल्लास छा जाता है| मुस्कुराती-गुनगुनाती हुई धरती नए रंग में रंग जाती है| हालांकि प्रकृति के ऐसे रंग एक नियत समय तक ही रहते हैं, फिर मौसम को बदलना ही होता है| लेकिन आने वाली शुष्क ऋतु की चिंता के बजाय प्रकृति का रोम-रोम बस आज को जीता है|

प्रकृति का यह भाव तो यही कहता है कि खिले रंग और खुशियां हमेशा नहीं रहते, पर जब तक हैं, उन्हें जी भरकर जिया जाए| वसंत ऋतु भी अस्थिर है, इसके बाद मौसम को बदलना ही होता है| फूल मुरझाते भी हैं और पत्ते भी शाख से गिरते हैं| लेकिन जब तक तुम रहते हो वसंत, प्रकृति हर पल को मुस्कुराते हुए जीती है|

हम भी तुम्हारी तरह वर्तमान के हर पल को जीना सीखें| आने वाले कल की फ़िक्र में आज के रंग को अपने भीतर समेटना न भूलें| क्या छूट जाएगा की चिंता के बजाय, वर्तमान की खुशियां और खिलखिलाहटें अपने भीतर समेटें| सकारात्मक पहलुओं को तलाशते हुए ख़ुशी के चटक रंगों से अपनी झोली भर लें|

गतिशील बने जीवन

बदलाव जीवन का सच है| संपूर्ण धरा के सौंदर्य को निखारने वाला यह खूबसूरत पड़ाव हमें यह सिखाए कि ठहरी-सी शीत ऋतु के बाद वसंत और वसंत के सुहावने दिनों के बाद तपाने वाली गर्मी का मौसम आता है| यही जीवन की गतिशीलता है तो हर उतार-चढ़ाव को जीते हुए आगे बढ़ते जाने में ही आनंद पाने की कोशिशें करनी होंगी।

जिंदगी कहीं ठहरती नहीं| ऋतु चक्र की तरह सुख-दुःख के मौसम आते-जाते रहते हैं| ऐसे में गतिशील बने रहना ही मायने रखता है| वसंत, तपती धूप हो या खिलते फूलों का मौसम जीवन गतिशील रहे, यह भाव भी सिखाओ|

जुड़ाव का कारण बनें

फूलों का खिलना, भंवरों का गुनगुनाना, तितलियों का मंडराना और सुवासित सुगंध का पूरे वातावरण में फैल जाना, तुम कितनी ही गतिविधियों को एक साथ जोड़ देते हो वसंत| धरती की उत्सवीय गोद में मानो सब को न्योता देकर बुलाते हो| एक कड़ी बन जाते हो प्रकृति के हर हिस्से के बीच| क्या ही अच्छा हो कि हम भी ऐसे ही जुड़ाव का कारण बनें|

रिश्तों में अपनेपन की सुगंध फैलाएं| तितलियों और भंवरों की तरह जीवन को उत्सवीय रूप में देखें | सजी सुंदर धरा के कण-कण में जैसे सुंदरता दिखती है, वैसे ही जीवन के हर हिस्से में, हर अवसर पर सकारात्मकता और सौंदर्य तलाशें, ताकि आपसी लगाव का एक पुल बन सकें| अमराई की भीनी-भीनी खुशबू की तरह अपने आंगन को महकाएं| रिश्तों में तुम्हारे प्रतीक केसरिया-पीले रंग के उल्लास और जीवंत भाव को हम जी सकें|

मुस्कुराहटों के वासंती रंग बिखरें

चटकती कलियों और गेहूं की लहलहाती बालियों की तरह हम भी उल्लास में डूब जाएं, वसंत| सरसों के खेतों में बिखरी पीले रंग की खिलखिलाहट हमारे चेहरे पर भी सजी रहे| टेसू के ऊर्जामयी रंग, विचार और व्यवहार में उतर आएं| पेड़ों पर खिलती नई कोंपलों में जीवन की उम्मीदों की दस्तक सुनाई दे|

गुनगुनी धूप मन-जीवन को सहजता की चमक से लबरेज कर दे| मन-जीवन को स्नेह से सिंचित करने की सीख मिले| श्रंगारित धरा के समान जीवन को संवारने की सीख मिले| सुनो वसंत, अबके बरस तुम्हारे ऐसे सुंदर रंगों से हमारा मन भी रंग जाए | ताकि हम भी मुस्कुराहटों के वासंती रंग बिखेर सकें।

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