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बसंत पंचमी निबंध : जानें विदेशों वसंत पंचमी कैसे मनाई जाती है

बसंत पंचमी 2019 (Basant Panchami 2019) में 10 फरवरी 2019 को है। भारत देश में तो वसंतोत्सव मनाने की परंपरा पौराणिक काल से चली आ रही है। लेकिन दुनिया के कई देशों में भी इस खूबसूरत मौसम का स्वागत अलग-अलग नामों वाले उत्सवों और अलग-अलग तरीके से किया जाता है। दुनिया में वसंतोत्सव के कैसे-कैसे रंग बिखरते हैं, आप भी जानिए।

बसंत पंचमी निबंध : जानें विदेशों वसंत पंचमी कैसे मनाई जाती है
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बसंत पंचमी 2019 (Basant Panchami 2019) में 10 फरवरी 2019 को है। बसंत ऋतू को वसंत ऋतू भी कहा जाता है। लेखक शिखर चंद जैन आज आपके लिए बसंत पंचमी पर निबंध (Basant Panchami Esay) लाये हैं। अगर कहें कि वसंत एक ऋतु नहीं, बल्कि एक उत्सव है, तो कत्तई गलत नहीं होगा। भले ही दुनिया भर में वसंत ऋतु के महीने कुछ आगे-पीछे आते हों, लेकिन इस ऋतु को लेकर लोगों का उत्साह दुनिया भर में एक जैसा ही है। लोग खुलकर मौज-मस्ती करते हैं और इस ऋतु को त्योहार की तरह मनाते हैं, ठीक उसी तरह जैसे हमारे देश में इस मौसम में बसंत पंचमी और होली मनाई जाती है।

जापान

जापान में वसंत ऋतु का स्वागत रंग-बिरंगे फूलों से किया जाता है। ‘ब्लूम ऑफ चेरी ब्लॉसम्स’ नामक इस उत्सव में फूलों के अलावा जापान की तरह-तरह की पारंपरिक कलाओं का प्रदर्शन किया जाता है। यहां स्वादिष्ट व्यंजन और क्षेत्रीय हस्तकला के सामान खूब बिकते हैं। ‘हानामी’ नामक पारंपरिक उत्सव में शरीक होने वाले लोग फूलों से सजे बागीचे और पंडालों के नजारे देखते हैं। कई लोग अपनी भावनाओं का इजहार कविताओं या अन्य तरीकों से करते हैं। इस दौरान बहुत से लोग, रंग-बिरंगे फूलों से लदे पेड़ों के तले बैठकर अपने घर से लाया या मेले से खरीदे गए व्यंजनों का आनंद अपने परिवार और दोस्तों के साथ लेते हैं और पूरी जिंदादिली के साथ इस उत्सव का लुत्फ उठाते हैं।

स्कॉटलैंड

न जाने कितने वर्षों पुरानी वसंतोत्सव मनाने की परंपरा है और कैसे इसकी शुरुआत हुई, लेकिन स्कॉटलैंड के लोग साल दर साल खूब मस्ती के साथ इनका निर्वाह करते हैं। यहां के लैनार्क प्रांत में बच्चे बसंत उत्सव अनूठे अंदाज में मनाते हैं। क्रंपल्ड पेपर की बॉल बनाकर ये बच्चे उसे सिर के चारों ओर झुलाते हुए इधर से उधर दौड़ लगाते हैं। शहर में घंटाघर से जब तक शाम 6 बजे की आवाज न गूंजने लगे, तब तक बच्चे खूब हो-हुल्लड़ मचाते हैं। 6 महीने की कड़ाके वाली सर्दी की तकलीफ दूर होने और इस सन्नाटे भरे मौसम में आई बुरी आत्माओं को खदेड़ने के लिए ऐसा किया जाता है, ऐसी यहां मान्यता है। स्कॉटलैंड में मनाए जाने वाले इस वसंत उत्सव का नाम है-व्हूप्पीटी स्कूरी।

स्विट्जरलैंड

ठिठुराने वाली ठंड ज्योंही कम होती है और मस्ती भरा सुहावना वसंत आता है, स्विट्जलैंड के लोग सर्दी के प्रतीक स्नोमैन के बुत को जला कर उत्सव मनाते हैं। यहां ‘बूग’ के नाम से स्नोमैन को जलाने की यह परंपरा 16वीं सदी से चली आ रही है। बूग में आतिशबाजी भी भरी होती है। माना जाता है कि जितनी जल्दी आग बूग के पैरों से होती हुई सिर तक पहुंचेगी, उतनी ही जल्दी अच्छा मौसम शुरू होगा।

ऑस्ट्रेलिया

वसंत के मौसम में आस्ट्रेलिया की राजधानी केनबेरा में लाखों लोगों की भीड़ देखकर पर्यटक भी उत्साहित हो जाते हैं। यह भीड़ यहां के चर्चित फ्लॉवर फेस्टिवल को एंज्वॉय करने वाले लोगों की होती है। वसंतोत्सव का यह खुमार कोई एक-दो दिन या हफ्ते भर नहीं बल्कि पूरे एक महीने तक अपने शबाब पर रहता है। यहां के कॉमनवेल्थ पार्क में रंग-बिरंगे फूलों और रंगारंग स्टाइलिश कपड़े पहनकर घूमने वाले लोगों की बहार देखने लायक होती है। उत्सव के दौरान म्यूजिक, आर्ट, हॉर्टीकल्चरल वर्कशॉप एवं अन्य मनोरंजक गतिविधियां लोगों का मन मोह लेती हैं।

बुल्गारिया

बुल्गारिया के लोग वसंतोत्सव में आनंद और मनोरंजन के साथ-साथ सेहत का संदेश भी प्रेषित करते हैं। बाबा मार्टा दिवस के रूप में मनाया जाने वाला यह उत्सव सदियों पुराना है। उत्सव में लोग एक-दूसरे के साथ ‘मार्टेनिट्सी’ का आदान-प्रदान करते हैं। यह लाल-सफेद रंग का रिस्ट बैंड होता है, जो हेल्थ, फर्टिलिटी और हैप्पीनेस का प्रतीक है और बुरी ताकतों से रक्षा करने वाला माना जाता है। इसे लोग अपने प्रियजनों, मित्रों और रिश्तेदारों को तो उपहार स्वरूप देते ही हैं, साथ ही अपने घरों और आस-पास के पेड़ों पर भी इसे सजाते हैं।

बोस्निया

वसंत ऋतु के आरंभ होते ही इस देश में ‘सिंबुरीजाडा’ नामक उत्सव मनाया जाता है। इस शब्द का अर्थ है-तले हुए अंडों का उत्सव। हजारों की तादाद में लोग नदी किनारे मनोरंजन के लिए बने मैदान ‘कैंबेरोबिका’ में इकट्ठे होते हैं। उत्सव की शुरुआत पारंपरिक डिश ‘सिंबुर’ बनाकर की जाती है। यह अंडों से बनी डिश होती है। कई उत्साही लोग तो रात को ही यहां टेंट बनाकर ठहर जाते हैं ताकि सूर्योदय का भरपूर आंनद उठा सकें। कुछ लोग बोस्निया नदी में स्नान करते हैं। फिर दिन भर जो मौज-मस्ती होती है, वो पूरे एक महीने तक जेनिका स्प्रिंग फेस्टिवल के नाम से चलती है। इस दौरान तरह-तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित होते हैं। इसमें हर उम्र के लोग और खासकर युवक-युवतियां बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं।

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