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वकील नेताओं को नोटिस: नेता वकालत कर सकते हैं या नहीं 22 होगा फैसला

सांसद और विधायक का वकालत करना भारतीय संविधान के आर्टिकल 14 और 15 का उल्लंघन।

वकील नेताओं को नोटिस: नेता वकालत कर सकते हैं या नहीं 22 होगा फैसला

क्या कानून बनाने वाले नेता वकालत कर सकते हैं? जल्द ही इसका फैसला बार काउंसिल द्वारा गठित एक्सपर्ट कमेटी करेगी।

इसके तहत कमेटी ने ऐसे 500 से ज़्यादा एमपी, एमएलए और एमलसी को नोटिस भेजा है। नेताओं को इसका जवाब एक हफ्ते के अंदर देना होगा। नोटिस को लेकर आखिरी सुनवाई 22 जनवरी को होगी।

एक्सपर्ट कमेटी के चेयरमैन और वकील मनन कुमार मिश्रा ने कहा है कि इन नेताओं को इसलिए नोटिस भेजा गया ताकि अगर बार काउंसिल ऑफ इंडिया इनकी मान्यता रद्द करता है तो बाद में वो ये ना कह सके कि न्यायिक व्यवस्था का उल्लंघन किया गया है।

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कमेटी ने कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी, केटीएस तुलसी, पी चिदंबरम, भूपेन्द्र यादव और मीनाक्षी लेखी जैसे कई बड़े नेताओं को नोटिस भेजा गया है। कमेटी के मुताबिक नेताओं का वकालत करना कॉनफ्लिक्ट ऑफ इंट्रेस्ट का मामला है।

कमेटी के मुताबिक सांसद और विधायक का वकालत करना भारतीय संविधान के आर्टिकल 14 और 15 का उल्लंघन है। पिछले महीने 21 दिसंबर को बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया था।

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सांसदों और विधायकों के वकालत पर रोक लगाने के लिए बीजेपी के नेता और सुप्रीम कोर्ट के वकील अश्विनी उपाध्याय ने भी याचिका दायर की है।

अश्विनी उपाध्यय के मुताबिक जज निडर होते हैं लेकिन कई बार लोगों को ये लगता है कि जज ने फैसला सुनाने में पक्षपात किया है। उपाध्याय ने ये भी कहा कि नेताओं का वकालत करना कॉनफ्लिक्ट ऑफ इंट्रेस्ट का गंभीर मामला है।

बार काउंसिल द्वारा गठित एक्सपर्ट कमेटी में भोज चन्द्र ठाकुर, रमेशचंन्द्र जी शाह और डीपी ढाल जैसे जाने-माने वकील शामिल हैं।

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