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20 जनवरी से बैंक देगी झटका, इन सेवाओं के लिए चुकाना होगा ज्यादा

नए साल में जहां एक्सिस और एसबीआई बैंक ग्राहकों को सौगात दी वहीं अब लोगों को 2018 में पहला झटका लगने जा रहा है।

20 जनवरी से बैंक देगी झटका, इन सेवाओं के लिए चुकाना होगा ज्यादा

नए साल में जहां एक्सिस और एसबीआई बैंक ग्राहकों को सौगात दी वहीं अब लोगों को 2018 में पहला झटका लगने जा रहा है। अब तक जो सेवाएं मुफ्त मिल रही थीं, अब उन बैकिंग सेवाओं के लिए पैसे चुकाने होंगे। यह शुल्क 20 जनवरी को लेने की तैयारी है। हालांकि, कुछ सुविधाओं के लिए शुल्क की समीक्षा होगी।

इन सुविधाओं में पैसा निकालने, जमा करने, मोबाइल नंबर बदलवाने, केवाईसी, पता बदलवाने, नेट बैंकिंग और चेक बुक के लिए आवेदन करने जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

सूत्रों के मुताबिक, नए शुल्कों को लेकर आंतरिक आदेश मिल चुके हैं। सूत्रों के मुताबिक, सभी बैंक आरबीआई के निर्देशों का पालन करते हैं। नियमों के अनुसार संबंधित बैंक का बोर्ड सभी सेवाओं पर लगने वाले शुल्क का फैसला लेता है। बोर्ड की मंजूरी के बाद ही अंतिम फैसला लिया जाता है। बैंकों के इस कदम से देशभर के सभी खाताधारक प्रभावित होंगे।

हालांकि, बैंकर्स ने इस कदम को सही बताया है। उनका कहना है कि खाताधारक अगर अपनी होम ब्रांच के अतिरिक्त किसी अन्य ब्रांच से बैंकिंग सेवाएं लेता है तो शुल्क लगना चाहिए।

दूसरी ब्रांच में ट्रांजैक्शन शुल्क

अपने खाते वाली शाखा के अलावा, बैंक की दूसरी शाखा से सेवा लेने के लिए अलग से शुल्क चुकाना होगा। शुल्क के अलावा जीएसटी भी लगेगा। इसके लिए बैंक आपको अलग से चार्ज नहीं करेगा बल्कि जो भी शुल्क होगा वह आपके खाते से काट लिया जाएगा।

क्या होगा फायदा

बैंक से जुड़े एक अधिकारी के मुताबिक इस कदम से ऑनलाइन बैंकिंग को बढ़ावा मिलेगा। इससे चेक और डिमांड ड्राफ्ट भी अप्रासंगिक हो जाएंगे। एटीएम और कियॉस्क मशीनों से पासबुक अपडेट और पैसों का लेनदेन भी निशुल्क किया जा सकेगा।

ये है नियम

  • सेल्फ चेक के लिए 50, 000 की रकम निकलवाने पर आपको 10 रुपए चार्ज देना लगेगा।
  • कोई तीसरी व्यकित आपके बैंक अकाउंट से 10 हजार रुपए ही निकाल पाएगा।
  • बचत खाते में अधिकतम 2 लाख तक कैश जमा कर सकेंगे।
  • रोजाना 50 हजार जमा करवामा फ्री। इसके बाद प्रति हजार 2.50 रुपए चार्ज देना होगा।
  • इंटरनेट मोबाइल बैकिंग के लिए 25 रुपए का चार्ज
  • पिन और पासवर्ड लेने या बदलने के लिए आपको 10 रुपए चुकाने होंगे।

एक्सपर्ट व्यू

अधिवक्ता उदय वरुंजिकर ने कहा कि अब बैंक फायदा कमाने वाले संस्थान बनते जा रहे हैं। बैंकों ने निजी साहूकारों जैसा व्यवहार शुरू कर दिया है, इसलिए उपभोक्ताओं के अधिकारों की सुरक्षा होनी चाहिए।

रिजर्व बैंक के दिशानिर्देशों में संशोधन के बिना बैंक इस तरह खाते से शुल्क के रूप में पैसा काटने जैसे नियम नहीं बना सकते। सेवाकर से जुड़े पूर्व प्रमुख आयुक्त सुशील सोलंकी ने विभिन्न शुल्क पर जीएसटी लगाने का समर्थन किया।

हालांकि उन्होंने मुख्य शाखा से इतर किसी शाखा से बैंकिंग सेवा लेने पर शुल्क लेने को गलत ठहराया। उन्होंने इसे ब्लैकमेलिंग की संज्ञा दी। वाचडॉग फाउंडेशन से जुड़े अधिवक्ता गॉडफ्रे पेमिंटा ने कहा कि बिना बताए खाते से शुल्क के रूप में पैसा काट लेना, एक बड़ी लूट से जनता को अंधेरे में रखने जैसा है।

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