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बैंकों को डेढ महीने पहले पता चल गया था साइबर चोरी के बारे में

साइबर सेंध की बात छह सप्ताह पहले पता चल जाने पर भी बैंकों ने अथॉरिटीज को अलर्ट क्यों नहीं किया?

बैंकों को डेढ महीने पहले पता चल गया था साइबर चोरी के बारे में

नई दिल्ली. देश में साइबर चोरी की घटना से 19 बैंक पहली बार इस तरह के क्राइसिस से गुजर रहे हैं जब हैकिंग और डाटा लीक के डर से उन्हें करीब 32 लाख डेबिट कार्ड्स या तो ब्लॉक करने पड़े हैं या फिर उन्होंने ये कार्ड्स रिकॉल कर लिए हैं। भारतीय बैंकिंग क्षेत्र को प्रभावित करने वाली अपनी तरह की सबसे बड़ी डेटा सुरक्षा में सेंधमारी की घटना से सरकारी और निजी क्षेत्र के अनेक बैंकों के 32 लाख से अधिक डेबिट कार्ड प्रभावित हुए हैं। साइबर चोरों की पहुंच में 32 लाख से ज्यादा डेबिट कार्ड्स के आ जाने से बैंकों में अफरातफरी मच गई।

आपको बता दें डेटा में यह सेंध कुछ एटीएम प्रणालियों में साइबर मालवेयर हमले के रूप में हुई है। बड़े बैंकों ने अपने खाताधारकों को भरोसा दिलाया कि उनका पैसा सुरक्षित है। इस मामले ने सरकार और आरबीआइ को भी हरकत में ला दिया।
बैंकों को साइबर सेंध का पता कम से कम छह सप्ताह पहले चल गया था, जब चीन में अनधिकृत ट्रांजैक्शंस के बारे में कस्टमर्स ने शिकायतें की थीं। दो बैंकरों ने बताया कि सितंबर में कस्टमर्स ने शिकायत करनी शुरू की थी कि उनके एकाउंट्स में चीन, अमेरिका, इंडोनेशिया और रूस तक से ट्रांजैक्शंस हो रहे हैं। एक्सपर्ट्स ने कहा कि चोरी हो सकता है कि कुछ हजार कार्ड्स तक सीमित हो, लेकिन माना जा रहा है कि एक पेमेंट गेटवे के सुरक्षा तंत्र में सेंध एक मॉलवेयर के चलते लगी और इससे सैकड़ों करोड़ रुपये की रकम पर खतरा आ गया।
हालांकि बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि साइबर सेंध की बात छह सप्ताह पहले पता चल जाने पर भी बैंकों ने अथॉरिटीज को अलर्ट क्यों नहीं किया और नुकसान रोकने के लिए तेजी से कदम क्यों नहीं उठाए।
मामले की जानकारी रखने वाले दो लोगों ने बताया कि आरबीआइ ने बैंकों से कहा कि वे अपने एटीएम में सुरक्षा घेरा टूटने के बारे में रिपोर्ट पेश करें। वहीं इस संबंध में फॉरेंसिक रिपोर्ट इस महीने के अंत तक आने की उम्मीद है।
एसबीआइ, आइसीआइसीआइ बैंक, एचडीएफसी बैंक, यस बैंक, एक्सिस बैंक सहित कई बैंकों के 32 लाख से ज्यादा डेबिट कार्ड्स की डिटेल्स में सेंध लगी है। एनपीसीआइ के चीफ एग्जिक्यूटिव ए.पी. होता ने कहा, 'ऐसे फ्रॉड्स की जानकारी मिलने पर किए गए विश्लेषण से साबित हुआ है कि एक पेमेंट स्विच प्रोवाइडर के सिस्टम में चूक हुई होगी।'
एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि फाइनैंस मिनिस्ट्री ने आरबीआइ और नैशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया से डेबिट कार्ड इन्फॉर्मेशन चुराए जाने के बारे में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
एक बैंकर ने गुरुवार को कहा, 'आरबीआइ ने इस संबंध में हमसे स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। हमें यह बताना है कि कितने कार्ड्स का डेटा लीक हुआ और कितनी रकम पर हाथ साफ किया गया।' देश में तमाम एटीएम को जोड़ने वाली नोडल एजेंसी एनपीसीआइ है और वह रूपे गेटवे भी चलाती है।
यस बैंक और हिताची पेमेंट सर्विसेज ने इस बात से इनकार किया कि इस संकट की जड़ माना जा रहा मैलवेयर उनके सिस्टम्स में था। सूत्रों ने बताया कि आरबीआइ ने यस बैंक से बात की है, जो हिताची पेमेंट सर्विसेज का इस्तेमाल करता है। हिताची पेमेंट सर्विसेज से ही सेंध लगने की बात की जा रही है।
बैंकरों के अनुसार यह सुरक्षा सेंध इस तरह से हुई है कि क्षेत्र में उक्त बैंक का एटीएम इस्तेमाल करने वाला प्रभावित हो सकता है। वित्त मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार वित्तीय सेवा विभाग ने भारतीय बैंक संघ से इस तरह की डेटा सेंधमारी के प्रभाव की जानकारी मांगी है।
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