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बैड लोन से बैंक ऑफ इंडिया को हुआ घाटा, बैंकिंग बिजनेस में भी मुनाफा कम हुआ

बैंक के सीईओ दीनबंधु महापात्रा ने बताया कि बैड लोन पीक लेवल पर पहुंच गए हैं। अब इनमें कमी आएगी इसलिए वित्त वर्ष 2019 में बैंकों का प्रदर्शन अच्छा रहेगा।

बैड लोन से बैंक ऑफ इंडिया को हुआ घाटा, बैंकिंग बिजनेस में भी मुनाफा कम हुआ
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बैड लोन पर अधिक प्रोविजनिंग और बैंकिंग बिजनेस से कम मुनाफे के चलते बैंक ऑफ इंडिया को मार्च तिमाही में 3,969 करोड़ रुपये का घाटा हुआ, जबकि सालभर पहले की इसी तिमाही में उसे 1,048 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था।

बैंक के सीईओ दीनबंधु महापात्रा ने बताया, 'बैड लोन पीक लेवल पर पहुंच गए हैं। अब इनमें कमी आएगी इसलिए वित्त वर्ष 2019 में बैंकों का प्रदर्शन अच्छा रहेगा। जिस तरह से एनसीएलटी के जरिये लोन की रिकवरी हो रही है, उससे हम काफी पैसा वापस मिलने की उम्मीद कर रहे हैं।'

रिजर्व बैंक ने इस साल फरवरी में सभी लोन रिस्ट्रक्चरिंग पर रोक लगा दी थी। इस वजह से बैंक ऑफ इंडिया को 5,107 करोड़ रुपये के कर्ज को बैड लोन की कैटेगरी में डालना पड़ा। इस वजह से मार्च तिमाही में बैंक के मुनाफे पर दबाव बना।

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हालांकि, बैंक ऑफ इंडिया ने इस तिमाही में 11,417 करोड़ रुपये की रिकवरी भी की है। इसमें से अधिकांश रकम दूसरे बैंकों की तरफ से जारी किए गए स्टैंडबाय लेटर क्रेडिट को भुनाने से मिली है।

नेट बैड लोन घटा

मार्च तिमाही में बैंक का प्रोविजन कवरेज रेशियो भी साल भर पहले के 56.9 पर्सेंट से सुधरकर 65.8 पर्सेंट पर पहुंच गया। वहीं, उसका नेट बैड लोन साल भर पहले के 10.25 से घटकर 8.2 पर्सेंट पर आ गया।

महापात्रा ने बताया कि 66 पर्सेंट पीसीए के साथ हमारा भविष्य सुरक्षित हो गया है। अब हम उन लोन एकाउंट्स में हेयरकट के लिए तैयार रहेंगे, जिन्हें बैंकरप्सी कोर्ट भेजा गया है।

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घाटे की वजह ब्याज आय में हुई घटोतरी

बैंक के घाटे की एक वजह यह भी है। बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम मार्च तिमाही में 26 पर्सेंट घटकर 2,564 करोड़ रुपये रह गई, जबकि नॉन-इंटरेस्ट इनकम 21 पर्सेंट की गिरावट के साथ 1,375 करोड़ रुपये रही।

वित्त वर्ष 2018 में बैंक ऑफ इंडिया को 6,044 करोड़ रुपये का घाटा हुआ, जबकि साल भर पहले उसे 1,558 करोड़ रुपये का लॉस हुआ था।

घाटे से उबरने ये लिए फैसले

महापात्रा ने बताया कि टर्नअराउंड स्ट्रैटेजी के तहत बैंक ने ब्रांच की संख्या में कमी करने, घाटे में चल रहे 290 एटीएम को बंद करने, रियल एस्टेट को बेचकर 1,000 करोड़ रुपये जुटाने और रिटेल लोन बिजनेस को बढ़ाने का फैसला किया है।

आरबीआई ने डाला पीसीए श्रेणी में

रिजर्व बैंक ने बैंक ऑफ इंडिया को प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन (पीसीए) कैटेगरी में डाल दिया था। इससे उसे बिजनेस बढ़ाने में दिक्कत हो रही है। बैंक ने इस वित्त वर्ष में बैड लोन को घटाकर 6 पर्सेंट से कम करने का लक्ष्य रखा है ताकि वह पीसीए से बाहर निकल सके।

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