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बांग्लादेश में रासायनिक गोदामों में भयानक आग, 81 लोगों की मौत

बांग्लादेश की राजधानी ढाका में रासायनिक गोदामों के रूप में इस्तेमाल होने वाली अनेक इमारतों में भयानक आग गई। इस दुर्घटना में 81 लोग मारे गए तथा कई घायल हो गए। तेजी से फैलती आग ने आसपास की इमारतों को भी चपेट में ले लिया।

बांग्लादेश में रासायनिक गोदामों में भयानक आग, 81 लोगों की मौत

बांग्लादेश की राजधानी ढाका में रासायनिक गोदामों के रूप में इस्तेमाल होने वाली अनेक इमारतों में भयानक आग गई। इस दुर्घटना में 81 लोग मारे गए तथा कई घायल हो गए। तेजी से फैलती आग ने आसपास की इमारतों को भी चपेट में ले लिया।

दमकल अधिकारियों ने बताया कि ढाका के पुराने इलाके चौकबाजार में एक मस्जिद के पीछे हाजी वाहिद मैंशन नाम की चार मंजिला इमारत के भूतल पर रासायनिक गोदाम में आग लगी और तेजी से एक सामुदायिक केंद्र समेत आसपास की चार अन्य इमारतों में फैल गई। ढाका साउथ के मेयर सईद खोकोन ने बताया आग बुझाने का काम समाप्त हो रहा है।

दमकल अधिकारियों ने बताया कि आग से अब तक 81 लोगों की मौत हो चुकी है। ढाका मेट्रोपोलिटन पुलिस (डीएमपी) के अधिकारियों ने कहा कि इलाके में रसायनों के कई गोदाम होने से आग तेजी से फैली। दमकल सेवा नियंत्रण कक्ष के प्रवक्ता कमरूल अहसन ने 81 लोगों के मारे जाने की पुष्टि की। सरकारी ढाका मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल के निदेशक ब्रिगेडियर जनरल एकेएम नसीरूद्दीन ने बताया कि 78 शव अस्पताल में रखे गए हैं।

उन्होंने आशंका जताई कि मृतकों की संख्या बढ़ सकती है क्योंकि कई लोगों की हालत गंभीर है जिनका बर्न यूनिट में इलाज चल रहा है। खोकोन ने करीब 14 घंटे की कोशिश के बाद दोपहर 12 बज कर दस मिनट पर बचाव अभियान बंद कर दिया।

37 दमकल वाहन

37 दमकल वाहनों और 200 दमकल कर्मियों की मदद से आग बुझाई गई। संकरी गलियां होने की वजह से दमकल वाहनों को मौके तक पहुंचने में दिक्कत हुई। बांग्लादेश दमकल सेवा के प्रमुख अली अहमद ने बताया कि ढाका के पुराने इलाके चौकबाजार में आग गैस सिलेंडर से लगी होगी जिसके बाद वह तेजी से पूरी इमारत में फैल गई जहां ज्वलनशील पदार्थों का भंडार था।

पहले भी हो चुकी घटना

गौरतलब है कि ढाका की एक पुरानी इमारत में 2010 में आग की ऐसी ही घटना में 120 से अधिक लोग मारे गए थे। इसे बांग्लादेश में आग लगने की सबसे खतरनाक घटना बताया जाता है। इससे जन आक्रोश पैदा हुआ था और लोगों ने रासायनिक गोदामों और भंडारों को इलाके से स्थानांतरित करने की मांग की थी लेकिन पिछले नौ वर्षों में इस दिशा में कुछ खास नहीं हुआ।

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