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बलूचिस्तान के सहारे पाक को देंगे मात!

पड़ोसी देश का एक और विभाजन कराने की जुगत में सरकार

बलूचिस्तान के सहारे पाक को देंगे मात!
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नई दिल्ली. पाकिस्तान की शतरंजी बिसात पर उसी के मोहरे से मात देने की आक्रामक रणनीति भारत तैयार कर रहा है। पाकिस्तान को लेकर डिप्लोमेटिक यू-टर्न इतना गहरा और असरदार होगा कि इसकी धमक अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भी सुनी जा सकेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इंदिरा गांधी की तर्ज पर मजबूती से काम करने वाले प्रधानमंत्री के तौर पर अब तक देखा जाता रहा है, सत्ता प्रतिष्ठान से जुड़े उच्चस्तरीय सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री अपनी उसी छवि को दो कदम आगे ले जाने की तैयारी कर रहे हैं।
जिस तर्ज पर इंदिरा गांधी ने पाकिस्तान से बांग्लादेश को अलग कर कूटनीतिक महारथियों को चौंका दिया था। विश्व के शक्तिशाली देशों में भारत का डंका बजने लगा था। ठीक वैसे ही पाकिस्तान से तोड़कर बलूचिस्तान को अलग देश बनाने की रणनीति पर काम चल रहा है।
अमेरिका के दो प्रभावशाली सांसदों ने पाकिस्तान को आतंकवाद को प्रायोजित करने वाला देश घोषित करने के लिए प्रतिनिधि सभा में एक विधेयक पेश किया है। यह उसको ऐसे समय में एक झटका है जब उसके पीएम नवाज शरीफ कश्मीर मसले को लेकर सर्मथन हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। शरीफ ने भारत के साथ विवाद का अंतरराष्ट्रीयकरण करने के लिए विश्व के नेताओं से वार्ता की।
इस बीच दोनों सांसदों ने कहा कि अब समय आ गया है जब अमेरिका पाकिस्तान को उसके विश्वासघात के लिए धन देना बंद कर दे। रिपब्लिकन पार्टी के टेड पो और डेमोक्रेटिक पार्टी से कांग्रेस सदस्य डाना रोहराबाचर ने पाकिस्तान स्टेट स्पॉन्सर ऑफ टेररिज्म डेजिगनेशन एक्ट पेश किया। रोहराबाचर आतंकवाद पर कांग्रेस की प्रभावशाली समिति के रैंकिंग सदस्य हैं।
आतंकवाद पर सदन की उपसमिति के अध्यक्ष पो ने कहा कि अब समय आ गया है कि हम पाकिस्तान के विश्वासघात के लिए उसे धन देना बंद कर दें और उसे वह घोषित करें जो वह है: आतंकवाद को प्रायोजित करने वाला देश।
इससे पाकिस्तान को कमजोर किया जा सकेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि मजबूत नेता के रूप में वैश्विक मंच पर उभर सकेगी।
हालांकि यह काम उतना आसान नहीं। लेकिन बलूचिस्तान से जुड़े नेताओं से सीधे संपर्क कर, वहां ऑल इंडिया रेडियो को पहुंचाकर और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर बलूचिस्तान में लगातार हो रहे मानवाधिकार हनन के पाकिस्तानी कारनामों को उजागर कर प्रधानमंत्री ने पहले से दबाव बनाया हुआ है।
उरी में हुए आतंकवादी घटना के बाद योजना पर तेजी से काम हो रहा है। अमेरिका में रह कर बलूचियों के मानवाधिकार की रक्षा अंतर्राष्ट्रीय मंचों के माध्यम से करने वाले बलूच नेता ब्रह्न्दघ बुगती ने यूं ही नहीं भारतीय नागरिकता के लिए अमेरिका स्थित भारतीय दूतावास से संपर्क किया है! तय पटकथा के अनुसार कूटनीतिक बिसात पर चाले चली जा रही हैं। पाकिस्तान के अंदर ही बलूची लोगों को पाकिस्तान के खिलाफ खड़ाकर ठीक उसी तरह मात देने की जुगत है जिस तरह कश्मीर में हुर्रियत नेताओं को प्र्शय देकर पाकिस्तान भारत के खिलाफ आतंक का जहर फैलाता रहा है।
पाकिस्तान के सुरक्षाकर्मियों ने लंबे समय से बलूचिस्तान के लोगों पर कहर बरपाया हुआ है। उसे अब तक पाकिस्तान से बाहर निवास करनेवाले बलूची लोग व्यक्तिगत स्तर पर तो कभी सामूहिक स्तर पर अलग-अलग अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर उठाते रहे हैं। पर अब भारत की आवाज उनकी आवाज से मिलने के बाद समीकरण तेजी से बदला है।
केंद्र सरकार में उच्चपदस्थ सूत्रों ने यह भी बताया कि भारतीय सेना में बलूच लड़ाकों को तैयार कर क्या अलग से बलूच-रेजीमेंट बनाया जा सकता है? इस रणनीति पर भी काम चल रहा है। ऐसा हुआ तो पाकिस्तान के खिलाफ पाकिस्तान में सताए जा रहे लोगों को इंतकाम का जरिया भारत बनेगा, जिसके दूरगामी परिणाम होंगे। पर क्या इसके लिए अंतर्राष्ट्रीय मदद मिल सकेगा? क्या इसकी इजाजत संयुक्त राष्ट्र संघ देगा? अमेरिका इस योजना में भारत का साथ देगा? इन सभी प्रश्नों से फिलहाल केंद्र सरकार के रणनीतिकार बिल्कुल नहीं जूझना चाहते। उक्त अधिकारी ने कहा, अमेरिका दोधारी तलवार है। वह भारत और पाकिस्तान दोनों तरफ खेलता है। अमेरिका की चिंता अब इन मामलों में नहीं की जाएगी। अभी फौरीतौर पर चीन को पाकिस्तान से दूर करना ही प्राथमिकता में शुमार है। विश्व बिरादरी से अलगथलग कर पाकिस्तान को घेरा जाएगा।
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