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इन वजहों से नवाज शरीफ ने बाजवा को सौंपी सेना की कमान

बाजवा को रहील शरीफ के उत्तराधिकारी के तौर पर चुना गया है।

इन वजहों से नवाज शरीफ ने बाजवा को सौंपी सेना की कमान
नई दिल्ली. पाकिस्तान के नए सेना प्रमुख चुने गए लेफ्टिनेंट जनरल कमर जावेद बाजवा को यह अहम जिम्मेदारी मिलने की वजह यह है कि वह लोकतंत्र के समर्थक और लो-प्रोफाइल व्यक्ति माने जाते हैं। पाकिस्तानी मीडिया के रिपोर्ट्स और एक्सपर्ट्स ने रविवार को कहा कि बाजवा को चार सीनियर जनरलों के मुकाबले तवज्जो दिए जाने की यही वजह है कि लो-प्रोफाइल और लोकतंत्र समर्थक विचारों का हामी होने की वजह से नवाज शरीफ ने उन्हें मौका दिया है। पाकिस्तान के प्रमुख अखबार 'द न्यूज' ने कहा, 'जनरल बाजवा का प्रोफाइल स्पष्ट तौर पर बताता है कि उनका लोकतंत्र समर्थक होना ही सेना प्रमुख के तौर पर उन्हें कमान सौंपे जाने की सबसे बड़ी वजह है।'
शनिवार को ही पाकिस्तान के पीएम नवाज शरीफ ने उन्हें रहील शरीफ के उत्तराधिकारी के तौर पर चुना था। मौजूदा सेना प्रमुख रहील शरीफ 29 नवंबर को रिटायर होने वाले हैं। पाक मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ऐसे आर्मी चीफ को चुनना चाहते थे तो मिलिट्री एक्सपर्ट होने के साथ ही इस्लामिक राष्ट्र में लोकतंत्र का भी समर्थक हो। पाकिस्तान के करीब 7 दशकों के इतिहास में लगभग आधे समय तक सैन्य तानाशाहों का ही शासन रहा है।
एनबीटी की रिपोर्ट के मुताबिक, 'सेना प्रमुख की दावेदारी में चल रहे चारों जनरल मिलिट्री अकैडमी से एक ही दिन पास आउट हुए थे, लेकिन बाजवा को अनुभव अन्य जनरल्स की तुलना में बहुमुखी रहा है। जनरल बाजवा की क्षमता, विश्वसनीयता, अनुभव और सबसे बड़ी कोर के नेतृत्व करने के चलते उन्हें चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ के पद के लिए तवज्जो दी गई।' एक अन्य प्रमुख अखबार 'डॉन' ने लिखा, 'लोकतांत्रिक सरकार के साथ बेहतर रिश्ते बनाने का बाजवा का विचार उन्हें सेना प्रमुख का पद दिलाने के लिए निर्णायक साबित हुआ।' पाकिस्तान की सेना संख्या बल के हिसाब से दुनिया में छठे स्थान पर है।
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