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सपा में सुलह के लिए किसी के भी आगे हाथ जोड़ने को तैयार आजम

इन शर्तों पर आकर रूकी हैं सुलह की सारी कोशिशें।

सपा में सुलह के लिए किसी के भी आगे हाथ जोड़ने को तैयार आजम
लखनऊ. समाजवादी पार्टी में बीते हफ्ते से घमासान जारी है। पार्टी में जारी कलह का फिलहाल कोई हल निकलता नहीं दिख रहा है। दोनों ही खेमों की बातचीत अब शर्तों पर आकर टिक गई है। मंगलवार को मुलायम और अखिलेश ने 4 घंटे की लंबी मुलाकात की, लेकिन समाधान नहीं निकल पाया। मुलायम के घर पर अखिलेश के साथ शिवपाल यादव भी मौजूद रहे, लेकिन तीनों नेताओं ने सुलह पर चुप्पी साधी रखी। लखनऊ में करीब साढ़े तीन घंटे तक मुलायम, अखिलेश और शिवपाल यादव के बीच बातचीत होती रही, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला।
सूत्रों के मुताबिक, मुलायम सिंह ने अखिलेश से कई बार कही कि रामगोपाल यादव ने जो विशेष अधिवेशन बुलाया है वो गैर संवैधानिक है। इस पर अखिलेश का जवाब था कि नहीं, रामगोपाल चाचा का बुलाया अधिवेशन बिल्कुल सही है।
बुधवार को अखिलेश अपने समर्थकों के साथ बैठक करेंगे और विवाद खत्म करने को लेकर दोबारा मुलायम से भी मुलाकात कर सकते हैं। लेकिन इस बीच आजम खान ने दो फाड़ हो चुकी सपा में सुलह की कोशिशें तेज कर दी है। सुलह पर आजम खान ने कहा कि नेताजी बहुत पॉजिटिव और नरम हैं, वो चाहते हैं विवाद खत्म हो। मुलायम से मुलाकात के बाद आजम खान ने कहा है कि विवाद को खत्म करने के लिए जिसके भी हाथ-पैर जोड़ने होंगे वो जोड़ लूंगा।
तकरार जल्दी ही खत्म- आजम खान
पार्टी में जारी घमासान को सुलझाने के लिए आज़म खान ने मुलायम सिंह से मुलाकात की है। मिलने के बाद आजम खान का कहना है कि दोनों पक्षों में बातचीत चल रही है। तकरार जल्दी ही खत्म हो जाएगी। आज़म खान वैसे तो किसी के आगे जल्दी झुकते नहीं हैं, पर समाजवादी पार्टी में जारी तकरार को खत्म करने के लिए वो कुछ भी करने को तैयार हैं। इसके लिए चाहे किसी के भी आगे हाथ पैर ही क्यों ना जोड़ने पड़ें।
साइकिल पर कब्ज़े की लड़ाई तेज़
पार्टी पर कब्ज़े के अलावा एक लड़ाई उसके चुनाव चिन्ह को लेकर भी चल रही है। मुलायम के बाद अब रामगोपाल यादव ने भी चुनाव आयोग जाकर साइकिल पर अपना दावा ठोका है। रामगोपाल खेमे का कहना है कि 90 फीसदी विधायक अखिलेश के साथ हैं, इसलिए साइकिल पर उनका हक है। चुनाव आयोग दोनों पक्षों की ओर से दिए गए दस्तावेज़ों की जांच कर रहा है।
90 फीसदी विधायक हमारे साथ- रामगोपाल
मंगलवार को चुनाव आयोग से मुलाकात के बाद रामगोपाल यादव ने बताया कि हमने अपना पक्ष रखा। रामगोपाल यादव ने कहा कि हमारे साथ पार्टी के 90 फीसदी विधायक और 80 से 90 फीसदी डेलीगेट्स हैं। इसलिए असली समाजवादी पार्टी वो है जिसके अध्यक्ष अखिलेश यादव हैं। इसलिए अखिलेश यादव की अध्यक्षता वाली पार्टी को ही समाजवादी पार्टी माना जाए।
EC में मुलायम का पक्ष मजबूत
मुलायम सिंह यादव के करीबी सूत्र ने बताया है कि चुनाव आयोग में मुलायम का पक्ष मजबूत है, क्योंकि पार्टी से बाहर के सदस्यों द्वारा अधिवेशन बुलाना असंवैधानिक है। सिर्फ पार्टी अध्यक्ष ही अधिवेशन बुला सकता है। अखिलेश यादव और रामगोपाल यादव को एसपी में वापस लेने का निर्णय किसी पेपर पर नहीं लिया गया था। उनका निष्कासन वापस लिया जा सकता था, लेकिन उन्होंने अधिवेशन बुला लिया।
झगड़े की सुलह के बीच ये शर्तें
  1. मुलायम सिंह यादव राष्ट्रीय अध्यक्ष बने रहें, अखिलेश अपना दावा वापस ले लें।
  2. अखिलेश को प्रदेश अध्यक्ष की कमान वापस दे दी जाए और टिकट बंटवारे में उनकी अहम भूमिका रहे।
  3. शिवपाल यादव को दिल्ली में राष्ट्रीय महासचिव बनाकर राष्ट्रीय राजनीति में भेज दिया जाए।
  4. अमर और रामगोपाल को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाए।
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