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तम्बू में कब तक रहेंगे राम लला, देखिए कुछ चुनिंदा तस्वीरें

अयोध्या विवाद में बाबरी मस्जिद और राम मंदिर में किसकी होगी जीत इसका फैसला सुप्रीम कोर्ट 8 फरवरी को सुनाएगा क्योंकि राजीव गाँधी ने ही राम मंदिर का ताला खुलवाया था।

तम्बू में कब तक रहेंगे राम लला, देखिए कुछ चुनिंदा तस्वीरें

अयोध्या विवाद में बाबरी मस्जिद और राम मंदिर में किसकी होगी जीत इसका फैसला सुप्रीम कोर्ट में 8 फरवरी से शुरू हो रही सुनवाई के बाद आजायेगा।

हिन्दुओं की मान्यता है कि श्री राम का जन्म अयोध्या में हुआ था और उनके जन्मस्थान पर एक भव्य मन्दिर विराजमान था जिसे मुगल आक्रमणकारी बाबर ने तोड़कर वहां एक मसजिद बना दी।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी की अगुवाई में इस स्थान को मुक्त करने एवं वहाँ एक नया मन्दिर बनाने के लिये एक लम्बा आन्दोलन चला।

6 दिसम्बर 1992 को यह विवादित ढ़ांचा गिरा दिया गया और वहाँ श्री राम का एक अस्थायी मन्दिर निर्मित कर दिया गया।

1528 में राम जन्म भूमि पर मस्जिद बनाई गई थी। हिन्दुओं के पौराणिक ग्रन्थ रामायण और रामचरित मानस के अनुसार यहां भगवान राम का जन्म हुआ था।

1853 में हिन्दुओं और मुसलमानों के बीच इस जमीन को लेकर पहली बार विवाद हुआ।

1859 में अंग्रेजों ने विवाद को ध्यान में रखते हुए पूजा व नमाज के लिए मुसलमानों को अन्दर का हिस्सा और हिन्दुओं को बाहर का हिस्सा उपयोग में लाने को कहा।

1949 में अन्दर के हिस्से में भगवान राम की मूर्ति रखी गई। तनाव को बढ़ता देख सरकार ने इसके गेट में ताला लगा दिया।

1986 में जिला न्यायाधीश ने विवादित स्थल को हिंदुओं की पूजा के लिए खोलने का आदेश दिया। मुस्लिम समुदाय ने इसके विरोध में बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी गठित की।

इसके बाद 6 दिसम्बर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिराई गई। परिणामस्वरूप देशव्यापी दंगों में करीब दो हजार लोगों की जानें गईं।

उसके दस दिन बाद 13 दिसम्बर 1992 को लिब्रहान आयोग गठित किया गया। आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के सेवानिवृत मुख्य न्यायाधीश एम.एस. लिब्रहान को आयोग का अध्यक्ष बनाया गया।

इसके बाद अलाहबाद हाई कोर्ट में सुनवाई हुई और HC के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई जिसपर 8 फरवरी 2018 से सुनवाई शुरू होगी।

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