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अयोध्या राम जन्मभूमि मामला : समय बचाने के लिए 5 मार्च को सुप्रीम कोर्ट अहम फैसला देगा

अयोध्या राम जन्मभूमि मामले में आज मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली पांच सदस्यीय संविधानपीठ सुनवाई शुरू कर दी है। उम्मीद है कि कोर्ट कोर्ट यह तय कर दे कि नियमित सुनवाई होगी या नहीं। क्योंकि इस अयोध्या मामले की सुनवाई कई बार टल चुकी है।

अयोध्या राम जन्मभूमि मामला : समय बचाने के लिए 5 मार्च को सुप्रीम कोर्ट अहम फैसला देगा
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लाइव अपडेट

- सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि वह अगले मंगलवार को आदेश पारित करेगा कि क्या समय बचाने के लिए अदालत की निगरानी वाली मध्यस्थता के लिए मामला भेजा जाना चाहिए या नहीं।

अयोध्या राम जन्मभूमि मामले में आज मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली पांच सदस्यीय संविधानपीठ सुनवाई शुरू कर दी है। उम्मीद है कि कोर्ट कोर्ट यह तय कर दे कि नियमित सुनवाई होगी या नहीं। क्योंकि इस अयोध्या मामले की सुनवाई कई बार टल चुकी है।

लोकसभा चुनाव 2019 सर पर हैं और भाजपा पर राम मंदिर निर्माण को लेकर भारी दबाव है। ऐसे में सरकार कोई खतरा नहीं उठाना चाहती है। क्योंकि पिछले चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को साधु संतों का भारी बहुमत मिला था, इसलिए मोदी सरकार साधु-संतों की नाराजगी नहीं मोल लेना चाहती है।

सुब्रमणियन स्वामी शीघ्र सुनवाई का आग्रह

भाजपा नेता सुब्रमणियन स्वामी ने अयोध्या में विवादित राम मंदिर में पूजा के अपने मौलिक अधिकार पर अमल के लिये दायर याचिका पर शीघ्र सुनवाई का सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया। न्यायालय ने स्वामी से कहा कि वह अयोध्या मामलो की सुनवाई के दौरान मंगलवार को उपस्थित रहें। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ से स्वामी ने अनुरोध किया कि उनकी याचिका पर अलग से सुनवाई की जाए।

कोर्ट ने स्वामी से कहा कि...

इस पर पीठ ने स्वामी से कहा कि अयोध्या प्रकरण के मुख्य मामले की मंगलवार को सुनवाई होगी और वह इस दौरान न्यायालय में मौजूद रहें। शीर्ष अदालत ने पिछले साल स्वामी को अयोध्या भूमि विवाद मामले में हस्तक्षेप की अनुमति देने से इंकार कर दिया था और स्पष्ट किया था कि मूल पक्षकारों के अलावा किसी अन्य को इसमें पक्ष रखने की अनुमति नहीं दी जायेगी।

ये हैं स्वामी की दलील

हालांकि, पीठ ने स्वामी की इस दलील पर विचार किया था कि वह इस मामले में हस्तक्षेप का अनुरोध नहीं कर रहे हैं बल्कि उन्होंने तो अयोध्या में राम लला के जन्म स्थान पर पूजा करने के अपने मौलिक अधिकार को लागू कराने के लिये अलग से याचिका दायर की है। पीठ ने कहा कि चूंकि हम हस्तक्षेप की अनुमति नहीं दे रहे हैं, इसलिए स्वामी की याचिका पुनर्जीवित मानी जायेगी और इस पर उचित पीठ कानून के अनुसार विचार करेगी।

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ अयोध्या में विवादित स्थल को तीन पक्षकारों-सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला के बीच बराबर बराबर बांटने के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 2010 के फैसले के खिलाफ दायर 14 अपीलों पर 26 फरवरी को सुनवाई करेगी।

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