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अयोध्या-बाबरी केस: सुप्रीम कोर्ट ने दिया 5 दिसंबर तक का वक्त

शिया वक्फ बोर्ड ने 70 साल बाद 30 मार्च 1946 के ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी।

अयोध्या-बाबरी केस: सुप्रीम कोर्ट ने दिया 5 दिसंबर तक का वक्त

अयोध्या राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद विवाद पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई में आज कुछ निर्णय नहीं निकल पाया। बता दें कि सुन्नी वक्फ बोर्ड की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई फिलहाल 5 दिसंबर तक के लिए टाल दी।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने सुन्नी वक्फ बोर्ड द्वारा समय मांगने पर कोर्ट ने सुन्नी वक्फ बोर्ड को चार महीने का समय दिया है। सुन्नी वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट से दस्तावेजों के अनुवाद के लिए कुछ समय मांगा था। वक्फ बोर्ड ने कहा था कि कई दस्तावेज जो दूसरी भाषाओं में हैं, जिसक कारण अभी दस्तावेज का अनुवाद नहीं हो पाया है। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीफ 5 दिसंबर तक के लिए टाल दी।

बता दे कि अयोध्या राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में रोज सुनवाई होगी। लेकिन सुनवाई से पहले ही ही शिया वक्फ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में एफिडेविट (शपथ पत्र) दायर करके कहा है कि विवादित स्थल पर भगवान राम का मंदिर बनना चाहिए।

ता दें कि शिया वक्फ बोर्ड की तरफ से दायर शपथ पत्र में कहा गया है कि अगर विवादित जगह पर मंदिर और मस्जिद का निर्माण किया जाता है तो इससे लगातार संघर्ष की संभावना बनी रहेगी।

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इसलिए मस्जिद का निर्माण पास की ऐसी किसी जगह पर कराया जाना चाहिए जहां मुस्लिम आबादी अधिक हो, और विवाद स्थल से थोड़ा ही दूर होना चाहिए। यही नहीं एफिडेविट में यह भी कहा गया है कि अगर मंदिर और मस्जिद विवादित स्थल पर एक साथ बनते हैं तो यह हमेशा ही विवाद की वजह बना रहेगा।

बोर्ड ने कहा कि उसके पास 1946 तक विवादित जमीन का कब्जा था। साथ ही दावा किया गया था कि ब्रिटिश सरकार ने गलत तरीके से इस जमीन को सुन्नी वक्फ बोर्ड को ट्रांसफर कर दिया।

शिया वक्फ बोर्ड ने कहा कि वह विवाद स्थान पर के शांतिपूर्ण समाधान के पक्ष में है। बोर्ड ने कहा कि बाबरी मस्जिद बनवाने वाला मीर बकी भी शिया था। इसलिए, हाई कोर्ट के आदेश के मुताबिक एक तिहाई हिस्से पर हमारा हक है।

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