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मुसलमानों के लिए ''अयोध्या विवाद'' बहुविवाह से अधिक महत्वपूर्ण मुद्दा

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने श्याम बेनेगल और तीस्ता सीतलवाड़ जैसे कार्यकर्ताओं की ओर से संवेदनशील बाबरी मस्जिद-राम मंदिर भूमि विवाद केस में दखल देने की उम्मीदों पर पानी फेर दिया था।

मुसलमानों के लिए अयोध्या विवाद बहुविवाह से अधिक महत्वपूर्ण मुद्दा
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सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल कर कहा गया है कि मुसलमानों के लिए अयोध्या भूमि विवाद का मुद्दा बहुविवाह से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है। ऐसे में इस मामले को वृहद पीठ को सौंप दिया जाए।

आपको बता दें कि बहुविवाह के मामले को संवैधानिक बेंच को सौंपा गया है। वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन ने यह याचिका दाखिल की है, जो कोर्ट में एक मुस्लिम पार्टी का पक्ष रख रहे हैं।

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याचिका पर चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि बड़ी बेंच को केस ट्रांसफर करने का फैसला सभी पक्षों को सुनने के बाद लिया जाएगा।

धवन ने बेंच को बताया, अयोध्या भूमि विवाद मुसलमानों में बहुविवाह से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है और पूरा देश इस पर जवाब चाहता है। हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की विशेष पीठ के समक्ष कुल 14 अपीलें दाखिल की गई हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने केस में दखल देने की उम्मीदों पर फेरा था पानी

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने श्याम बेनेगल और तीस्ता सीतलवाड़ जैसे कार्यकर्ताओं की ओर से संवेदनशील बाबरी मस्जिद-राम मंदिर भूमि विवाद केस में दखल देने की उम्मीदों पर पानी फेर दिया था। सर्वोच्च अदालत ने साफ कहा है कि मूल मुकदमे के पक्षकारों को ही अपना तर्क रखने की अनुमति दी जाएगी।

आपको बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की 3 जजों की बेंच ने 2:1 के फैसले से 2010 में आदेश दिया था कि इस भूमि को तीनों पक्षों-सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला में बराबर-बराबर बांट दी जाए।

इनपुट- भाषा

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