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अयोध्या विवाद: केंद्र की SC में अर्जी, जमीन मूल मालिकों को लौटने की मांगी इजाजत

केंद्र सरकार ने इस अर्जी में कहा है कि उसने 2.77 एकड़ विवादित राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद स्थल के पास 67 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया था।

अयोध्या विवाद: केंद्र की SC में अर्जी, जमीन मूल मालिकों को लौटने की मांगी इजाजत
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लोकसभा चुनाव 2019 से ठीक पहले भाजपा सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। केंद्र सरकार ने अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगाई है। केंद्र सरकार ने इस अर्जी में कहा है कि उसने 2.77 एकड़ विवादित राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद स्थल के पास 67 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया था।

अब वह इस अतिरिक्त जमीन को उनके मूल मालिकों को लौटाने की अनुमति चाहता है। आवेदन में कहा गया है कि आवेदक (केंद्र) अयोध्या अधिनियम, 1993 के कुछ क्षेत्रों के अधिग्रहण के तहत अधिग्रहित भूमि को वापस करने, बहाल करने, सौंपने के अपने कर्तव्य को पूरा करने के लिए आवेदक ने न्यायालय की अनुमति के लिए यह आवेदन दाखिल कर रहा है।

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट के इस्माइल फारुकी मामले में फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि शीर्ष अदालत ने माना था कि अगर केंद्र अधिग्रहित की गई संपत्ति को उनके मूल मालिकों को लौटाना चाहे तो वह ऐसा कर सकता है। याचिका में कहा, इस अदालत की संविधान पीठ ने माना है कि 0.313 एकड़ के विवादित क्षेत्र के अलावा अतिरिक्त क्षेत्र अपने मूल मालिकों को वापस कर दिया जाए।

याचिका में कहा गया कि राम जन्मभूमि न्यास (राम मंदिर निर्माण को प्रोत्साहन देने वाला ट्रस्ट) ने 1991 में अधिग्रहित अतिरिक्त भूमि को मूल मालिकों को वापस दिए जाने की मांग की थी। उसने कहा कि एक पार्टी राम जन्मभूमि न्यास (जिसकी लगभग 42 एकड़ जमीन अधिग्रहित की गई है) ने इस अदालत के संविधान पीठ के फैसले पर भरोसा करते हुए एक आवेदन दायर किया है।

केन्द्र ने इस नई याचिका में 2003 के शीर्ष अदालत के फैसले में बदलाव की मांग की है। उस आदेश में न्यायालय ने अधिग्रहित भूमि पर यथा स्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था। याचिका में कहा, आवेदक इस न्यायालय से संविधान पीठ के फैसले में निर्धारित कर्तव्य के निर्वहन के लिये नवंबर, 2003 को दिए आदेश में उपयुक्त सुधार किया गया, वापस लिया जाये।

केन्द्र सरकार ने 1991 में विवादित स्थल के पास की 67 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया था। केन्द्र ने अपनी अर्जी में कहा है कि उसे जमीन को मूल मालिकों को लौटाने में कोई आपत्ति नहीं है।

क्या है मामला

गौरतलब है कि शीर्ष अदालत में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सितंबर 2010 के फैसले के खिलाफ 14 अपील लंबित हैं। उच्च न्यायालय ने 2.77 एकड़ भूमि को तीन पक्षों सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और रामलला के बीच बराबर-बराबर बांटने का आदेश दिया था।

टल गई सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को इस मामले की सुनवाई होने वाली थी। पांच सदस्यीय पीठ के सदस्य न्यायमूर्ति एसए बोबडे के उपलब्ध नहीं होने के कारण राजनीतिक रूप से संवेदनशील राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद की सुनवाई रविवार को रद्द कर दी थी।

योगी बोले- तुरंत मिले अनुमति

केंद्र सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट का रूख करने के फैसले का उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को स्वागत किया। योगी ने प्रयागराज में कहा, हमें गैर विवादित भूमि पर तत्काल कार्य करने की अनुमति मिलनी ही चाहिए। हम केंद्र सरकार की इस पहल का स्वागत करते हैं।

विवादित जमीन को नहीं छू रही सरकार

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि केंद्र विवादित जमीन को नहीं छू रही है। यह राम जन्मभूमि न्यास के उपर है कि वह लौटायी गई जमीन का क्या करती है, सरकार इसमें हस्तक्षेप नहीं करेगी।

2.77 एकड़ जमीन पर विवाद

अयोध्या में 2.77 एकड़ की जमीन पर राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद का विवाद है। रामलला अभी इसी जमीन पर विराजमान हैं। केंद्र ने अपनी अर्जी में कहा कि हमने 2.77 एकड़ की विवादित भूमि समेत कुल 67 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया था। अब हम अतिरिक्त जमीन उनके मूल मालिकों को लौटाने की अनुमति चाहते हैं और यथास्थिति बरकरार रखने के 2003 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले में बदलाव चाहते हैं।

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