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अयोध्या मामला: सुनवाई टली, भिड़े नेता- हिंदूवादी संगठनों ने सरकार पर बनाया अध्यादेश का प्रेशर

सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि मालिकाना हक विवाद मामले में दायर दीवानी अपीलों को अगले साल जनवरी 2019 के पहले हफ्ते में एक उचित पीठ के सामने सूचीबद्ध किया है जो सुनवाई की तारीख तय करेगी।

अयोध्या मामला: सुनवाई टली, भिड़े नेता- हिंदूवादी संगठनों ने सरकार पर बनाया अध्यादेश का प्रेशर
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सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि मालिकाना हक विवाद मामले में दायर दीवानी अपीलों को अगले साल जनवरी 2019 के पहले हफ्ते में एक उचित पीठ के सामने सूचीबद्ध किया है जो सुनवाई की तारीख तय करेगी। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई के नेतृत्व वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि उचित पीठ अगले साल जनवरी में सुनवाई की आगे की तारीख तय करेगी। पीठ के दो दूसरे सदस्यों में न्यायमूर्ति एस के कौल और न्यायमूर्ति के एम जोसफ शामिल थे।

सरकार पर अध्यादेश का प्रेशर

इस मामले को लेकर विश्व हिन्दू परिषद् (विहिप) ने सोमवार को कहा कि वह राम मंदिर के निर्माण के लिए अदालत के फैसले का अनंतकाल तक इंतजार नहीं कर सकती। साथ ही विहिप ने सरकार से राम मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करने के लिए कानून लाने की अपील भी की।

विहिप के कार्याध्यक्ष आलोक कुमार ने मोदी सरकार से संसद के शीतकालीन सत्र में इस विषय पर कानून बनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि पांच अक्टूबर को संतों की उच्चाधिकार समिति की बैठक हुई है जिसमें यह निर्णय हुआ कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का अनिश्चितकाल तक इंतजार नहीं किया जा सकता।

अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण

विहिप के कार्याध्यक्ष ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर मामले की सुनवाई को आगे बढ़ा दिया है । ऐसे में हमारे रूख को बल मिलता है कि राम मंदिर के निर्माण के लिये अनंत काल तक इंतजार नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि भगवान राम की जन्मभूमि अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण के लिये केंद्र सरकार कानून लाए।

कुमार ने कहा कि राम मंदिर के निर्माण के लिये जनमत बनाने की पहल करते हुए विहिप सभी राज्य के राज्यपालों को ज्ञापन दे रही है। इसके बाद नवंबर महीने में देश भर में विहिप कार्यकर्ता क्षेत्र की जनता के साथ अपने सांसदों एवं जनप्रतिनिधियों से मिलेंगे और राम मंदिर के निर्माण के लिये कानून बनाने पर जोर देंगे।

विहिप के कार्याध्यक्ष ने कहा कि दिसंबर माह में राम मंदिर के निर्माण के लिये देशभर के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर यज्ञ, पूजा और अनुष्ठान किया जायेगा। आलोक कुमार ने कहा कि इसके बाद हम प्रयाग में कुंभ के दौरान 31 जनवरी से फरवरी के पहले सप्ताह तक आयोजित होने वाली धर्म संसद में स्थिति की समीक्षा करेंगे और आगे की रणनीति तय करेंगे।

वाम ने भाजपा पर साधा निशाना

वहीं इस मामले में वामदलों ने अयोध्या मामला अदालत में विचाराधीन होने के बावजूद भाजपा नेताओं द्वारा राम मंदिर निर्माण के बारे में दिए जा रहे बयानों को अदालत की अवमानना बताते हुए सत्तापक्ष से कहा है कि उन्हें इस तरह के संवेदनशील मामलों में सिर्फ राजनैतिक हित साधने से बचते हुए संयमित रवैया अपनाना चाहिए।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्यसभा सदस्य डी राजा ने सोमवार को कहा कि अध्योध्या मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है और भाजपा नेताओं की ओर से मंदिर निर्माण के लिए अध्यादेश लाने जैसे भड़काऊ बयान दिये जा रहे हैं। राजा ने कहा कि ऐसे बयानों के पीछे भाजपा की मंशा महज राजनीतिक हित साधने की है।

भाजपा के अध्यादेश

भाजपा नेताओं को भी यह मालूम है कि मंदिर निर्माण के लिये अध्यादेश लाना संभव नहीं है। पार्टी महासचिव एस सुधाकर रेड्डी ने कहा कि भाजपा के अध्यादेश राज की भाकपा शुरु से ही विरोधी है। सत्तापक्ष को इस मामले में देश की शांति व्यवस्था भंग करने वाले बयान देने के बजाय अदालत के फैसले का इंतजार करना चाहिए।

ओवैसी का भाजपा पर हमला

AIMIM के प्रमुख असदउद्दीन ओवैसी ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि मैं भाजपा को चुनौती देता हूं कि वो अध्यादेश लाकर दिखाए। सरकार आपकी है। आप सत्ता में हैं, अध्यादेश लेकर दिखाएं। जबकि कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने भाजपा हर बार चुनाव से पहले राम मंदिर का मुद्दा उठाती है। हमें सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करना चाहिए।

गिरिराज सिंह का पलटवार

वहीं विपक्ष को आड़ेहाथ लेते हुए केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि राम मंदिर मुद्दे को लेकर हिंदुओं का धैर्य जवाब दे रहा है। 'श्रीराम' हिंदुओं की आस्था की आधारशिला हैं। किसी के धैर्य की अधिक परीक्षा नहीं लेनी चाहिए।

क्या है राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद

बता दें कि 1528-29 में मीर बाकी ने बाबर को खुश करने के लिए राम मंदिर को तोड़कर बाबरी मस्जिद का निर्माण करवाया था। जिसके प्रमाण पुरातत्व विभाग की खोदाई के दौरान मिले थे।

सन 1949 में भगवान राम की मूर्ति मस्जिद के अंदर देखी गई। जिसके बाद दोनों पक्षों में विवाद इतना बढ़ गया कि मस्जिद में ताला लगा दिया गया। 1989 में राजीव गांधी सरकार के आदेश के बाद ताला तोड़ दिया गया और बाबरी मस्जिद के पास राम मंदिर का शिलान्यास किया गया।

1959-1961 में दोनों पक्षकारों ने मालिकाना हक के लिए अपील दायर की। 1990 में लालकृष्ण आडवाणी ने रथयात्रा की शुरुआत की। 1991 में BJP सत्ता में आई। 6 दिसंबर 1992 के दिन अयोध्या पहुंचकर हजारों की संख्या में कार सेवकों ने विवादित ढांचे को गिरा दिया।

इसके बाद पूरे देश में सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे। प्रधानमंत्री पी.वी नरसिम्हा राव ने प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगा दिया। पुलिस के लाठीचार्ज और फायरिंग में कई लोगों ने अपनी जान गंवाई।

1994 में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने बाबरी मस्जिद को गिराए जाने के मामले की सुनवाई शुरू की। 4 मई 2001 को स्पेशल जज एसके शुक्ला ने भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी सहित 13 नेताओं को मस्जिद गिराने की साजिश के आरोप हटा लिए गए।

1 अप्रैल 2002 में इलाहाबाद हाई कोर्ट के तीन जजों की पीठ ने सुनवाई शुरू की। इसके बाद मामला नहीं सुलझा और याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई। 28 सितंबर 2010 को सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें विवादित मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के रोक की बात कही गई थी।

21 मार्च 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में आपसी सहमति से विवाद सुलझाने की बात कही। जिसपर कोई सहमति नहीं बनी और 20 जुलाई 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने राजीव धवन की अपील पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

बता दें कि इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ करीब 14 अपीलें दायर की गई हैं। चार दीवानी मुकदमों में फैसला सुनाया गया था। उच्च न्यायालय ने अयोध्या की 2.77 एकड़ जमीन को तीन पक्षों - सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला के बीच बराबर बराबर बांटने का फैसला सुनाया था।

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