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सावधान! हैकर्स की नजर आपके ATM कार्ड पर है

भारत में 2.20 लाख एटीएम मशीनों में से 70 फीसदी विंडो एक्सपी पर चल रही हैं।

सावधान! हैकर्स की नजर आपके ATM कार्ड पर है
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नई दिल्ली. नोटबंदी के ऐलान के बाद से लोगों को एटीएम की लंबी-लंबी लाइनों में खड़ा रहना पड़ रहा है। जिससे लोगों का जीवन कष्टदायक हो गया है।
इसके अलावा एटीएम हैकर्स का डेरा बनता जा रहा है। हैकर्स लोगों की पर्सनल जानकारी को चुराकर उनके पैसें निकाल रहे हैं। दो साल पहले कैश निकालने वाली मशीनें माइक्रोसॉफ्ट सॉफटवेयर पर चलती थी।
हाल ही में लोगों के एटीएम कार्ड डिटेल चोरी हुई थी। भारत में 2.20 लाख एटीएम में से 70 फीसदी मशीनें सिक्योरिटी अपडेट के लिए विंडो एक्सपी पर चल रही हैं। इनके लिए माइक्रोसॉफ्ट कोई सिक्यॉरिटी अपडेट, पैचेज या टेक्निकल सपॉर्ट नहीं देता है। माइक्रोसॉफ्ट 8 अप्रैल 2014 से ही ऐसी मदद बंद कर चुका है। ऐसे में आपके कार्ड डीटेल्स खतरे में हैं।
प्राइसवॉटरहाउसकूपर्स के पार्टनर और लीडर (फाइनैंशल टेक्नॉलजीज) विवेक बेलगावी ने कहा, 'एटीएम की प्रतिरोधक क्षमता कम है क्योंकि विंडोज एक्सपी के लिए माइक्रोसॉफ्ट अब कोई सपॉर्ट नहीं देती है। इसका मतलब किसी भी मैलवेयर से निपटने का कोई इंतजाम नहीं है। ऐसे एटीएम को हैकरों के हमले से निपटने के लिए अपग्रेड नहीं किया गया है।'
एटीएम लगाने वाली कंपनी एनसीआर का कहना है कि अपग्रेड करने का जिम्मा बैंकों पर है। एनसीआर इंडिया के एमडी नवरोज दस्तूर ने कहा, 'विंडोज एक्सपी को विंडोज 7 में अपग्रेड करने का जिम्मा बैंकों पर है। दुनियाभर में ऐसा ही होता है।' सिक्यॉरिटी सॉफ्टवेयर मुहैया कराने वाली कैस्पर्स्की लैब के एमडी अलताफ हालदे ने कहा, 'अनसपॉर्टेड विंडोज एक्सपी सिस्टम्स में हमने मैलवेयर पाए हैं। इंडिया में करीब 75% एटीएम में अनसपॉर्टेड विंडोज एक्सपी का उपयोग हो रहा है।'
इंडिया में अधिकतर एटीएम बैंकों के नहीं, बल्कि पेमेंट टेक्नॉलजी और सर्विसेज देने वाली कंपनियों के हैं। इनमें फाइनेंशल सॉफ्टवेयर ऐंड सिस्टम्स और एफआइएस ग्लोबल जैसी कंपनियां शामिल हैं। ये कंपनियां एनसीआर और डाइबॉल्ड से मशीनें खरीदती हैं, जो इस बिजनस में दो बड़ी वैश्विक कंपनियां हैं। चेन्नै की एफएसएस आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी और एसबीआई सहित 34 बैंकों की ओर से 40,000 एटीएम को मैनेज करती है। ग्लोबल कंपनी एनसीआर के पास इंडिया में 47% मार्केट शेयर है और उसके पास यहां 105,000 एटीएम हैं।
ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक, एफएसएस के प्रेजिडेंट (ट्रांजेक्शन प्रोसेसिंग ऐंड एटीएम सर्विसेज) वी बालासुब्रमण्यन ने कहा, 'भारत में ज्यादातर एटीएम पिछले चार वर्षों में लगाए गए हैं। एटीएम का रिफ्रेश साइकल 7-10 वर्षों का होता है। एटीएम लगाने वाली कंपनियां (एनसीआर और डाइबॉल्ड जैसी) हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर की गारंटी देती हैं, लेकिन अपग्रेड तो करना होगा।' वहीं, माइक्रोसॉफ्ट ने इस संबंध में टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
नए एटीएम को विंडोज 7 पर चलाया जा रहा है, न कि लेटेस्ट ऑपरेटिंग सिस्टम विंडोज 10 पर। विंडोज 7 पर सपॉर्ट साल 2020 में खत्म हो जाएगा। एनसीआर इंडिया के दस्तूर ने कहा, 'पिछले दो वर्षों में सभी नए एटीएम विंडोज 7 के साथ लगाए गए हैं। बैंक ऐसे उपाय कर रहे हैं, जिससे किसी भी तरह के जोखिम पर काबू पाया जा सके।' उन्होंने कहा कि आधे एटीएम विंडोज एक्सपी पर चल रहे हैं।
दुनियाभर में एटीएम को हर पांच साल में बदला जाता है और वे खुद-ब-खुद नए सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर पर शिफ्ट हो जाते हैं, लेकिन इंडिया में रिप्लेसमेंट में 10 साल तक लग जाते हैं। वहीं बैंक भी लागत को देखते हुए अपग्रेड पर ध्यान नहीं देते हैं।
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