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अटल बिहारी वाजपेयी 1990 से पहले ही बनना चाहते थे छत्तीसगढ़, ये थी वजह

छत्तीसगढ़ के स्वप्नदृष्टा एवं पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने 1990 से पहले ही तय कर लिया था कि उन्हें छत्तीसगढ़ राज्य बनाना है।

अटल बिहारी वाजपेयी 1990 से पहले ही बनना चाहते थे छत्तीसगढ़, ये थी वजह
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छत्तीसगढ़ के स्वप्नदृष्टा एवं पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने 1990 से पहले ही तय कर लिया था कि उन्हें छत्तीसगढ़ राज्य बनाना है। वे छत्तीसगढ़ के आदिवासियों, उनकी संस्कृति और यहां की वन संपदा से बेहद लगाव रखते थे। वे यहां के लोगों का आर्थिक और सामाजिक स्तर को ऊपर उठाना चाहते थे।

आपको बता दें कि प्रधानमंत्री बनने से पहले श्री वाजपेयी विभिन्न राज्यों के दौरे में जाते थे। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ का नंबर हर दो-तीन साल में एक बार आ ही जाता था। 1986-87 में जब अटल बिहारी वाजपेयी बस्तर दौरे में आए तो वहां के वनवासियों और वन संपदा को देखकर बहुत प्रभावित हुए। वे एक से डेढ़ दिन जंगलों में घूमते रहते थे।

उन्होंने तभी से मनसा बना ली थी कि छत्तीसगढ़ को अलग राज्य का दर्जा देना है, क्योंकि वे जब भी छत्तीसगढ़ दौरे पर आते हुए इस बात को हमेशा महसूस करते कि छत्तीसगढ़ में प्रचुर मात्रा में वन संपदा और संसाधन होने के बावजूद भी यहां के लोग अत्यंत ही पिछड़े हुए हैं। मध्य प्रदेश बड़ा राज्य होने के कारण छत्तीसगढ़ के लोगों का आर्थिक और सामाजिक रुप से समुचित विकास नहीं हो रहा है।

छत्तीसगढ़ एक स्वतंत्र राज्य बनने के बाद ही यहां के लोगों को अवसर का लाभ मिलेगा। जब प्रधानमंत्री बने तब सर्वदलीय बैठक में छत्तीसगढ़ की ओर से तत्कालीन केंद्रीय मंत्री रमेश बैस, तत्कालीन केंद्रीय मंत्री डॉक्टर रमन सिंह, पूर्व सांसद चंद्रशेखर साहू, बस्तर के कद्दावर नेता बलिराम कश्यप, छत्तीसगढ़ के कद्दावर नेता लखीराम अग्रवाल सहित 4-5 सांसद वाजपेई जी से मिले।

छत्तीसगढ़ के लोगों के आग्रह पर वाजपेयी जी ने छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के मसौदे को हरी झंडी दे दी। उनके मन में तो बात 1990 से पहले से थी और जब मौका मिला तब उन्होंने कर दिखाया। वाजपेयी जी ने प्रधानमंत्री सड़क योजना में एक महत्वपूर्ण संशोधन करते हुए बस्तर को विशेष लाभ दिलाया।

उस समय प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत 500 आबादी वाले गांव को मुख्य मार्ग से जोड़ने का लक्ष्य था। बस्तर के लिए उन्होंने संशोधन करते हुए ढाई सौ आबादी वाले गांव को भी उन्होंने मुख्य सड़क से जोड़ने का निर्देश दिए। इस प्रकार श्री वाजपेयी जी ने बस्तर की अधिकांश मुख्य मार्ग से जोड़ने ने में बड़ी भूमिका निभाई।

प्रधानमंत्री रहते हुए भी वह 2 दिन रायपुर में रुके

वाजपेयी जी प्रधानमंत्री रहते हुए चार बड़े कार्यक्रमों में छत्तीसगढ़ आए। इसमें प्रधानमंत्री रहते हुए 1998-99 में उन्होंने माना एयरपोर्ट का उद्घाटन किया। इसके बाद वे 2001-02 बिलासपुर में आयोजित किसान रैली को संबोधित करने आए फिर 2002 में राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक हुई, जिसमें वाजपेयी जी दो दिन तक छत्तीसगढ़ में रुके।

उस समय होटल बेबीलोन में बैठक हुई, तब वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री के इस बैठक में शामिल हुए थे। उस समय सभी भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री को बुलाया गया था। इसके बाद 2004 के लोकसभा चुनाव से पहले रायपुर के सप्रे शाला मैदान में आयोजित एक बड़ी सभा को संबोधित करने किया।

पद से हटने के बाद भी दो बार छत्तीसगढ़ आए

प्रधानमंत्री पद से हटने के बाद श्री वाजपेयी दो बार छत्तीसगढ़ के दौरे में आए। तत्कालीन महापौर सुनील सोनी के कार्यकाल में स्वामी विवेकानंद एवं श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा के अनावरण में श्री वाजपेई के कर कमलों से हुआ। श्री सोनी बताते हैं की 1983 वे जब दुर्गा कॉलेज के अध्यक्ष थे, तब भी श्री वाजपेयी छत्तीसगढ़ दौरे पर आए थे और मैं उनके कॉलेज भी आए थे।

उड़ीसा प्रवास पर चंद्रशेखर को साथ ले गए थे

पूर्व सांसद एवं पूर्व कृषि मंत्री चंद्रशेखर साहू उनके बेहद करीबी लोगों में से एक रहे हैं वे बताते हैं श्री वाजपेयी अक्सर दो-तीन सालों मे अक्सर छत्तीसगढ़ प्रवास पर आते थे। वे हमेशा इस बात को महसूस करते थे कि छत्तीसगढ़ को समुचित विकास तभी होगा। जब छत्तीसगढ़ अलग से राज्य बनेगा।

उन्होंने बताया जब 1995 में उड़ीसा चुनाव था तब भी यहां आए 2 दिन रूके और उनको साथ लेकर गए थे। संगठन में उन के कार्य करने की क्षमता गजब की थी। श्री साहू बताते हैं वे सभी दल के नेता और सभी विचारधाराओं के लोगों से आसानी से मिल लेते थे और सामंजस्य भी बना लेते हो।

पहुना में गिर गया था पंखा

भाजपा राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में 2002 श्री वाजपेयी जी जब रायपुर आए तब राजकीय अतिथि गृह पहुना नया बना था। वही श्री वाजपेयी जी ठहरे थे। तब ऊपर से एक पंखा उनके शयन कक्ष में गिर गया था, उस समय दो इंजीनियर को सस्पेंड कर दिया गया था।

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