Hari bhoomi hindi news chhattisgarh
Breaking

अटल बिहारी वाजपेयी जयंती : पोखरण की वो रात कोई नहीं भूल सकता

यथा नाम तथा गुण मतलब जैसा नाम वैसा ही काम। अगर हम यह बात न कहकर सिर्फ अटल बिहारी वाजपेयी कह दें तो शायद कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी अपने नाम की ही तरह अपने फैसलों पर भी ''अटल'' रहे हैं।

अटल बिहारी वाजपेयी जयंती : पोखरण की वो रात कोई नहीं भूल सकता
यथा नाम तथा गुण मतलब जैसा नाम वैसा ही काम। अगर हम यह बात न कहकर सिर्फ अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee) कह दें तो शायद कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी अपने नाम की ही तरह अपने फैसलों पर भी 'अटल' रहे हैं। वह तीन बार भारत के प्रधानमंत्री के रूप में देश की सेवा कर चुके हैं। आज हम आपको बता रहे हैं। अटल बिहारी वाजपेयी के बारे में जिनसे आप मान जाएंगे कि वह नाम की ही तरह अटल थे।

अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर में हुआ था। वाजपेयी जी पहली बार 16 मई से 1 जून 1996 तक देश के प्रधानमंत्री रहे। बाद में वह 19 मार्च 1998 से लेकर 22 मई 2004 तक भारत के प्रधानमंत्री के रूप में रहे। जनसंघ के संस्थापकों में से एक अटल बिहारी वाजपेयी 1968 से 1973 तक जनसंघ के अध्यक्ष रहे।

जानिए हनुमान जी के बारे में क्या कहना था अटल जी का

इतना ही नहीं उन्होंने अखबार निकालने का काम भी किया। वह हमेशा अखबार को निकानले में होने वाली कठिनाइयों पर चर्चा किया करते थे। वह कहते थे कि अखबार को हमेशा खरीदकर पढ़ना चाहिए जिससे अखबार के लोगों की आय हो। मांग कर अखबार नहीं पढ़ना चाहिए।
अगर मांग कर खाना नहीं पसंद करते तो फिर मांग कर पढ़ना क्यों चाहिए। उन्होंने राष्‍ट्रधर्म, पाञ्चजन्य और वीर अर्जुन जैसी पत्र पत्रिकाओं का संपादन भी किया है। चार दशकों तक वह भारतीय संसद के सदस्य रहे। उन्होंने लखनऊ के सांसद के रूप में भी काम किया।
वह सबसे पहली बार बलरामपुर से सांसद चुने गए थे। वह पहले ऐसे गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री थे जिन्होंने बिना किसी अड़चन के अपना 5 साल का कार्यकाल पूरा किया। 2005 में उन्होंने राजनिति से सन्यास ले लिया। एक लंबी बीमारी के बाद 16 अगस्त 2018 को AIIMS में उनका निधन हो गया।

अटल ने भारत को किया परमाणु शक्ति से लैस

अटल बिहारी वाजपेयी के समय में परमाणु परीक्षण किया गया था। जिसके बाद भारत एक परमाणु शक्ति वाला राष्ट्र बना। कई भाषाओं का ज्ञान रखने वाले अटल बिहारी वाजपेयी के ऐसा फैसला लेना बड़ा ही मुश्किल था। क्योंकि उस समय देश में कोई भी सरकार स्थिर नहीं थी।

अटला बिहारी वाजपेयी की पत्नी : जानें वायरल झूट का सच

और अमेरिका नहीं चाहता था कि कोई और देश परमाणु परीक्षण करे, खासकर भारत। इसी लिए वह भारत पर सैटेलाइट से निगरानी कर रहा था। पड़ोसी देश चीन परमाणु शक्ति से लैस राष्ट्र था। पाकिस्तान के पास परमाणु बम तो नहीं था लेकिन इस बात का खतरा बना हुआ था कि शायद पाकिस्तान परमाणु बम का परीक्षण कर ले।

इसी खतरे को भांपते हुए वाजपेयी जी ने देश को परमाणु शक्ति से ताकतवर बनाने का फैसला किया। उन्हें पता था कि अगर परमाणु बम का परीक्षण किया जाता है तो ढेर सारे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगा दिए जाएंगे। फिर भी अटल बिहारी वाजपेयी ने ऐसा फैसला लिया जो देश हित में था।

वैज्ञानिकों की एक पूरी टीम ने मिलकर परमाणु परीक्षण को सफल बनवाया। 11 मई 1998 को पहला परमाणु परीक्षण किया गया। जिसके बाद यह पता चल गया भारत अब परमाणु राष्ट्र की श्रेणी में आ गया है। अमेरिका को इस बात का भी बेहद अफसोस था कि 24 घंटे की सैटेलाइट निगरानी के बाद भी भारत ने उसकी नाक के नीचे परमाणु बम का विस्फोट किया।

'अटल बिहारी वाजपेयी' के 10 अनमोल विचार, जो बदल देंगे आपका पूरा जीवन

आलोचनाओं और प्रतिबंधों से न घबराते हुए अटल बिहारी वाजपेयी ने दो दिन बाद फिर से परमाणु परीक्षण करवाया। इस परीक्षण की सबसे कड़ी प्रतिक्रिया पाकिस्तान ने की। पाकिस्तान ने यह तक कह दिया कि दक्षिण एशिया में अब परमाणु हथियारों का टेस्ट तेजी से होगा और इसके लिए सिर्फ भारत जिम्मेदार होगा।

परमाणु परीक्षण के बाद भारत पर विदेशी प्रतिबंध लगने लगे। चीन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भारत पर परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर और परमाणु शस्त्रागार को समाप्त करने के लिए दबाव डाला। विदेशों में ही नहीं देश में भी इस परीक्षण की आलोचना की गई। सदन में इस मामले पर विपक्ष ने जमकर आलोचना की।

जिस पर अटल बिहारी वाजपेयी ने एक जबरदस्त भाषण देते हुए जवाब दिया। उन्होंने कहा कि वह अंतरराष्ट्रीय दबावों से डरने वाले नहीं हैं। अधिकांश राष्ट्रों ने भारत के खिलाफ निर्यात और आयात के सकल घरेलू उत्पाद पर प्रतिबंध नहीं लगाया।

अटल अपने फैसले पर अटल रहे इसी लिए अमेरिका ने भी अपने प्रतिबंधों को कुछ समय बाद हटा लिया। अटल जी ने कहा कि वह किसी भी कीमत पर परमाणु हथियारों का उपयोग युद्ध में पहले नहीं करेंगे। किसी भी ऐसे राष्ट्र पर नहीं करेंगे जिसके पास परमाणु हथियार नहीं हैं।

Share it
Top