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अटल मृत्यु से हार गए वाजपेयी

भारतीय राजनीति के करिश्माई नेता पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का लम्बी बीमारी के बाद आज यहां अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स में निधन हो गया।

अटल मृत्यु से हार गए वाजपेयी

भारतीय राजनीति के करिश्माई नेता पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का लम्बी बीमारी के बाद आज यहां अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स में निधन हो गया। उन्होंने संकट के कई अवसरों पर देश को नेतृत्व प्रदान किया और समावेशी राजनीति को आगे बढ़ाते हुए बखूबी गठबंधन सरकार चलायी। वह 93 वर्ष के थे। उनकी दत्तक पुत्री नमिता कौल भट्टाचार्या हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री के निधन की जानकारी देते हुए एम्स के मीडिया एवं प्रोटोकाल डिविजन की अध्यक्ष प्रो. आरती विज ने दी। उन्होंने एक विज्ञप्ति में कहा कि गहरे शोक के साथ हम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन की सूचना दे रहे हैं। एम्स के अनुसार पूर्व प्रधानमंत्री का निधन आज शाम पांच बजकर पांच मिनट पर हुआ।
विज्ञप्ति में कहा गया है कि वाजपेयी को 11 जून 2018 को एम्स में भर्ती कराया गया था और डाक्टरों की निगरानी में पिछले नौ सप्ताह से उनकी हालत स्थिर बनी हुई थी। एम्स के अनुसार, दुर्भाग्यवश, उनकी स्थिति पिछले 36 घंटों में बिगड़ी और उन्हें जीवन रक्षक प्रणाली पर रखा गया। हमारे सर्वश्रेष्ठ प्रयासों के बावजूद आज हमने उन्हें खो दिया। एम्स ने कहा कि हम पूरे देश को हुई इस अपूरणीय क्षति एवं दुख में शरीक हैं।
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने वाजपेयी के निधन पर शोक प्रकट करते हुए कहा कि सौम्यता की महान मूर्ति अटलजी की कमी सभी को खलेगी । उपराष्ट्रपति एम वैंकेया नायडू ने वाजपेयी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया और उनके निधन को देश के लिये अपूरणीय क्षति बताया। नायडू ने अपने शोक संदेश में कहा कि यह समाचार बेहद दुखद है कि अटल जी नहीं रहे।
मैं आज सुबह ही उनकी सेहत की जानकारी लेने के लिये एम्स गया था। मैं सोच भी नहीं सकता हूं कि यह दुखद समाचार इतनी जल्दी मिलेगा।'' प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वाजपेयी के निधन को अपूरणीय क्षति बताते हुए कहा कि उन्होंने जीवन का प्रत्येक पल राष्ट्र को समर्पित कर दिया था और उनका जाना, एक युग का अंत है।
मोदी ने कहा कि मैं नि:शब्द हूं, शून्य में हूं, लेकिन भावनाओं का ज्वार उमड़ रहा है। हम सभी के श्रद्धेय अटल जी हमारे बीच नहीं रहे। अपने जीवन का प्रत्येक पल उन्होंने राष्ट्र को समर्पित कर दिया था। उनका जाना, एक युग का अंत है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पूर्व प्रधानमंत्री के निधन पर शोक प्रकट करते हुए कहा कि आज भारत ने अपना एक महान सपूत खो दिया।
वाजपेयी जी को करोड़ों लोग स्नेह और सम्मान देते थे। मेरी संवेदनाएं उनके परिवार एवं चाहने वालों के साथ हैं। हम उनकी कमी महसूस करेंगे। पूर्व उपप्रधानमंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि 65 वर्षो का साथ छूट गया। अटल जी को केंद्र में पहली स्थिर और गैर कांग्रेसी सरकार के अगुवा के रूप में याद किया जायेगा।
मुझे छह साल तक उनके ‘डिप्टी' के तौर पर काम करने का विशेष अधिकार मिला। वरिष्ठ के रूप में हमेशा मुझे हर संभव तरीके से प्रोत्साहित किया। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर दुख जताते हुए आज कहा कि राष्ट्र के प्रति वाजपेयी की सेवाओं को लंबे समय तक याद किया जाएगा।
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि वे एक शानदार वक्ता, कवि और देशभक्त थे जिनका निधन देश के लिए अपूरणीय क्षति है । अटल बिहारी वाजपेयी ने 1947 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आरएसएस के पूर्णकालिक प्रचारक बने। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी कुल मिलाकर 47 साल तक संसद के सदस्य रहे।
वह 10 बार लोकसभा और दो बार राज्यसभा के लिये चुने गए। भाषाओं, विचारधाराओं और संस्कृतियों के भेद से परे एक कद्दावर और यथार्थवादी करिश्माई राजनेता, वाजपेयी एक प्रबुद्ध वक्ता और शांति के उपासक होने के साथ साथ हरदिल अजीज और मंझे हुए राजनीतिज्ञ भी थे। 1996 में केंद्र की सत्ता में भाजपा की ताजपोशी वाजपेयी की कमान में ही हुयी थी।
हालांकि यह सत्ता मात्र 13 दिन की थी। वाजपेयी के करिश्माई व्यक्तित्व के बल पर ही भाजपा के नेतृत्व वाली गठबंधन की सरकार 1998 में फिर सत्ता में लौटी और इस बार 13 महीने में सरकार अविश्वास प्रस्ताव की अग्नि परीक्षा को पास नहीं कर पायी और गिर गयी। अक्तूबर 1999 में बनी भाजपा की अगली सरकार ने उनके नेतृत्व में अपना कार्यकाल पूरा किया।

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