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अटल बिहारी वाजपेयी जीवनी : बिना शादी के ऐसे एक लड़की के पिता बनें अटल बिहारी वाजपेयी

भारत रत्न और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का आज 95 वां जन्म दिवस है। अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर 1924 में मध्य प्रदेश के ग्वालियर के एक छोटे से गांव में हुआ था।

अटल बिहारी वाजपेयी जीवनी : बिना शादी के ऐसे एक लड़की के पिता बनें अटल बिहारी वाजपेयी

भारत रत्न और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का आज 95 वां जन्म दिवस है। अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर 1924 में मध्य प्रदेश के ग्वालियर के एक छोटे से गांव में हुआ था। देश की राजनीति में सक्रीय रहे अटल बिहारी वाजपेयी एक अच्छे नेता होने के साथ-साथ वे एक पत्रकार और कवि भी थे। वे कविता के जरिए हर बात को बेबाक अंदाज से कह दिया करते थे। आईए जानते हैं अटल बिहारी वाजपेयी से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें..

अटल बिहारी वाजपेयी की जीवनी (Atal Bihari Vajpayee Biography In Hindi)

अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर 1924 में मध्य प्रदेश के ग्वालियर के एक छोटे से गांव में हुआ था। साधारण परिवार में जन्मे अटल बिहारी वाजपेयी के पिता कृष्ण बिहारी वाजपेयी अध्यापक थे और साथ ही वे महान कवि भी थे। जिसके चलते अटल बिहारी वाजपेयी को कवित्व का गुण अपने पिता से विरासत में मिला था।

अटल बिहारी वाजपेयी की प्रारंभिक शिक्षा ग्वालियर के ही विक्टोरिया (लक्ष्मीबाई ) कॉलेज और कानपुर के डीएवी कॉलेज में हुई थी। अटल बिहारी वाजपेयी ने राजनीतिक विज्ञान में स्नातकोत्तर किया था। अटल बिहारी वाजपेयी छात्र जीवन से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक बने और तभी से राष्ट्रीय स्तर की वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में भाग लेते रहे। तीन बार भारत के प्रधानमंत्री रहे अटल बिहारी वाजपेयी का 16 अगस्त 2018 को दिल्ली के एम्स में हो गया था।

अटल बिहारी वाजपेयी का राजनीतिक जीवन (Atal Bihari Vajpayee Political Career)

अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने राजनीति जीवन की शुरुआत 1942 में उस समय की थी जब भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान उनके भाई 23 दिनों के लिए जेल गए। सन् 1951 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सहयोग से भारतीय जनसंघ पार्टी का गठन हुआ था। उस दौरान अटल बिहारी वाजपेयी की भूमिका श्‍यामाप्रसाद मुखर्जी जैसे नेताओं के साथ रही। अटल बिहारी वाजपेयी 1968 से 1973 तक भारतीय जनसंघ पार्टी के अध्यक्ष भी रहे।

अटल बिहारी वाजपेयी ने 1955 में पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें इस चुनाव में सफलता हासिल नहीं हुई। 1957 में अटल बिहारी वाजपेयी को जनसंघ ने उत्तर प्रदेश के लखनऊ, मथुरा और बलरामपुर से लड़ाया। लेकिन वे लखनऊ और मथुरा से चुनाव हार गए और बलरामपुर सीट से चुनाव जीतकर लोकसभा में पहुंचे।

अटल बिहारी वाजपेयी मोरारजी देसाई की सरकार में सन् 1977 से 1979 तक विदेश मन्त्री रहे और विदेशों में भारत की छवि बनायी। लेकिन 1980 में अटल बिहारी वाजपेयी ने जनता पार्टी से नाखुश होकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की स्थापना की। अटल बिहारी वाजपेयी 6 अप्रैल 1980 को भाजपा के अध्यक्ष बने।

अटल बिहारी वाजपेयी दो बार राज्यसभा के लिये भी निर्वाचित हुए। अटल बिहारी वाजपेयी ने 16 मई से 1 जून तक 1996 को प्रधानमंत्री के रूप में देश की बागडोर संभाली।

इसके बाद अटल बिहारी वाजपेयी ने 19 मार्च 1998 से 10 अक्टूबर 1999 तक प्रधानमंत्री के रूप में देश की बागडोर संभाली। फिर इसके बाद 10 अक्टूबर 1999 से 2004 तक देश की बागडोर संभाली।

2004 से ही अटल बिहारी वाजपेयी ने शारिरिक अस्वस्थता के कारण सक्रिय राजनीति से सन्यास ले लिया। लंबी बीमारी के चलते अटल बिहारी वाजपेयी का 16 अगस्त 2018 को दिल्ली के एम्स में हो गया था।

जानकारी के लिए आपको बता दें कि अटल बिहारी वाजपेयी इकलौते नेता थे जिन्होंने उत्तर प्रदेश के लखनऊ और बलरामपुर, गुजरात के गांधीनगर, मध्यप्रदेश के ग्वालियर और विदिशा और दिल्ली की नई दिल्ली संसदीय सीट से चुनाव जीता था।

अटल बिहारी वाजपेयी की प्रमुख रचनाएं

* मृत्यु या हत्या

* रग-रग हिन्दू मेरा परिचय

* कैदी कविराय की कुण्डलियाँ

* संसद में तीन दशक

* अमर आग है

* राजनीति की रपटीली राहें

* बिन्दु बिन्दु विचार, इत्यादि।

* मेरी इक्यावन कविताएँ

* अमर बलिदान (लोक सभा में अटल जी के वक्तव्यों का संग्रह)

* कुछ लेख: कुछ भाषण

* सेक्युलर वाद

पुरस्कार

1992 : पद्म विभूषण

1993 : डी लिट (कानपुर विश्वविद्यालय)

1994 : लोकमान्य तिलक पुरस्कार

1994 : श्रेष्ठ सासंद पुरस्कार

1914 : भारत रत्न पंडित गोविंद वल्लभ पंत पुरस्कार

2015 : डी लिट (मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय)

2015 : 'फ्रेंड्स ऑफ बांग्लादेश लिबरेशन वार अवॉर्ड', (बांग्लादेश सरकार द्वारा प्रदत्त)

2015 : भारतरत्न से सम्मानित

अटल बिहारी वाजपेयी की कविता

जो कल थे,

वे आज नहीं हैं।

जो आज हैं,

वे कल नहीं होंगे।

होने, न होने का क्रम,

इसी तरह चलता रहेगा,

हम हैं, हम रहेंगे,

यह भ्रम भी सदा पलता रहेगा।

सत्य क्या है?

होना या न होना?

या दोनों ही सत्य हैं?

जो है, उसका होना सत्य है,

जो नहीं है, उसका न होना सत्य है।

मुझे लगता है कि

होना-न-होना एक ही सत्य के

दो आयाम हैं,

शेष सब समझ का फेर,

बुद्धि के व्यायाम हैं।

किन्तु न होने के बाद क्या होता है,

यह प्रश्न अनुत्तरित है।

प्रत्येक नया नचिकेता,

इस प्रश्न की खोज में लगा है।

सभी साधकों को इस प्रश्न ने ठगा है।

शायद यह प्रश्न, प्रश्न ही रहेगा।

यदि कुछ प्रश्न अनुत्तरित रहें

तो इसमें बुराई क्या है?

हां, खोज का सिलसिला न रुके,

धर्म की अनुभूति,

विज्ञान का अनुसंधान,

एक दिन, अवश्य ही

रुद्ध द्वार खोलेगा।

प्रश्न पूछने के बजाय

यक्ष स्वयं उत्तर बोलेगा।

अटल बिहारी वाजपेयी का व्यक्तिगत जीवन

अटल बिहारी वाजपेयी अपने पूरे जीवन अविवाहित रहे। अटल बिहारी वाजपेयी ने दोस्त राजकुमारी कौल और बी.एन. कौल की बेटी नमिता भट्टाचार्य को दत्तक पुत्री के रूप में स्वीकार किया था। अटल बिहारी वाजपेयी के साथ नमिता और उनके पति रंजन भट्टाचार्य रहते थे।

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