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एसोचैम ने जताई आशंका, ''ट्रेडवॉर'' का होगा भारत पर बुरा असर

वाणिज्य एवं उद्योग संगठन एसोचैम ने रविवार को कहा कि यदि वैश्विक व्यापार युद्ध आगे खिंचता है और इसका फैलाव हुआ तो इसका असर भारतीय अर्थव्यवस्था विशेषकर निर्यात पर पड़ सकता है।

एसोचैम ने जताई आशंका, ट्रेडवॉर का होगा भारत पर बुरा असर
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वाणिज्य एवं उद्योग संगठन एसोचैम ने रविवार को कहा कि यदि वैश्विक व्यापार युद्ध आगे खिंचता है और इसका फैलाव हुआ तो इसका असर भारतीय अर्थव्यवस्था विशेषकर निर्यात पर पड़ सकता है।

एसोचैम ने यहां जारी वक्तव्य में कहा, ‘यदि दुनिया के देशों में शुल्क युद्ध आगे चलकर पूरी तरह से वैश्विक व्यापार युद्ध में तब्दील हो जाता है तो, इसका भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी व्यापक असर पड़ सकता है। इससे देश का निर्यात प्रभावित होगा, चालू खाता घाटे पर दबाव बढ़ेगा और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि गति धीमी पड़ सकती है।’

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कारोबारी धारणा पर प्रतिकूल असर

संगठन ने कहा कि अमेरिका द्वारा उठाए जा रहे कदमों से सीधे भारत पर कोई असर नहीं होगा लेकिन इसका कुल मिलाकर कारोबारी धारणा पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। उसने कहा, ‘यदि भारत अपने आयात पर प्रतिक्रियात्मक कदम उठाने का निर्णय लेता है तब भी हमारा निर्यात अधिक प्रभावित होगा क्योंकि विदेशी मुद्रा विनिमय की दरों में घटबढ़ तेज होगी।’

बाजार का विश्वास कमजोर हुआ तो निवेशक भागेंगे

एसोचैम ने सरकार को वैकल्पिक योजना बनाने का सुझाव देते हुए कहा कि इसमें मुख्य व्यापारिक भागीदारों के साथ द्विपक्षीय व्यापार को और खुला बनाया जाना होना चाहिए ताकि देश को संरक्षणवादी उपायों के प्रभाव से बचाया जा सके।

इसमें आगे कहा गया है कि यदि बाजार का विश्वास कमजोर हुआ तो पोर्टफोलियो निवेशक निकासी करने लगेंगे जिसका डालर दरों पर दबाव बढ़ सकता है।

व्यापार बढ़ाने पर चर्चा करेंगे भारत-चीन

भारत और चीन के व्यापार मंत्री तथा वरिष्ठ अधिकारी सोमवार को यहां संयुक्त आर्थिक समूह की बैठक में दोतरफा व्यापार एवं वाणिज्य को बढ़ावा देने एवं व्यापार घाटा कम करने के तरीकों पर चर्चा करेंगे।

इस बैठक का महत्व इस कारण बढ़ जाता है कि भारत ने लगातार चीन के साथ भारी व्यापार असंतुलन का मुद्दा उठाया है और दवा, कृषि उत्पाद एवं सूचना प्रौद्योगिकी सेवाओं जैसे क्षेत्रों में भारतीय निर्यात बढ़ाने की दिशा में कदम उठाने को कहा है।

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दोनों देशों में व्यापार असंतुलन बढ़ता जा रहा

एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु अपने चीनी समकक्ष झोंग शान के साथ ‘ भारत- चीन व्यापार असंतुलन को कैसे दूर करें’ पर संयुक्त आर्थिक समूह की बैठक में चर्चा करेंगे। बाजार की पहुंच से जुड़े मुद्दों तथा अन्य गैर- व्यापारिक अड़चनों के अलावा निवेश संबंधी मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है।

व्यापार घाटा 36.73 अरब डालर रहा

चालू वित्त वर्ष में अप्रैल- अक्टूबर अवधि में चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा 36.73 अरब डॉलर रहा है।

भारत में दूरसंचार एवं विद्युत जैसे विस्तार करते क्षेत्रों में तैयार वस्तुओं की मांग पूरा करने में चीन के ऊपर निर्भरता इस व्यापार घाटे का मुख्य कारण है। प्रभु ने हाल ही में कहा था कि भारत चीन के साथ व्यापार घाटा कम करने के तरीकों पर चर्चा को तैयार है।

(भाषा- इनपुट)

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