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विधानसभा चुनाव 2018/ इन तीन राज्यों के नतीजे तय करेंगे एनडीए का भविष्य

सत्ता का सेमी फाइनल मानकर पांच राज्यों के विधानसभा में उतरी भाजपा के लिए तीन राज्यों के चुनाव परिणाम बेहद अहम होने जा रहे हैं, यहां अभी भाजपा सत्ता में है। इनके नतीजे तय कर देगे की एनडीए एकजुट रहेगा या नहीं।

विधानसभा चुनाव 2018/ इन तीन राज्यों के नतीजे तय करेंगे एनडीए का भविष्य
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सत्ता का सेमी फाइनल मानकर पांच राज्यों के विधानसभा में उतरी भाजपा के लिए तीन राज्यों मध्यप्रदेश,छत्तीसगढ़ और राजस्थान के चुनाव बेहद अहम होने जा रहे हैं,जहां वह अभी सत्ता में है। इनके नतीजे तय कर देगे की भाजपानीत एनडीए का कुनबा एक रहेगा या आखें तरेर रहे सहयोगी दल अलग राह ले लेंगे।

राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा आम है कि अगर चुनाव परिणाम अनुकूल नहीं रहे और अपने कब्जे वाले तीन राज्यों को बचाने में भाजपा कामयाब नहीं हुई तो उसे एनडीए के अपने मौजूदा यहयोगियों को गठबंधन में बनाए रखना आसान नहीं होगा।

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सबसे पहले उपेंद्र कुशवाहा की अगुवाई वाली रालोसपा किनारा कसेगी जो बिहार में सीटों के बटवारे को लेकर पहले से नाराज है और कई दफा अलग होने का संकेत भी दे चुकी है। उपेंद्र कुशवाहा फिलहाल केंद्र की मोदी सरकार में मानव संसाधन राज्य मंत्री हैं।

एक अन्य सहयोगी रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया है,इसके मुखिया रामदास आठवले लगभग चार साल तक भाजपा के सबसे बड़े समर्थको में रहे और अभी भी केंद्र में राज्य मंत्री हैं। लेकिन चुनावी साल में वे भी पैतरा दे रहें हैं और कह चुकें हैं कि वे अभी तय करेंगे कि 2019 में एनडीए में रहेंगे अथवा नहीं।

शिवसेना का रवैया भी भाजपा के लिए शुरू से ही असहज करने वाला रहा है। आए दिन सरकार से हटने की धमकी देने वाली सेना अभी तो मौन है,लेकिन तीन राज्यों के चुनाव परिणामों पर उसकी भी नजर है।

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माना जा रहा है कि अगर नतीजे भाजपा के खिलाफ गए तो शिवसेना भी दबाव बढ़ा देगी। एनडीए से बाहर होगी या नहीं लेकिन सीटों के तालमेल को लेकर उसका मोल भाव जरूर बढ़ जाएगा। वहीं उत्तरप्रदेश में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी भी बगावत पर उतारू है।

पार्टी अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर भले ही योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। लेकिन आए दिन सरकार के लिए असहज स्थित पैदा करते रहते हैं। प्रतिकूल परिणाम के बाद उनके विरोध का स्वर और मुखर हो जाएगा। हालांकि भाजपा और उसका शीर्ष नेतृत्व इस हालात से पूरी तरह वाकिफ है।

अमित शाह खुद कह चुके हैं कि ये विधानसभा चुनाव आगामी लोकसभा की दिशा तय कर देंगे। इससे निपटने के लिए पार्टी ने अपनी पूरी ताकत भी झोंक रखी है। लेकिन असल तस्वीर तो 11 दिसम्बर के चुनाव परिणाम ही तय करेंगे।

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