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मोदी मैजिक के बाद कुर्सी बचाने वाले चौथे सीएम बने केसीआर

छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान विधानसभा चुनाव में बीजेपी की हार और मिजोरम में कांग्रेस की हार सत्ताविरोधी लहर का नतीजा है।

मोदी मैजिक के बाद कुर्सी बचाने वाले चौथे सीएम बने केसीआर

छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान विधानसभा चुनाव में बीजेपी की हार और मिजोरम में कांग्रेस की हार सत्ताविरोधी लहर का नतीजा है। ये ट्रेड 2014 के बाद हुए चुनाव में ज्यादातर ऐसा ही ट्रेंड रहा है। 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद जिन राज्यों में भी विधानसभा चुनाव हुए हैं, उनमें ज्यादातर राज्यों में सत्ता विरोधी लहर देखने को मिली है।

छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान विधानसभा चुनाव में बीजेपी की हार और मिजोरम में कांग्रेस की हार भी इसी ट्रेंड का नतीजा है। जबकि तेलंगाना में केसीआर अपनी सत्ता को बचाए रखने में सफल रहे।

केसीआर 2014 के आम चुनाव के बाद हुए विधानसभा चुनावों में सीएम पद बचाने वाले चौथे मुख्यमंत्री बन गए हैं। इससे पहले ओडिशा में नवीन पटनायक के नेतृत्व वाली बीजेडी और पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस ने सत्ता विरोधी लहर से पार पा लिया। दोनों नेता अपनी सरकार बचाए रखने में सफल रहे थे। 2015 के विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार, लालू की पार्टी आरजेडी के साथ गठजोड़ करके बिहार में अपनी सत्ता को बचाए रखने में कामयाब रहे।

इन राज्यों में दिखी सत्ता विरोधी लहर

2014 के लोकसभा चुनाव के बाद महाराष्ट्र, हरियाणा, असम, आंध्र प्रदेश, झारखंड, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव हुए हैं। इन सभी राज्यों में कांग्रेस की सरकारें थीं और उसे सत्ता विरोधी लहर का सामना करना पड़ा। कर्नाटक चुनाव में भी यही हुआ। एक के बाद एक राज्य की सत्ता कांग्रेस के हाथों से खिसकती गई। वहीं, पंजाब में अकाली दल और बीजेपी गठबंधन की सरकार को सत्ता के खिलाफ चली लहर का सामना करना पड़ा और यूपी में अखिलेश यादव को भी ऐसे ही ट्रेंड की वजह से सत्ता गंवानी पड़ी।

आंध्र प्रदेश में टीडीपी ने कांग्रेस और वाईएसआर कांग्रेस को हराकर सत्ता हासिल की। बाकी अन्य सभी राज्यों में बीजेपी विजेता बनकर आई। आंध्र प्रदेश में बीजेपी का कोई वास्तविक और मजबूत आधार नहीं है। पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनाव में बीजेपी और टीडीपी के साथ थी, लेकिन अब दोनों की राह अलग-अलग हैं।

इस कारण उठी सत्ताविरोधी लहर

केंद्र में बदलाव पिछले लोकसभा चुनाव में मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के खिलाफ जबरदस्त सत्ता विरोधी लहर देखने को मिली थी। 2जी स्पेक्ट्रम, कोयला ब्लॉक आवंटन और राष्ट्रमंडल खेल सहित कई घोटालों के चलते लोगों ने मनमोहन सिंह के खिलाफ वोट किया और नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी को स्पष्ट बहुमत देकर देश की सत्ता सौंपी थी।

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