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विधानसभा चुनाव नतीजे 2018 / राहुल गांधी की जीत और भाजपा की हार के क्या हैं मायने, जानें

विधानसभा चुनाव 2018 (Assembly Eelection 2018) के परिणाम भाजपा (BJP)के लिए निराशाजनक रहे तो वहीं कांग्रेस (Congress) पार्टी के लिए खुशी की लहर लेकर आए हैं। लेकिन इन रिजल्टस को लोकसभा चुनाव 2019 (Lok Sabha Elections 2019) का सेमीफाइनल माना जा रहा है।

विधानसभा चुनाव नतीजे 2018 / राहुल गांधी की जीत और भाजपा की हार के क्या हैं मायने, जानें
Assembly Eelection Result 2018
विधानसभा चुनाव 2018 (Assembly Eelection 2018) के परिणाम भाजपा (BJP) के लिए निराशाजनक रहे तो वहीं कांग्रेस (Congress) पार्टी के लिए खुशी की लहर लेकर आए हैं। लेकिन इन रिजल्टस को लोकसभा चुनाव 2019 (Lok Sabha Elections 2019) का सेमीफाइनल माना जा रहा है।
इस बार कांग्रेस ने मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में सरकार बनाने जा रही है। इन तीनों राज्यों में पहले बीजेपी की सरकार थी। इन विधानसभा चुनाव के परिणामों ने राहुल गांधी और कांग्रेस के साथ पीएम नरेंद्र मोदी यानि भाजपा के लिए इस हार के क्या मायने हैं।

पीएम मोदी के लिए चुनावी नतीजों के मायने

अगर पहले बात करें सत्ता में बैठी भाजपा के लिए इस हार के क्या मायने हैं। इस हार का मुख्य कारण भाजपा की लोकप्रियता में कमी आई है। जब उनकी सरकार बनी तो वो देश के सबसे बड़े नेता और लोकप्रियता के मामले में सबसे ऊपर थे।
लेकिन साढ़े 4 साल बाद उनकी लोकप्रियता में कमी आई है। इसका साफ मतलब है कि लोगों का मोदी से मोहभंग हो रहा है। इस बाहर से हो सकता है कि भाजपा में बगावती स्वर उठने लगे लेकिन उस दिन का भी इंतजार करना होगा कि जब लोकसभा में क्या फिर से मोदी शाह की जोड़ी एक बार फिर उभर कर सामने आएंगे।

राहुल गांधी के लिए चुनावी नतीजों के मायने

लोकसभा चुनाव 2019 से पहले विधानसभा चुनावों में भाजपा को मात देने के लिए कांग्रेस ने अपने आपको काफी हद तक बदला। चुनावी नतीजों के दिन ही एक साल पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पार्टी की कमान संभाली थी। एक साल बाद ही राज्यों को फतेह करने का पार्टी कार्यकर्ताओं ने उन्होंने तोहफा दिया।
राहुल गांधी ने पांच में से तीन राज्यों में अच्छा प्रदर्शन किया है इससे कांग्रेस के कार्यकर्ताओं का मनोबल काफी बढ़ा है। गुजरात के चुनाव से लेकर इन चुनावों में भी राहुल गांधी मंदिर-मंदिर जाने के साथ-साथ उन्होंने अपना गोत्र तक बता डाला।
यहीं नहीं हर रैली में केंद्री सरकार की नीतियों पर हमला करते रहे। ऐसे में उन्होंने भाजपा का पीछा कहीं तक नहीं छोड़ा। इस बार की रैलियों में राहुल ने अपने भाषण देने की कला में भी बदलाव किया और हमेशा नए नए खुलासे लेकर सामने आए।
अब सवाल है कि आखिर लोकसभा चुनाव से पहले विधानसभा चुनाव में झटका का कमल ना खिलने का संदेश जनता तक कैसा पहुंचेगा या पीएम मोदी का जादू जनता पर बरकरार रहेगा या नहीं, ये तो आगामी चुनाव के परिणाम ही बताएंगे।
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