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असम के सीमावर्ती गांवों में लोग कर रहे भूटानी मुद्रा का इस्‍तेमाल

खुदरा विक्रेता भूटानी मुद्रा को आसानी से स्वीकार कर रहे हैं।

असम के सीमावर्ती गांवों में लोग कर रहे भूटानी मुद्रा का इस्‍तेमाल
नई दिल्ली. पश्चिमी असम के हटिसोर गांव में एक फोटो स्टूडियो की मालिक 35 वर्षीय अर्चना तमांग ने अक्सर भूटान सीमा पर उनके गांव की पृथकता के बारे में शिकायत की। लेकिन अब यही भूगोलीय स्थिति उनका बचाव कर रही है।
नकदी की कमी को दूर करने के लिए इस सीमावर्ती गांव के लोग भूटानी मुद्रा का प्रयोग कर रहे हैं, जिसकी कीमत भारतीय मुद्रा की तुलना में करीब 25 प्रतिशत तक ऊंचाई पर पहुंच गई है। दादगुरी के सीमावर्ती क्षेत्र में, खुदरा विक्रेताओं और किराने की दुकान के मालिक भूटानी मुद्रा को आसानी से स्वीकार कर रहे हैं।
अर्चना तमांग का कहना है कि 'यहां समस्‍या है, लेकिन जो कुछ भी किया जा रहा है, अच्छा किया जा रहा है. हम भाग्‍यशाली हैं कि यहां भूटानी मुद्रा स्‍वीकार की जा रही है'। उन्‍होंने आगे कहा कि 'यहां हमारे सीमा क्षेत्र में कोई बैंक और एटीएम नहीं है। हम नकद निकासी नहीं कर सकते. हमने अभी तक नई मुद्रा भी नहीं देखी'।
यहां पहली बार किसी ने 2000 रुपये का नया नोट तक देखा, जब उन्‍हें हमने अपने साथ ले जाया गया यह नोट दिखाया। यहां निकटतम बैंक की शाखा 50 किलोमीटर दूर है और सड़क संपर्क एक चुनौती।
एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, स्‍टेट बैंक ऑफ इंडिया की एक मोबाइल वैन यहां हफ्ते में तीन बार आती है, लेकिन वह भी जमा संग्रह के लिए। जिला प्रशासन का कहना है कि एसबीआई से अब नकद वितरित करने के लिए भी कहा है।
चियांग जिले (जोकि इस गांव पर प्रशासन करता है) के उपायुक्त विनोद डेका का कहना है 'अभी उस क्षेत्र के लोग 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों के बदले नए नोट पाने के लिए काजोलगांव और डालीगांव आ रहे हैं। गांव के करीब रुनीखाता शाखा को चार साल पहले स्‍थानांतरित कर दिया गया था'।
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की मोबाइल वैन द्वारा अगले हफ्ते तक नकदी दिए जाने की उम्मीद है। तब तक, इस सीमावर्ती गांव में लोग दैनिक जरूरतों की खरीददारी के लिए भूटानी मुद्रा का उपयोग कर रहे हैं।
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