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असम हत्याकांड: भड़काऊ बयानों को लेकर दो उल्फा नेता गिरफ्तार, उल्फा ने अपनी भूमिका से इनकार किया

असम में शुक्रवार को बातचीत के समर्थक दो उल्फा नेताओं को उनकी "भड़काऊ टिप्पणी" के लिए गिरफ्तार किया गया। तिनसुकिया जिले में पांच लोगों की हत्या में शामिल लोगों को पकड़ने के लिए ‘‘व्यापक खोज अभियान'''' चलाया गया।

असम हत्याकांड: भड़काऊ बयानों को लेकर दो उल्फा नेता गिरफ्तार, उल्फा ने अपनी भूमिका से इनकार किया

असम में शुक्रवार को बातचीत के समर्थक दो उल्फा नेताओं को उनकी "भड़काऊ टिप्पणी" के लिए गिरफ्तार किया गया। तिनसुकिया जिले में पांच लोगों की हत्या में शामिल लोगों को पकड़ने के लिए ‘‘व्यापक खोज अभियान' चलाया गया।

इस बीच मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने राजनीतिक दलों के "नफरती भाषणों" को हत्याओं का जिम्मेदार ठहाराया। असम सरकार ने मारे गए लोगों के परिजनों को 5 लाख रुपये के मुआवजे और एक परिजन को नौकरी का ऐलान किया।
पुलिस ने हमलावर बंदूकधारियों के उल्फा (इंडिपेंडेंट) से जुड़े होने का संदेह जताया है। हालांकि उग्रवादी संगठन के "जनसंपर्क विभाग" के सदस्य रोमल एसोम ने ईमेल से एक बयान जारी कर गुरुवार की घटना में शामिल होने से इनकार किया है। पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने बांग्लाभाषी पांच लोगों की हत्या के विरोध में मार्च निकालकर अदालत की निगरानी में जांच की मांग की।
पार्टी ने असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल के इस्तीफे की भी मांग की। वाम दलों ने भी हत्याओं के विरोध में कोलकाता में विरोध प्रदर्शन किया। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने घटना पर क्षोभ प्रकट करते हुए कहा कि असम के एक गांव में निर्दोष और गरीब लोगों की मौत की घटना से मेरा मन दुख से भर गया है।
उन्होंने टि्वटर पर प्रदर्शित तस्वीर को हटाते हुए उस स्थान को काला छोड़ दिया है। टीएमसी ने इस हमले को राष्ट्रीय नागरिक पंजी से जोड़ते हुए उसका परिणाम बताया है।
असम पुलिस के अनुसार हमलावरों के एक समूह ने गुरुवार को रात करीब आठ बजे खेरोनिबाड़ी गांव के छह लोगों को बाहर निकाला। इसके बाद वे उन्हें इलाके में धोला सदिया पुल लेकर गए और उन पर अंधाधुंध गोलियां चला दीं जिनमें से पांच की मौके पर ही मौत हो गई। इनमें से एक पुल से गिर गया और गोलीबारी से बच गया।
घटना में बचे इकलौते व्यक्ति की सहदेव नामसुद्र ने शुक्रवार सुबह पत्रकारों को बताया कि वह ‘‘सौभाग्य से बच' गया क्योंकि वह पुल के किनारे से गिर गया जहां बंदूकधारियों ने छह लोगों को खड़ा किया और उन्हें गोली मार दी। हालांकि उसे चोटें नहीं आईं लेकिन वह डर से बेहोश हो गया था।
सहदेव ने दावा किया होश में आने पर उसने पाया कि पांच लोगों में से एक अब भी जिंदा है लेकिन कोई मदद मिलने से पहले ही उसकी मौत हो गई।‘‘
निर्दोष लोगों की हत्या' की निंदा करते हुए सोनोवाल ने कहा, ‘‘इस नृशंस हिंसा के दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। हम ऐसे कायरतापूर्ण कृत्यों को बर्दाश्त नहीं करेंगे।'
गुवाहाटी में एक बैठक के बाद उन्होंने पत्रकारों से कहा कि इस स्थिति के लिए मैं राजनीतिक दलों, संगठनों, समाचार माध्यमों, सोशल मीडिया के एक धड़े की भड़काऊ बयानबाजी को जिम्मेदार मानता हूं।
पुलिस महानिदेशक कुलधर सैकिया ने कहा, ‘‘आरोपियों को पकड़ने के लिए अनेक अभियान चलाये गये हैं। बातचीत समर्थक उल्फा नेता जीतेन दत्ता और मृनाल हजारिका को उनके भड़काऊ बयानों के लिए गिरफ्तार किया गया है।
हत्याओं में उल्फा गुट की संलिप्तता के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे ही कोई नाम नहीं ले सकते। हम कानून के अनुसार कार्रवाई करेंगे। पूरे असम में राजनीतिक दलों और संगठनों ने हत्याओं की निंदा करते हुए दोषियों को तुंरत पकड़ने की मांग की। हमले के खिलाफ ऑल असम बंगाली फेडरेशन ने शुक्रवार को बंद आहूत किया।
पुलिस ने बताया कि सड़कों से वाहन नदारद हैं और दुकानें बंद हैं। सुबह तक किसी अप्रिय घटना की खबर नहीं है। सत्तारूढ़ भाजपा ने कहा कि यह घटना कांग्रेस पार्टी के एनसीआर और नागरिकता विधेयक को लेकर लगातार दिए जा रहे भड़काऊ बयानों का परिणाम है। असम भाजपा के अध्यक्ष रंजीत कुमार दास ने भड़काऊ बयानबाजी के लिए मीडिया के एक धड़े की भी आलोचना की।
भाजपा नेताओं के दावों पर निशाना साधते हुए कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने कहा कि सोनोवाल सरकार राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति को बनाए रखने में विफल है। उन्होंने गुरुवार को हुई घटना की सीबीआई जांच की मांग की।

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